{"_id":"5e95e5cb8ebc3e728d3a9811","slug":"policeman-got-a-phone-from-the-hospital-you-have-got-a-daughter","type":"story","status":"publish","title_hn":"ड्यूटी पर तैनात सिपाही को आया फोन, आपको बेटी हुई है, बोला...लॉकडाउन खत्म होने के बाद गोद में उठाऊंगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ड्यूटी पर तैनात सिपाही को आया फोन, आपको बेटी हुई है, बोला...लॉकडाउन खत्म होने के बाद गोद में उठाऊंगा
Tue, 14 Apr 2020 10:22 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 14 Apr 2020 10:22 PM IST
विज्ञापन
आरक्षी रमाकांत
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को लॉकडाउन दूसरे चरण का ऐलान किया है। इस वैश्विक महामारी को हराने के लिए तमाम कोरोना वॉरियर्स ने अपने दिन रात एक कर दिए हैं। ऐसा ही एक मामला इटावा जिले का है। यहां एक सिपाही बीते 12 दिनों से अपनी नवजात बेटी की तस्वीर देख अपना मन बहला रहा है।
संकट की घड़ी में कुछ कोरोना योद्धाओं को खुशी के पल मिले हैं, लेकिन उन्होंने इन ‘पलों’ को संतोष की चादर से ढंक दिया है। सही वक्त का इंतजार करना ही बेहतर है। कोतवाली में तैनात आरक्षी रमाकांत के घर दो अप्रैल को बेटी ने जन्म लिया है।
यह खबर सुनते ही उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। लेकिन ड्यूटी जरूरी है। वह बोले दिल तो किया कि एटा स्थित घर चला जाऊं। बेटी को गोद में खिलाऊं। लेकिन महामारी से निपटना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है।
विज्ञापन
लॉकडाउन के बाद ही उसे गोद में उठाऊंगा। आज बेटी का नामकरण भी है। वीडियो कॉलिंग के जरिए बेटी को देखा है। इसी के जरिए अपनी नन्हीं परी से मिलता रहूंगा। ऐसे माहौल में छुट्टी मांगना भी सही नहीं है। ड्यूटी में जरा सी चूक बड़े जोखिम को दावत दे सकती है।
विज्ञापन
संकट की घड़ी में कुछ कोरोना योद्धाओं को खुशी के पल मिले हैं, लेकिन उन्होंने इन ‘पलों’ को संतोष की चादर से ढंक दिया है। सही वक्त का इंतजार करना ही बेहतर है। कोतवाली में तैनात आरक्षी रमाकांत के घर दो अप्रैल को बेटी ने जन्म लिया है।
विज्ञापन
यह खबर सुनते ही उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। लेकिन ड्यूटी जरूरी है। वह बोले दिल तो किया कि एटा स्थित घर चला जाऊं। बेटी को गोद में खिलाऊं। लेकिन महामारी से निपटना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है।
विज्ञापन
लॉकडाउन के बाद ही उसे गोद में उठाऊंगा। आज बेटी का नामकरण भी है। वीडियो कॉलिंग के जरिए बेटी को देखा है। इसी के जरिए अपनी नन्हीं परी से मिलता रहूंगा। ऐसे माहौल में छुट्टी मांगना भी सही नहीं है। ड्यूटी में जरा सी चूक बड़े जोखिम को दावत दे सकती है।