27 साल बाद पकड़ा गया फरार उम्रकैदी, हत्या के जुर्म में हुई थी सजा
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सुमेरपुर के इंगोहटा गांव में वर्ष 1976 में रामसेवक की मामूली कहासुनी पर हत्या कर दी गई थी। इस जुर्म में रोशन खां समेत चार को दोषी करार देकर वर्ष 1990 में उम्रकैद व जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। 1991 में उम्रकैद की सजा काटने के दौरान रोशन खां तीन महीने के पैरोल पर घर आया तो फिर वापस जेल नहीं गया। पुलिस भी उसका कोई पुलिस सुराग नहीं लगा सकी। बीते साल तत्कालीन एसपी ने फरार कैदी रोशन पर 15 हजार रुपये का इनाम घोषित किया।
स्वाट टीम प्रभारी एमपी त्रिपाठी ने बताया कि रोशन की तलाश में वह लंबे समय से थे। मंगलवार को उसे इंगोहटा बस स्टैंड के पास धर दबोचा और सुमेरपुर एसओ महेंद्र कुमार वर्मा के सुपुर्द कर दिया गया। इस संबंध में एसओ का कहना है कि रोशन पहले से ही सजायाफ्ता है। उस पर कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा। उसे नैनी जेल भेज दिया गया है।
बताया जाता है कि रोशन खां के फरार होने के बाद उसकी जमानत लेने वालों को अदालत के चक्कर लगाने पड़े और वह मुंबई, सूरत जैसे शहरों में रहकर रोजी-रोटी चलाता रहा। इधर उम्र के आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुका रोशन (70 साल) एक साल से इंगोहटा स्थित अपने पैतृक घर गुपचुप तरीके से आता था। हत्या के मामले में उसके साथी इकराम व मोहम्मद अली उर्फ छुट्टन सजा काटकर घर आ चुके हैं। चौथे आरोपी जगरूप सिंह की नैनी जेल में बीमारी से मौत हो चुकी है।