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Orai: ‘अब जेल नहीं जाना चाहता', दोहरे हत्याकांड में कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद, दोषी वृद्ध ने फंदा लगाकर दी जान

Fri, 08 May 2026 03:18 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उरई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उरई Published by: Himanshu Awasthi Updated Fri, 08 May 2026 03:18 PM IST
सार

Orai News: उरई में 1984 के दोहरे हत्याकांड में हाईकोर्ट द्वारा उम्रकैद की सजा बरकरार रखे जाने के बाद अमर सिंह (72) ने जेल जाने के डर से आत्महत्या कर ली। वह पिछले कई दशकों से जमानत पर बाहर थे और हाल ही में आए फैसले से तनाव में थे।

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Orai Court hands down life sentence in double murder case elderly convict commits suicide by hanging
घटनास्थल पर जांच करती पुलिस - फोटो : amar ujala

विस्तार

उरई के सिरसा कलार थाना क्षेत्र में हाईकोर्ट से उम्रकैद की सजा पाए वृद्ध ने बुधवार रात नलकूप की कोठी में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। पिथऊपुर गांव में 42 साल पुराने दोहरे हत्याकांड में स्थानीय कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद सुनाई थी। हाईकोर्ट से जमानत पर छूटे थे। वृद्ध के पुत्र ने बताया कि हाईकोर्ट ने चार मई को उनकी उम्रकैद की सजा बरकरार रखी थी। वकील से यह जानकारी मिलने के बाद से जेल जाने के भय से वह परेशान थे।

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सिरसा कलार थाना क्षेत्र के पिथऊपुर गांव में पुरानी रंजिश को लेकर 1984 में गांव के मंदिर में सोते समय सरवन ठाकुर व वीरेंद्र सिंह की गोली मारकर हत्या की गई थी। पीड़ित पक्ष के बाबूराम ने गांव के ही बाबूराम, अमर सिंह (72), रामलखन व उरई कोतवाली क्षेत्र के ग्राम रूरा अड्डू निवासी समरथ सिंह के विरुद्ध हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने उस समय आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

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चार मई को वकील ने दे दी थी जानकारी
मुकदमे में 27 जुलाई 1987 में बाबूराम, समरथ सिंह व अमर को आजीवन कारावास की सजा हुई थी, जबकि रामलखन को बरी कर दिया था। बाद में तीनों ने हाईकोर्ट में अपील की तो जमानत मिली और तभी से वह जेल से बाहर थे। इस दौरान बाबूराम व समरथ सिंह व रामलखन की मौत हो गई। हत्या के मुकदमे में अमर सिंह, बाबूराम व समरथ सिंह को चार मई को हत्या का दोषी मानते हुए सजा सुनाई गई। चार मई को इसकी जानकारी अमर सिंह को वकील ने दे दी थी।

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वृद्ध तनाव में थे, जांच की जा रही है
इससे परेशान होकर बुधवार की रात नलकूप की कोठी पर पहुंचे और फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस को पुत्र रविंद्र सिंह ने बताया कि वकील का फोन आने के बाद से ही पिता परेशान थे। वह बार-बार यही कर रहे थे कि वह अब इस अवस्था में जेल नहीं जाना चाहते हैं। परिजनों ने बताया कि उन्हें समझाया था और नलकूप पर जाकर आराम से सोने के लिए कहा था। वह यह कदम उठा लेंगे यह पता नहीं था। थाना प्रभारी वरुण प्रताप सिंह का कहना है कि वृद्ध तनाव में थे, इसी के चलते उन्होंने आत्महत्या की है। जांच की जा रही है।

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