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गंगा मसले पर सामने आया केंद्र यूपी का टकराव

Fri, 22 Jul 2016 12:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर Updated Fri, 22 Jul 2016 12:50 AM IST
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On the issue of the conflict unfolded Ganga Centre UP
गंगा की लहरें - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
कानपुर। गंगा के मसले पर यूपी और केंद्र सरकार के बीच चल रहा टकराव सामने आ गया है। गंगा में सीधे गिरने वाले नालों को रोकने के लिए यूपी सरकार केंद्र से एक हजार करोड़ की डिमांड कर रही है तो केंद्र यूपी के प्रोजेक्ट का परीक्षण करने की बात कहकर उसे टरका रहा है। चर्चा है कि यूपी चुनाव को देखते हुए यह तकरार चल रही है। यही वजह है कि 22 जुलाई को इस मसले पर एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल) में होने वाली सुनवाई पर यूपी सरकार के अधिकारी उत्साहित नहीं हैं। वे दिल्ली जाने से भी कतरा रहे हैं। सभी अधिकारियों ने वकीलों को इसकी जानकारी दे दी है। 
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दरअसल, केंद्र सरकार ने एनजीटी के माध्यम से यूपी सरकार से एक प्रोजेक्ट बनाकर देने को कहा था, जिसमें यह बताना था कि टेनरियों और नालों से निकलने वाले कचरे को गंगा में जाने से रोकने का स्थायी समाधान क्या है। यूपी सरकार के मुख्य सचिव और शहरी विकास विभाग के प्रमुख सचिव के माध्यम से इस संबंध में एक प्रोजेक्ट केंद्र सरकार को करीब तीन महीने पहले सौंपा गया। जिसे पूरा करने के लिए केंद्र से एक हजार करोड़ की राशि मांगी गई। मामला यहीं पर अटक गया। पिछली सुनवाई में बड़ा फैसला आने की बात कही गई थी। इसलिए दोनों सरकारों के अधिकारियों को बुलाया गया था लेकिन तारीख मिल गई। अब अधिकारी भी इस खींच तान को भांप गए हैं। चर्चा है कि गंगा की सफाई का श्रेय लेने के लिए दोनों सरकारों के बीच रस्साकशी चल रही है। वहीं स्माल टेनर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी डॉ. फिरोज आलम का कहना है कि इस बार भी तारीख मिलनी है, इसीलिए प्रदेश सरकार की तरफ से कोई तैयारी बैठक नहीं बुलाई गई है। पिछली सुनवाई में सभी अधिकारी और एसोसिएशन के पदाधिकारी सुनवाई में किसी परिणाम की उम्मीद लेकर गए थे।
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यूपी सरकार ने यह भेजा है प्रोजेक्ट
d 2.5 करोड़ लीटर का सीईटीपी (कॉमन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट)
d वाजिदपुर में 4.2 करोड़ लीटर के अधूरे एसटीपी (स्मॉल ट्रीटमेंट प्लांट)
d सीसामऊ (कुछ हिस्सा) लालकुर्ती नाले को एसटीपी वाजिदपुर प्लांट में लाकर जोड़ना 
d टेनरियों के लिए मॉनीटरिंग सिस्टम बनाना, जैसे कई काम ।
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