जिंदा को मुर्दा बताकर दे दी पेंशन की टेंशन
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चालू वित्तीय वर्ष में जिले में 47,942 बुजुर्गों को पेंशन देने का लक्ष्य था। लेकिन अभी तक 46,057 के खातों में ही पेंशन जा रही है। इसके लिए शासन ने 23 करोड़ रुपये दिए थे। इसमें 5.65 करोड़ रुपये ही पेंशनरों को भेजे जा रहे हैं। पिछले दिनों समाज कल्याण विभाग ने बुजुर्ग पेंशन धारकों का सत्यापन कराया था। ग्राम पंचायत व ग्राम्य विकास अधिकारियों ने जांच की। प्रधानों की सूचना के आधार सत्यापन पूरा किया और सूची विभाग को सौंप दी। इसमें तमाम बुजुर्ग ऐेसे हैं जो जीवित हैं, लेकिन उन्हें मृत दिखाया गया। इस पर समाज कल्याण विभाग ने उनकी पेंशन रोक दी।
पिछले साल कुल मिलाकर 1182 वृद्धों को मृत मानकर पेंशन बंद कर दी गई। इस साल 46057 पेंशनधारकों में 263 बुजुर्गों की मौत हो जाने पर उनकी पेंशन रोकी गई। उधर, शासन से लक्ष्य व बजट होने के बाद भी बुुजुर्ग पेंशन धारकों की संख्या नहीं बढ़ाई जा सकी। अभी 1885 पेंशन धारकों के लिए धनराशि बची है। इतने बुजुर्गों को पेंशनधारकों में शामिल किया जाना है। समाज कल्याण विभाग में आवेदनों की भरमार होते हुए भी नए पेंशन धारक शामिल नहीं किए जा सके।