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राम मंदिर आंदोलन के लिए आजीवन अविवाहित रह गए हरि गुरु
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कानपुर। श्री राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान देश के विभिन्न महानगरों की तरह कानपुर महानगर में भी इस आंदोलन को लेकर कई ऐसे लोग समर्पित रहे जो आज भी याद किए जा रहे हैं 5 अगस्त को अयोध्या में श्री राम मंदिर के निर्माण को लेकर शुरू हो रहे भूमि पूजन के अवसर पर एक बार फिर से ऐसे लोगों को की चर्चा होने लगी है। ऐसे ही लोगों में से एक थे हरि दीक्षित जिन्हें लोग प्यार से हरि गुरु का कर बुलाते थे हरि गुरु स्वभाव से पकड़ी थे और दिन रात मंदिर आंदोलन के लिए समर्पित थे यही वजह है कि उन्होंने आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लिया। विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति का संकल्प सन् 1984 में लिया था। तब आन्दोलन को सफल बनाने के नौजवानों की आवश्यकता महसूस हुई। महानगर में अशोक सिंघल का प्रभावी कार्य क्षेत्र होने के कारण और बजरंगदल के प्रथम राष्ट्रीय संयोजक विनय कटियार का कानपुर गृह जनपद होने के कारण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हरि दीक्षित इन दोनों के काफी नजदीकी थे। महानगर में बजरंगदल संगठन को घण्टाघर, भूसा टोली, लाल बंगला, शिवाला, कमला टावर, नयागंज, किदवई नगर, शास्त्री नगर, रावतपुर, देवनगर, चन्द्रिका देवी, कर्नलगंज, रामबाग, जूही, गोविन्द नगर आदि क्षेत्रों में 10 नवम्बर 1989 में श्रीराम जन्मभूमि शिला पूजन के कार्यक्रम तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मार्गदर्शन में काफी विस्तार कर लिया था। हरि गुरु की भूमिका अग्रणी थी 1990 में 30 अक्टूबर व दो नवम्बर को होने वाली कारसेवा के लिए और 6 दिसम्बर 1992 को अयोध्या जाने वाले नौजवानों को प्रेरित करने में उनकी भूमिका को सदैव याद किया जाएगा। अविवाहित होने के कारण उनके हूलागंज स्थित उनके आवास को ही सभी कार्यकर्ता उस समय बजरंगदल कानपुर महानगर कार्यालय के रूप में इस्तेमाल करते थे। ---------- उन्नाव के थे मूल निवासी कानपुर। हरि गुरु मूल रूप से उन्नाव के निवासी थे। सदैव हिन्दू समाज के कार्यों के लिए और बजरंगदल के माध्यम से अपनी कार्य शैली के लिए जाने जाते थे। हरि गुरु बजरंगदल के संभाग संयोजक, प्रान्तीय संयोजक, विहिप के प्रान्तीय मन्त्री, क्षेत्रीय मन्त्री के दायित्व का निर्वहन कर सन् 2006 में दीपावली के दिन 63 वर्ष की आयु में इस दुनिया से विदा हो गए। विश्व हिन्दू परिषद के प्रान्तीय सहमन्त्री दीनदयाल गौड़ ने बताया कि 1988 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक कार्यक्रम में भेंट के बाद उन्होंने उन्हें बजरंग दल कार्य को करने के लिए प्रेरित किया था। --------- कई लोगो को राजनीति भी सिखाई कानपुर। हरि गुरु ने मंदिर आंदोलन के साथ महानगर के कई युवाओं को राजनीति का पाठ भी पढ़ाया। बताया जाता है कि कैबिनेट मंत्री सतीश महाना उनके सबसे अधिक नजदीकी शिष्यों में रहे । हरि गुरु का महाना के पिता राम अवतार महाना से काफी परिवारिक लगाव था। इसी तरह पूर्व विधायक राकेश सोनकर को भी उन्होंने राजनीति का ककहरा सिखाया। हरि गुरू के परिवार में तीन भाई और एक बहन थी। अब सिर्फ एक भाई अभी उन्नाव में रहते है। विश्व हिंदू परिषद पांच अगस्त को हरि गुरू को सम्मानित करेगी।
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