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गंगा को सीसामऊ नाले से मिलेगी मुक्ति

Wed, 22 Jun 2016 01:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर Updated Wed, 22 Jun 2016 01:09 AM IST
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Sisamu will discharge from the river Ganga
नाला
कानपुर। गंगा में गिरने वाला शहर का सबसे बड़ा सीसामऊ नाला टैप किया जाएगा। नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा ने इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने की जिम्मेदारी इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड को दे दी है। इसकी पहली मीटिंग मंगलवार को आईआईटी कानपुर में हुई। तय हुआ कि सीसामऊ नाला को बिनगवां और जाजमऊ के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से जोड़ा जाएगा। इस नाला से रोजाना 14 करोड़ लीटर कचरा गंगा में गिरता है। आठ करोड़ लीटर कचरा को बिनगवां और छह करोड़ लीटर कचरा को जाजमऊ ट्रीटमेंट प्लांट से शोधित करने की योजना है। इससे पहले सीसामऊ में एसटीपी बनाया जाना था लेकिन जमीन नहीं मिल सकी। खर्च भी ज्यादा आ रहा था। इस वजह से नाला को दूसरे ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ने का फैसला कर लिया गया। अब नाला बंद करने में किसी तरह की अड़चन नहीं आएगी। खर्च कम आएगा।  
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कानपुर में गंगा को प्रदूषण से मुक्ति दिलाने की डीपीआर इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड बनाएगी। इसकी मानीटरिंग आईआईटी कानपुर के विज्ञानी करेंगे। जिलाधिकारी को वास्तविक स्थिति पर निगाह रखनी है। इसी सिलसिले में मंगलवार को आईआईटी कानपुर में जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा, आईआईटी कानपुर के प्रो. विनोद तारे, इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड के प्रोजेक्ट हेड आरके सिंह और जल निगम के तमाम अफसरों की मीटिंग हुई। कहा गया कि सबसे पहले बिठूर के ब्रह्मावर्त घाट को संवारा जाएगा। इसकी डीपीआर भी प्राथमिकता पर बनेगी। टेनरियों से निकलने वाला क्रोमियम युक्त कचरा भी गंगा में नहीं जाने पाएगा। डीपीआर बनाने वाली कंपनी ने कानपुर में गंगा और उसमें गिरने वाले नालों पर अध्ययन कर लिया है। जल्द ही जिलाधिकारी, केडीए उपाध्यक्ष और नगर आयुक्त के साथ कंपनी, आईआईटी के विज्ञानियों की एक और मीटिंग होगी। फिर डीपीआर बनाने का काम शुरू होगा। इसके बाद पता चलेगा कि गंगा को गंदगी से मुक्ति दिलाने पर कानपुर में कितना बजट खर्च होगा। यह काम जल्द पूरा किया जाना है। अब छोटे-छोटे एसटीपी बनाने की रणनीति बनी है। विज्ञानियों का कहना है कि छोटे प्लांट का संचालन सही ढंग से किया जा सकेगा। अभी बड़े प्लांट हैं लेकिन पूरी तरह से काम नहीं कर रहे हैं। 
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