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Kanpur News: ऑक्सीडाइज्ड आभूषणों और मरोड़ी जरदोजी साड़ियों ने किया आकर्षित
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कानपुर। ग्रामश्री एवं क्राफ्टरूट्स की ओर से चुन्नीगंज स्थित कन्वेंशन सेंटर में आयोजित हस्तशिल्प प्रदर्शनी के तीसरे दिन खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ी। देश के विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकारों के हस्तनिर्मित उत्पाद लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। दिवाली सहित आगामी त्योहारों को देखते हुए लोगों ने पारंपरिक सजावटी वस्तुओं, कपड़ों और आभूषणों की जमकर खरीदारी की। प्रदर्शनी में गुजरात की आकर्षक वॉल आर्ट, ऑक्सीडाइज्ड आभूषण और मरोड़ी जरदोजी साड़ियों की विशेष मांग रही।
राजस्थान के कढ़ाईदार परिधानों ने लोगों को आकर्षित किया। यहां 200 से 1500 रुपये तक के ऑक्सीडाइज्ड झुमके, हार और अन्य आभूषण महिलाओं की पसंद बने। बंगाल से आए शिल्पकार रूहूल अमीन अपनी पुश्तैनी कढ़ाई कला पारसी गारा और बुलियन स्टिच लेकर पहुंचे हैं। टसर सिल्क पर पारसी गारा, फ्रेंच नॉट और उभरी हुई बुलियन स्टिच से तैयार वस्त्र लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं। यह पारंपरिक कला राजा-महाराजाओं के दौर से चली आ रही है। मध्य प्रदेश से आए अहमद हुसैन अपने गांव के नाम से प्रसिद्ध बाघ प्रिंट के उत्पाद लेकर आए हैं।
इस कला में प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल होता है। फिटकरी से लाल और लोहे के चूरे से काला रंग तैयार किया जाता है। एक साड़ी या कपड़ा बनाने में कम से कम दो महीने लगते हैं। वहीं बंगाल के हस्तशिल्पी आशीष दास नीम की लकड़ी से रोटी रखने के बर्तन, भोजन की थालियां और अन्य उपयोगी सामान तैयार लेकर आए हैं। उनके उत्पाद भी लोगों का ध्यान खींच रहे हैं।
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राजस्थान के कढ़ाईदार परिधानों ने लोगों को आकर्षित किया। यहां 200 से 1500 रुपये तक के ऑक्सीडाइज्ड झुमके, हार और अन्य आभूषण महिलाओं की पसंद बने। बंगाल से आए शिल्पकार रूहूल अमीन अपनी पुश्तैनी कढ़ाई कला पारसी गारा और बुलियन स्टिच लेकर पहुंचे हैं। टसर सिल्क पर पारसी गारा, फ्रेंच नॉट और उभरी हुई बुलियन स्टिच से तैयार वस्त्र लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं। यह पारंपरिक कला राजा-महाराजाओं के दौर से चली आ रही है। मध्य प्रदेश से आए अहमद हुसैन अपने गांव के नाम से प्रसिद्ध बाघ प्रिंट के उत्पाद लेकर आए हैं।
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इस कला में प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल होता है। फिटकरी से लाल और लोहे के चूरे से काला रंग तैयार किया जाता है। एक साड़ी या कपड़ा बनाने में कम से कम दो महीने लगते हैं। वहीं बंगाल के हस्तशिल्पी आशीष दास नीम की लकड़ी से रोटी रखने के बर्तन, भोजन की थालियां और अन्य उपयोगी सामान तैयार लेकर आए हैं। उनके उत्पाद भी लोगों का ध्यान खींच रहे हैं।
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