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डॉक्टर न इंतजाम, भर्ती खुलेआम
अमर उजाला, ब्यूरो
Updated Thu, 03 Mar 2016 01:58 AM IST
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तिरुपति बाला जी हॉस्पिटल एंड सर्जिकल सेंटर पुराना शिवली रोड कल्याणपुर में आईसीयू मॉनीटर बेंच पर रखकर किशोरी का इलाज चल रहा था। परिजनों ने बताया कि अस्पताल के मालिक इलाज कर रहे हैं। एक डॉक्टर के आने की बात की है, देखते हैं कब आते हैं
डॉ. चमनलाल अस्पताल अहिरवां चकेरी में इलाज का आलम यह है कि ड्रिप चढ़ाने के लिए ग्लूकोज की बोतल को छत के कुंडे से फंसाकर लटकाया गया है। सड़क किनारे महिला को बेंच पर लिटाकर डॉक्टर साहब इलाज कर रहे हैं। हॉस्पिटल पर कहीं नहीं लिखा है कि डॉक्टर साहब की डिग्री क्या है।
शहर के कई नर्सिंग होम स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को खिला-पिलाकर मरीजों को लूट रहे हैं। नर्सिंग होमों के संचालक (ज्यादातर डॉक्टर नहीं) ही डॉक्टर बनकर मरीजों की जांच कर इलाज कर रहे हैं।
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यहां तक कि ऑपरेशन से भी गुरेज नहीं करते हैं। मरीज ठीक हो गया तो उसकी किस्मत, मामला गड़बड़ हुआ तो समझौता कर लेते हैं। दलालों के भरोसे चलने वाले इन अस्पतालों में मरीजों की भरमार रहती है। थोड़े रुपये बचाने के चक्कर में लोग पूरी जिंदगी का दर्द झेल रहे हैं।
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डॉ. चमनलाल अस्पताल अहिरवां चकेरी में इलाज का आलम यह है कि ड्रिप चढ़ाने के लिए ग्लूकोज की बोतल को छत के कुंडे से फंसाकर लटकाया गया है। सड़क किनारे महिला को बेंच पर लिटाकर डॉक्टर साहब इलाज कर रहे हैं। हॉस्पिटल पर कहीं नहीं लिखा है कि डॉक्टर साहब की डिग्री क्या है।
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शहर के कई नर्सिंग होम स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को खिला-पिलाकर मरीजों को लूट रहे हैं। नर्सिंग होमों के संचालक (ज्यादातर डॉक्टर नहीं) ही डॉक्टर बनकर मरीजों की जांच कर इलाज कर रहे हैं।
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यहां तक कि ऑपरेशन से भी गुरेज नहीं करते हैं। मरीज ठीक हो गया तो उसकी किस्मत, मामला गड़बड़ हुआ तो समझौता कर लेते हैं। दलालों के भरोसे चलने वाले इन अस्पतालों में मरीजों की भरमार रहती है। थोड़े रुपये बचाने के चक्कर में लोग पूरी जिंदगी का दर्द झेल रहे हैं।