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मरीज ने पेट दर्द का बहाना बनाकर मां को डॉक्टर के पास भेजा, खिड़की से कूदकर दे दी जान
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 12 Jun 2018 07:09 AM IST
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अस्पताल की खिड़की से कूदकर मरीज ने दी जान
- फोटो : अमर उजाला
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यूपी के कानपुर में मुरारी लाल चेस्ट अस्पताल में भर्ती मरीज ने सोमवार को पहली मंजिल की खिड़की से कूदकर जान दे दी। वह बीमारी से आजिज आ चुका था।
ग्राम रुदाहा, साहेल (औरैया) निवासी मुनीम सिंह के बेटे अमित राजपूत (35) को नौ जून को मुरारी लाल चेस्ट अस्पताल के वार्ड-2 के बेड नंबर छह पर भर्ती कराया गया था। यह वार्ड अस्पताल की पहली मंजिल पर है। डॉ. अवधेश कुमार उसका इलाज कर रहे थे।
इसी वार्ड में भर्ती अन्य मरीजों के तीमारदारों के मुताबिक सुबह करीब पौने पांच बजे अमित ने पेट में असहनीय दर्द की बात कहकर मां को डॉक्टर को बुलाने के लिए भेज दिया। पिता को भी दर्द निवारक तेल खरीदने के लिए मेडिकल स्टोर भेज दिया। इसके बाद वह चुपचाप वार्ड से निकला और दरवाजे के सामने बरामदे में खुली खिड़की से बिल्डिंग के बाहर कूद गया।
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ग्राम रुदाहा, साहेल (औरैया) निवासी मुनीम सिंह के बेटे अमित राजपूत (35) को नौ जून को मुरारी लाल चेस्ट अस्पताल के वार्ड-2 के बेड नंबर छह पर भर्ती कराया गया था। यह वार्ड अस्पताल की पहली मंजिल पर है। डॉ. अवधेश कुमार उसका इलाज कर रहे थे।
इसी वार्ड में भर्ती अन्य मरीजों के तीमारदारों के मुताबिक सुबह करीब पौने पांच बजे अमित ने पेट में असहनीय दर्द की बात कहकर मां को डॉक्टर को बुलाने के लिए भेज दिया। पिता को भी दर्द निवारक तेल खरीदने के लिए मेडिकल स्टोर भेज दिया। इसके बाद वह चुपचाप वार्ड से निकला और दरवाजे के सामने बरामदे में खुली खिड़की से बिल्डिंग के बाहर कूद गया।
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मरीज ने इसी खिड़की से कूदकर दी थी जान
- फोटो : अमर उजाला
गिरने की आवाज सुनकर तीमारदार वहां पहुंचे, तब तक वह बेहोश हो चुका था। खून बह रहा था। तुरंत जूनियर ़डॉक्टरों को बुलाया। सूचना पाकर पहुंचे डॉ. अवधेश कुमार ने उसे मृत घोषित कर दिया। बताया गया कि उसने बीमारी से ऊबकर जान दे दी।
डॉ. अवधेश कुमार ने बताया कि अमित को एमडीआर (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट) टीबी थी। उसके पिता ने बताया था कि वह छह महीने से बेटे का इलाज एक नर्सिंगहोम में करा रहे थे। इलाज में लाखों रुपये खर्च हो गए। आर्थिक स्थिति खराब होने के बाद वह बेटे को चेस्ट अस्पताल लाए थे। डा. अवधेश कुमार ने बताया कि अमित को साइक्लोसिन नामक गोली दी जा रही थी। इस गोली से कुुछ मरीजों में आत्महत्या की प्रवृत्ति विकसित हो सकती है। संभवता: अमित के साथ भी ऐसा ही हुआ होगा।
2007 में दूसरी मंजिल से कूदा था मरीज
अस्पताल सूत्रों के अनुसार इसी अस्पताल की दूसरी मंजिल से वर्ष 2007 में टीबी का एक मरीज कूद गया था। उसे फ्रैक्चर हो गया थे। हैलट में इलाज से उसकी जान बच पाई थी।
डॉ. अवधेश कुमार ने बताया कि अमित को एमडीआर (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट) टीबी थी। उसके पिता ने बताया था कि वह छह महीने से बेटे का इलाज एक नर्सिंगहोम में करा रहे थे। इलाज में लाखों रुपये खर्च हो गए। आर्थिक स्थिति खराब होने के बाद वह बेटे को चेस्ट अस्पताल लाए थे। डा. अवधेश कुमार ने बताया कि अमित को साइक्लोसिन नामक गोली दी जा रही थी। इस गोली से कुुछ मरीजों में आत्महत्या की प्रवृत्ति विकसित हो सकती है। संभवता: अमित के साथ भी ऐसा ही हुआ होगा।
2007 में दूसरी मंजिल से कूदा था मरीज
अस्पताल सूत्रों के अनुसार इसी अस्पताल की दूसरी मंजिल से वर्ष 2007 में टीबी का एक मरीज कूद गया था। उसे फ्रैक्चर हो गया थे। हैलट में इलाज से उसकी जान बच पाई थी।