हर गली गुलजार थी...घर-घर में खुशी की लहर थी...आखिर बड़ी दूर से कोई अपना जो आया था। दिवाली के दिन यूपी में कानपुर देहात के एक गांव का नजारा देखते ही बन रहा था। लोग बहुत खुश थे। ऐसा लग रहा था मानों आज गलियां बोलने का आतुर हैं। इसका कारण था....नीदरलैंड में रहने वाली प्रवासी भारतीय महिला ने अपने पुरखों की जन्मस्थली बैना गांव आकर दिवाली का पर्व मनाया। साथ ही गांव के लोगों से मिलकर उन्हें दिवाली की शुभकामनाएं दीं। गरीब परिवारों की विधवाओं को सिलाई मशीनें देकर उन्हें रोजगार के लिए प्रेरित किया। उनके आने से ग्रामीणों की दिवाली इस बार खास हो गई।
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NRI Sumitra
- फोटो : अमर उजाला
उत्तरी यूरोप के देश नीदरलैंड की राजधानी एम्स्टर्डम में रहने वाली सेवानिवृत्त शिक्षिका सुमित्रा (60) दिवाली मनाने बुधवार को अपने पिता के गांव बैना पहुंची। उनके पिता घसीटेराम सन् 1914 में ब्रिटिश हुकूमत के दौरान छह वर्ष की आयु में अपने पूर्वजों के साथ नीदरलैंड में बस गए थे।
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NRI Sumitra
- फोटो : अमर उजाला
सुमित्रा ने बताया कि बचपन से पिता उन्हें भारत के बारे में बताते थे। वह कई बार बैना गांव आ चुके थे। बीस वर्ष पूर्व वह आए थे। पिता की मौत के बाद वह लगातार भारत के बारे में नेट पर सर्च करती रहीं। इसी दौरान सोशल मीडिया पर उनका संपर्क बैना गांव निवासी दिल्ली की एक कंपनी में कार्यरत धीरेंद्र पाल सिंह से हुआ। सुमित्रा ने उनसे कई जानकारियां हासिल कीं।
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प्रवासी भारतीय सुमित्रा
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद टूरिस्ट वीजा पर वह एक सप्ताह के लिए दिवाली वाले दिन भारत आईं। उनके पहुंचने पर गांव में दिवाली मिलन समारोह आयोजित किया गया। ग्रामीण परिवेश और रहन सहन सुमित्रा को बेहद लुभावना लगा।
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ग्रामीणों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
गांव में बेरोजगारी व शिक्षा की कमी को लेकर उन्होंने चिंता जताई। साथ ही भविष्य में एक अच्छे विद्यालय का निर्माण कराने का वादा भी किया। गांव की तीन दर्जन गरीब विधवाओं को रोजगार के लिए सिलाई मशीनें भेंट कीं। गांव की प्रधान माया देवी ने बताया कि सुमित्रा को पूर्वजों के वतन से बेहद लगाव है।