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Kanpur News: सिर्फ पानी के रंग से गुणवत्ता परख सेवन कर रहे लोग

Sun, 25 Jan 2026 01:53 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर Updated Sun, 25 Jan 2026 01:53 AM IST
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People are testing the quality of water just by its colour.
कानपुर देहात। खानचंद्रपुर व उसके मजरों के साथ रनियां नगर पंचायत के चार वार्डों में स्वास्थ्य विभाग ने क्रोमियम, मर्करी, फ्लोराइड जांचने के लिए सैंपल लिए हैं। पिछली जांचों में क्रोमियम पाया गया। हाल ही में लिए गए सैंपल के बाद लोगों के शरीर में आंशिक रूप से अधिक फ्लोराइड मिला है। इससे लोगों को स्वास्थ्य की चिंता सता रही है। लोगों का कहना है कि उद्यम स्थापित होने से रनियां को एक नई पहचान तो मिली मगर इन उद्योगों से निकलने वाला कचरा यहां के लोगों के जीवन पर दाग लगाने लगा है। क्रोमियम डंप रहने से यहां का भूजल दूषित हो गया है। नगर पंचायत से मिलने वाले पानी के अलावा घरों में लगे पानी की गुणवत्ता महज उसके रंग से परख कर सेवन कर रहे हैं। इसके चलते न चाहते हुए भी लोगों के खून में मानक से अधिक क्रोमियम, मर्करी व फ्लोराइड का जहर घुल रहा है। खानचंद्रपुर-मटियामऊ मार्ग पर 20 साल तक करीब 95000 मीट्रिक टन क्रोमियम कचरा डंप बना रहने से यहां का भूजल दूषित हो गया।
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इससे खानचंद्रपुर व उमरन के लोगों के खून में जहरीला क्रोमियम घुलने लगा है। इसके बाद अभी डंप स्थल पर मिट्टी युक्त क्रोमियम पड़ा है। इसमें भरने वाला पानी दूषित होकर जमीन के अंदर तक जा रहा है। वहीं, फैक्टरियों के लिए जल निकासी के उचित प्रबंध न होने के चलते कई फैक्टरियों से निकलने वाला दूषित पानी नालों में भरा रहता है या फिर फैक्टरी प्रबंधन अपनी चिह्नित जमीन में डाल देता है। इससे भी भूजल दूषित होने की आशंका बनी हुई है। लोगों को समस्याएं होने पर वर्ष 2022 से दिल्ली आईटीआई की रामानुजन फैकल्टी के विशेषज्ञ खानचंद्रपुर व इसके आसपास के क्षेत्र में जांच पड़ताल की थी।
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रामनुजन फैकल्टी के प्रोफेसर डॉ. पंकज गुप्ता के अनुसार टीम ने दो स्तर पर जांच की थी। टीम को 60 फीट के बोरवेल के पानी में 45 माइक्रोग्राम तक क्रोमियम मिला था। इसके अलावा टीम ने 220 से 500 फीट नीचे के जल स्तर की भी जांच की थी। जिसमें टीम को पानी के इतने अंदर तैलीय प्रदूषण मिला था। इस पर उन्होंने आशंका जताते हुए बताया कि प्रतीत होता है कि कुछ इकाइयों से निकलने वाले औद्योगिक कचरे का प्रबंधन जमीन में किया जा रहा है।
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इधर खानचंद्रपुर व इससे सटे इलाकों के लोगों का कहना है कि गांव में क्रोमियम युक्त पानी पीले रंग का आता है। जिससे लोगों पीने से बचते हैं, उन लोगों को नगर पंचायत की ओर से दिन में तीन बार पानी की सप्लाई दी जाती है। पानी आने में देरी होने पर वह गांव में लोगों के घरों में लगी सबमर्सिबल से पानी लेकर का प्रयोग करते हैं। जिनका पानी साफ दिखता हो, ज्यादा बदबू न आती हो, उनको यह जानकारी नहीं है कि पानी में क्रोमियम, मर्करी व फ्लोराइड घुला है या नहीं।
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