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विडंबना: रेलवे के रिकॉर्ड में पड़ने लगा कोहरा, 20 ट्रेनों को कर दिया निरस्त
Thu, 02 Dec 2021 10:10 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 02 Dec 2021 10:10 AM IST
सार
दिसंबर शुरू होते ही रेलवे मान लेता है कि कोहरे वाली सर्दी शुरू हो गई है। उसी हिसाब से ट्रेनों को निरस्त करने की सूची तैयार कर जारी कर दी जाती है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : istock
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विस्तार
कोहरा शुरू होने के पहले रेलवे ने ट्रेनों को निरस्त कर दिया है। एक दिसंबर से निर्धारित शेड्यूल के मुताबिक कानपुर से होकर चलने वाली 20 ट्रेनों को निरस्त कर दिया गया है। जलवायु परिवर्तन का असर मौसम पर पड़ा है लेकिन रेलवे में यह गर्मी और सर्दी का मौसम अंग्रेजी शासन में रिकॉर्ड किया गया था, जो अभी तक चल रहा है। मसलन, दिसंबर शुरू होते ही रेलवे मान लेता है कि कोहरे वाली सर्दी शुरू हो गई है। उसी हिसाब से ट्रेनों को निरस्त करने की सूची तैयार कर जारी कर दी जाती है।
जलवायु परिवर्तन का रेलवे की सारणी में प्रभाव नहीं
भारतीय भौगोलिक व्यवस्था जलवायु परिवर्तन से प्रभावित हुई है, लेकिन इसका प्रभाव भारतीय रेलवे की सरणी पर नहीं पड़ा है। अभी कोहरा नहीं गिर रहा है, इसके बावजूद कोहरे की वजह से कानपुर होकर चलने वाली 20 ट्रेनें निरस्त कर दी गईं। देश में करीब 50 है। इन ट्रेनों में पहले से रिजर्वेशन करा चुके यात्री परेशान हैं। कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर टिकट कैंसिल कराने आए जाजमऊ के मोहम्मद हनीफ ने बताया कि उन्हें दो दिसंबर को कानपुर से सियालदह-अजमेर एक्सप्रेस से अजमेर जाना था। अभी कोहरा नहीं है लेकिन रेलवे ने कोहरे की वजह से ट्रेन को निरस्त कर दिया है। इसी तरह चंडीगढ़ जाने वाले मंजीत सिंह भी अपना काउंटर टिकट का रिफंड लेने सेंट्रल आए थे। उन्हें एक दिसंबर को ही ऊंचाहार एक्सप्रेस से चंडीगढ़ जाना था।
रेलवे के रिकार्ड में 15 अप्रैल से 15 अक्तूबर तक गर्मी
रेलवे स्टेशनों पर पंखे चलने और ठंडा पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था 15 अप्रैल से शुरू होकर 15 अक्टूबर तक रहती है। रेलवे के रिकॉर्ड के मुताबिक यही गर्मी का सीजन है। इसके पहले न तो किसी को गर्मी लगती है और न ही इस सीजन के बाद किसी को ठंडे पानी या पंखे की जरूरत होती है। कानपुर सेंट्रल स्टेशन समेत सभी रेलवे स्टेशनों के पंखे 15 अक्तूबर को बंद हो चुके हैं। ठंडे पानी की व्यवस्था के लिए वाटर कूलर भी 15 अक्तूबर से बंद है।
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जलवायु परिवर्तन का रेलवे की सारणी में प्रभाव नहीं
भारतीय भौगोलिक व्यवस्था जलवायु परिवर्तन से प्रभावित हुई है, लेकिन इसका प्रभाव भारतीय रेलवे की सरणी पर नहीं पड़ा है। अभी कोहरा नहीं गिर रहा है, इसके बावजूद कोहरे की वजह से कानपुर होकर चलने वाली 20 ट्रेनें निरस्त कर दी गईं। देश में करीब 50 है। इन ट्रेनों में पहले से रिजर्वेशन करा चुके यात्री परेशान हैं। कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर टिकट कैंसिल कराने आए जाजमऊ के मोहम्मद हनीफ ने बताया कि उन्हें दो दिसंबर को कानपुर से सियालदह-अजमेर एक्सप्रेस से अजमेर जाना था। अभी कोहरा नहीं है लेकिन रेलवे ने कोहरे की वजह से ट्रेन को निरस्त कर दिया है। इसी तरह चंडीगढ़ जाने वाले मंजीत सिंह भी अपना काउंटर टिकट का रिफंड लेने सेंट्रल आए थे। उन्हें एक दिसंबर को ही ऊंचाहार एक्सप्रेस से चंडीगढ़ जाना था।
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रेलवे के रिकार्ड में 15 अप्रैल से 15 अक्तूबर तक गर्मी
रेलवे स्टेशनों पर पंखे चलने और ठंडा पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था 15 अप्रैल से शुरू होकर 15 अक्टूबर तक रहती है। रेलवे के रिकॉर्ड के मुताबिक यही गर्मी का सीजन है। इसके पहले न तो किसी को गर्मी लगती है और न ही इस सीजन के बाद किसी को ठंडे पानी या पंखे की जरूरत होती है। कानपुर सेंट्रल स्टेशन समेत सभी रेलवे स्टेशनों के पंखे 15 अक्तूबर को बंद हो चुके हैं। ठंडे पानी की व्यवस्था के लिए वाटर कूलर भी 15 अक्तूबर से बंद है।
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आम तौर पर दिसंबर में ही कोहरा पड़ता है। ट्रेन लंबी दूरी तय करती है। किसी रीजन में कोहरा होता है और कहीं नहीं। इसके अलावा यात्रियों को बुकिंग सीटों की तारीखों में ट्रेनें कैंसिल होने की जानकारी पहले से मिल जाए, इसलिए पहले ही सर्दी के मौसम में निरस्त होने वाली ट्रेनों की जानकारी दे दी जाती है। गर्मियों में शिकायतें आने पर समय के पहले पंखों को चलाने के निर्देश दिए जाते हैं। समय-समय पर नियमों की समीक्षा की जाती है। - डॉ. शिवम शर्मा, सीपीआरओ, उत्तर मध्य रेलवे