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Kanpur News: प्रणव को अवैध तरीके से ढाई महीने राॅयल क्लिफ और रीजेंटा में रखा, जारी होगा नोटिस

Wed, 28 Oct 2026 02:38 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 28 Oct 2026 02:38 AM IST
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Pranav was kept illegally at Royal Cliff and Regenta for two and a half months; a notice will be issued.
कानपुर। सिंहानिया घराने की संपत्ति हड़पने के आरोपियों ने प्रणव को होटल राॅयल क्लिफ और रीजेंटा में करीब ढाई महीने तक बिना लिखापढ़ी के रखा। इसके साथ ही होटलों में ही रजिस्ट्री भी कराई। सीपी रघुबीर लाल ने इसे कानून का उल्लंघन बताया। कहा कि होटल संचालकों को नोटिस जारी किया जाएगा। वहीं, रजिस्टरी करने पहुंचे रजिस्ट्रार ने भी प्रणव की हालत देख संशय जाहिर किया था। आरोपियों ने यह कहकर रजिस्ट्रार को समझा दिया था कि तबीयत ठीक न होने के कारण प्रणव ऐसा लग रहा है। इसके साथ ही अधिवक्ताओं ने आरोपियों को छुड़ाने के लिए दिन-रात पुलिस की घेराबंदी की।
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सोमवार रात थाने पहुंचे अधिवक्ताओं के दो वीडियो वायरल हुए हैं। पहले वीडियो में पुलिस पर आरोप लगाया कि बिना किसी लिखापढ़ी के गिरफ्तारी की जा रही है। न कोई तहरीर दिखाई जा रही है और न ही प्राथमिकी की काॅपी ही दी जा रही है। इसके बाद श्रीराम उर्फ रमित की हालत बिगड़ी तो साथी उसे लेकर हैलट पहुंचे।
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दूसरे वीडियो में दिख रहा है कि बेड पर आरोपी रमित लेटा है और उसके साथियों की पुलिस से कहासुनी हो रही है। इसके बाद मंगलवार दोपहर जब पुलिस तीनों आरोपियों को लेकर कोर्ट पहुंची तो 30-40 अधिवक्ताओं ने एक बार फिर से स्वरूपनगर पुलिस की घेराबंदी शुरू कर दी। मामला संभालने के लिए अधिकारियों ने फजलगंज इंस्पेक्टर को मौके पर भेजा। करीब तीन-चार घंटों की जद्दोजहद के बाद आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा सका।
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सूत्रों का कहना है कि आरोपियों में कुछ बड़े बिल्डर हैं तो कुछ अधिवक्ताओं से भी जुड़े हैं। इस कारण उनकी गिरफ्तारी की सूचना मिलते ही उनके समर्थक एकत्र हो गए। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि समर्थक लिखापढ़ी में गिरफ्तारी से पहले आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामले की प्राथमिकी की काॅपी हासिल करने के प्रयास में थे, ताकि उन्हें राहत दिलाई जा सके।


- कमिश्नर साहब, आरोपियों को हवालात से बाहर करिए
सोमवार रात से ही आरोपियों के सिंडिकेट ने पुलिस पर दबाव बनाने के लिए पुलिस कमिश्नर को कई फोन किए। सूत्रों के अनुसार कुछ ने फोन में तो सीपी से यह तक कहा कि कमिश्नर साहब बिना किसी तहरीर और एफआईआर के इन तीनों लोगों को इस तरह हवालात में नहीं रखा जा सकता। उन्हें फौरन बाहर निकालिए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करना आसान नहीं था। यही वजह थी कि मामले को गोपनीय रखा जा रहा था।


- चचेरे भाई ने दी क्लीन चिट तो सामने आया मामला
सीपी ने बताया कि इसी साल जुलाई में प्रणवपत के पारिवारिक शरदपत सिंहानिया ने उनके समेत बिल्डर अनूप अस्थाना, सुयश अस्थाना, बिजेंद्र नाथ मिश्रा और बार एसो. के पूर्व अध्यक्ष नरेशचंद्र त्रिपाठी समेत अन्य लोगों के खिलाफ वसूली और प्रताड़ित करने की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसी मामले की जांच शुरू की गई तो शरदपत के बेटे विदुवपत ने अपने चचेरे भाई प्रणव का पक्ष लिया। पुलिस को बताया था कि प्रवण का मामले में कोई हाथ नहीं था बल्कि उसे भी बाकी के आरोपियों ने प्रताड़ित कर रखा है। इसके बाद जब पुलिस ने प्रणव से पूछताछ की तो उसने सुयश, अनूप, श्रीराम व बृजेंद्र की करतूतें बयां कीं। इसके बाद पुलिस ने गोपनीय तरीके से जांच शुरू की और आरोपियों की गिरफ्तारी की भी किसी को भनक तक न लगने दी।



- प्रणव को नशे की हालत में रजिस्ट्रार ने भी किया था मना
फजलगंज पुलिस ने बताया कि जिस वक्त होटल में चारों आरोपी मकान और दुकानों की रजिस्टरी कराने के लिए होटल पहुंचे तो वहां नशीले इंजेक्शन लेने के बाद अर्ध बेहोशी की हालत में प्रणव को देख उन्हें भी मामला कुछ गड़बड़ लगा। आरोपियों ने यह कहकर रजिस्ट्रार को समझा दिया कि तबीयत ठीक न होने के कारण प्रणव ऐसा लग रहा है। इसके बाद कागजों में हस्ताक्षर कराने शुरू कर दिए। प्रणव के मुताबिक सुयश से उसकी 2020 में दोस्ती हुई थी और वह अक्सर उनसे उसकी संपत्ति के बारे में पूछा करता था। क्या पता था कि एक दिन दोस्ती में खंजर भोंक देगा।





- बीएनएस की इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
115 (2) : जानबूझकर किसी व्यक्ति को चोट पहुंचाना
352 : जानबूझकर अपमान करना।
123 : अपराध करने के इरादे से किसी को नशीला पदार्थ देना।
351 (3): गंभीर चोट पहुंचाने की धमकी देना।
140 (2) : हत्या के इरादे से किसी का अपहरण करना।
109 (1) : हत्या का प्रयास करना।
61 (2) : आपराधिक साजिश करना।
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