मौत, जो कभी नहीं बनती चुनावी मुद्दा, देखें हकीकत कहती कुछ तस्वीरें
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यूपी की आबादी के ब्रजील देश के बराबर है। यहां 20 करोड़ से ज्यादा आबादी है। लेकिन जब हम बात करते हैं यहां की स्वास्थ्य सेवाओं की तो प्रदेश इस मामले में काफी पिछड़ा नजर आता है। इन्हीं कारणों से उत्तर प्रदेश की गिनती बीमारू राज्यों में की जाती है।
अस्पतालों की खस्ताहालत बयां कर रही है तस्वीर
उत्तर प्रदेश के अस्पतालों की तस्वीर यहां की खस्ताहाल स्थिति बयां कर रही है। ये तस्वीरे कानपुर देहात के जिला अस्पताल की है। जिला अस्पताल मतलब, कहने भर के लिए इलाके का सबसे बड़ा अस्पताल होता है। लेकिन जब जिला अस्पताल की ये हालत है तो सोचिए जरा छोटे अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों की क्या हालत होगी।
हालही में राज्य में कई ऐसे मामले भी सामने आए थे जिसमें परिजनों को मृतक की लाश ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिली भी थी। ये मामले भी राज्य की स्थावस्थय सेवाओंं पर बड़े सवाल खड़े कर रहे थे। लेकिन कैसे न कैसे इन मामलों को दबा दिया गया। लेकिन यहां तो जिंदा लोगों को परिजन अपने कंधों पर ढो रहे हैं।
मौत, जो कभी नहीं बनती चुनावी मुद्दा
देखकर अफसोस होता है, जब किसी मरीज को परिजन यहां अपने कंधों पर लादकर लाते हैं। ऐसे में राज्य सरकार के 24 घंटे एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराने के दावे हवाहवाई होते नजर आते है। केवल यही नहीं अस्पताल के बाहर-भीतर मरीजों को लाने ले जाने के लिए एक भी स्ट्रेचर नहीं नजर आता।
समय पर इलाज न मिलने के चलते मर रहे मरीज
परिजनों समेत मरीजों को काफी दिक्कत होती है। यहां के डॉकटर भी मरीजों की तकलीफ नहीं समझ रहे है। उनसे इस संबंध में बातचीत करना चाही तो उन्होंने साफ इंकार कर दिया। यही कारण है कि मरीज को समय पर इलाज न मिलने के कारण वह मौत के मुंह में समा जाता है और व्यवस्थाएं उस मौत की हंसी उड़ा रही होती है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि देशभर में उत्तर प्रदेश मे सबसे ज्यादा मौतें होती है। किसी भी मामले में देख लें। 2016 में, देश भर में 1,277 एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) मौतों की सूचना मिली थी, जिसमें से 615 मामले अकेले उत्तर प्रदेश से थे।
यूपी में शिशु मृत्यु दर अफ्रीकी देशों के बाराबर
यह उदाहरण राज्य की स्थिति को समझाने के लिए काफी है। वहीं इस राज्य की शिशु मृत्यु दर जाम्बिया के बाराबर है। यहां यह जान लेना भी जरूरी है कि जाम्बिया गरीबी से त्रस्त एक पश्चिम अफ्रीकी देश है।
पांच राज्यों की चुनावी जंग में से उत्तर प्रदेश में 16.9 करोड़ मतदाता वोटर रहे। विश्लेषण बताता है कि इन पांच राज्यों में से उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य पर प्रति व्यक्ति सार्वजनिक व्यय यानी राज्य और केंद्र दोनों सरकार का, सबसे कम है।