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गुजरात से लौटने वालों का दर्दः ''पता नहीं कब, कौन, कहां से आकर मारने लगे''
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 10 Oct 2018 08:31 AM IST
सार
- कानपुर के सैकड़ों लोग गुजरात में, कुछ ने फोन पर बताई पीड़ा
- परिवार साथ में होने की वजह से नहीं बना पा रहे वापसी का मन
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परिवार साथ में होने की वजह से नहीं बना पा रहे वापसी का मन
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विस्तार
किसी एक के किए की सजा पूरे उत्तर भारतीयों को मिले, ये ठीक सोच नहीं है। गुजरात में इन दिनों ऐसा ही हो रहा है। यूपी और बिहार के जिन लोगों की वजह से गुजरात समृद्ध है, वहां उनके श्रम को नजरअंदाज करते हुए उन पर हमले किए जा रहे हैं। पता नहीं होता किस बात पर कब, कौन, कहां से आकर मारने लगे। इसी भय की वजह से अकेले रहने वाले लोग गुजरात से पलायन कर रहे हैं।
यह पीड़ा बताई है बरीपाल के ठेकेदार रामू ठाकुर ने। रामू अभी गुजरात में रह रहे हैं। रामू जैसे कानपुर के सैकड़ों लोग सूरत, अहमदाबाद, बड़ौदा, वापी में अलग-अलग तरह का काम करते हैं। कुछ फैक्ट्रियों, बड़े प्रतिष्ठानों में मैनेजर जैसे पदों पर हैं तो कामगारों की भी अच्छी खासी संख्या है। सूरत शहर भले ही शांत हो लेकिन बाहरी क्षेत्र में भय का आलम ये है कि उत्तर भारतीय अकेले निकलने से कतरा रहे हैं। रामू ठेकेदारी करते हैं। इनके साथ दर्जनों लोग अलग अलग स्थानों पर काम कर रहे हैं। वे अपने कामगारों के लिए चिंतित हैं।
गुजरात में रह रहे दादानगर के अजय बाथम बताते हैं कि जो लोग परिवार के साथ रह रहे हैं वे हालात सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं। हालात न सुधरे तो वे लोग भी निकलने की कोशिश करेंगे। कानपुर के जो लोग गुजरात के शहरों में हैं वे बार-बार अपने परिचितों को फोन करके हालात का जायजा ले रहे हैं।
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यह पीड़ा बताई है बरीपाल के ठेकेदार रामू ठाकुर ने। रामू अभी गुजरात में रह रहे हैं। रामू जैसे कानपुर के सैकड़ों लोग सूरत, अहमदाबाद, बड़ौदा, वापी में अलग-अलग तरह का काम करते हैं। कुछ फैक्ट्रियों, बड़े प्रतिष्ठानों में मैनेजर जैसे पदों पर हैं तो कामगारों की भी अच्छी खासी संख्या है। सूरत शहर भले ही शांत हो लेकिन बाहरी क्षेत्र में भय का आलम ये है कि उत्तर भारतीय अकेले निकलने से कतरा रहे हैं। रामू ठेकेदारी करते हैं। इनके साथ दर्जनों लोग अलग अलग स्थानों पर काम कर रहे हैं। वे अपने कामगारों के लिए चिंतित हैं।
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गुजरात में रह रहे दादानगर के अजय बाथम बताते हैं कि जो लोग परिवार के साथ रह रहे हैं वे हालात सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं। हालात न सुधरे तो वे लोग भी निकलने की कोशिश करेंगे। कानपुर के जो लोग गुजरात के शहरों में हैं वे बार-बार अपने परिचितों को फोन करके हालात का जायजा ले रहे हैं।
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गुजरात हिंसा के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन
कानपुर के सैकड़ों लोग गुजरात में, कुछ ने फोन पर बताई पीड़ा
यूपी और बिहार के लोगों साथ गुजरात में की जा रही हिंसा के विरोध में कांग्रेसियों ने मंगलवार को जुलूस निकालकर विरोध जताया। जुलूस पार्टी कार्यालय तिलक हॉल से शुरू होकर कोतवाली चौराहे तक गया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और गुजरात के मुख्य मंत्री विजय रूपानी का पुतला फूंका।
शहर अध्यक्ष हरप्रकाश अग्निहोत्री ने कहा कि जिस गुजरात ने देश को महात्मा गांधी जैसा महापुरुष दिया, जिसने शांति और अहिंसा का संदेश दिया। सरदार पटेल जैसा सपूत दिया उसी गुजरात में निर्दोषों को बेघर किया जा रहा है। इसके बावजूद न तो प्रधानमंत्री, न गुजरात के मुख्यमंत्री और न ही भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह कुछ बोल रहे। इस मौके पर भूधर नारायन मिश्रा, शंकर दत्त मिश्रा, निजामुद्दीन खां, इकबाल अहमद, कमल जायसवाल, अशोक धानविक, राजकुमार यादव, नौशाद आलम मंसूरी, ग्रीनबाबू सोनकर, संदीप शुक्ला, केके तिवारी, नदीम सिद्दीकी, सैमुअल सिंह लकी, अजय विग, विजय त्रिपाठी, विजय नारायन शुक्ला, मोहित मिश्रा, किरन गुप्ता, कृपेश त्रिपाठी सहित काफी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
शहर अध्यक्ष हरप्रकाश अग्निहोत्री ने कहा कि जिस गुजरात ने देश को महात्मा गांधी जैसा महापुरुष दिया, जिसने शांति और अहिंसा का संदेश दिया। सरदार पटेल जैसा सपूत दिया उसी गुजरात में निर्दोषों को बेघर किया जा रहा है। इसके बावजूद न तो प्रधानमंत्री, न गुजरात के मुख्यमंत्री और न ही भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह कुछ बोल रहे। इस मौके पर भूधर नारायन मिश्रा, शंकर दत्त मिश्रा, निजामुद्दीन खां, इकबाल अहमद, कमल जायसवाल, अशोक धानविक, राजकुमार यादव, नौशाद आलम मंसूरी, ग्रीनबाबू सोनकर, संदीप शुक्ला, केके तिवारी, नदीम सिद्दीकी, सैमुअल सिंह लकी, अजय विग, विजय त्रिपाठी, विजय नारायन शुक्ला, मोहित मिश्रा, किरन गुप्ता, कृपेश त्रिपाठी सहित काफी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
गुजरात से वापस लौटा हरदोई का परिवार
श्रम को नजरअंदाज करते हुए उन पर हमले किए जा रहे हैं
हरदोई देहात कोतवाली के खेतुई गांव के रहने वाले भोला और उनकी पत्नी अर्चना एवं परिवार के अन्य दूसरे कुल मिलाकर 9 लोग गुजरात के गांधीनगर में सलतेज नामक जगह पर काम धंधा कर रहे थे। भोला वहां पर इलेक्ट्रिक खराद का काम करते हैं और उन्होंने वहां पर अपना कारोबार भी थोड़ा बहुत जमा लिया था। लेकिन गुजरात में इधर जब से यूपी और बिहार के प्रवासियों को चुन-चुन कर निशाना बनाने और उन पर हमले की घटनाओं के बाद यह पूरा परिवार इस कदर भयभीत हुआ कि सब सामान वगैरा वहीं छोड़ कर अपनी जान बचाकर किसी तरह वापस अपने घर पहुंच गए।