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कानपुर: 21 साल पहले मिली थी सिर कटी लाश, मामले में 21 गवाह, गवाही देने एक भी नहीं पहुंचा
Wed, 06 Mar 2019 12:38 PM IST
शिखा पांडेय
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 06 Mar 2019 12:38 PM IST
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प्रतीकात्मक फोटो
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कानपुर के बर्रा में 21 साल पहले एक सिर कटी लाश मिली थी। शिनाख्त होने के बाद ग्राम प्रधानी की रंजिश में हत्या की बात सामने आई। मृतक की पत्नी ने चार लोगों पर हत्या का आरोप लगाया। चारों की गिरफ्तारी हुई। जेल गए और पुलिस ने चार्जशीट कोर्ट भेजी और मुकदमा शुरू हो गया। मामले में 21 गवाह बनाए गए लेकिन 21 साल में कोई भी गवाही देने नहीं पहुंचा। आरोपी कोर्ट में सिर्फ तारीख लेने आते हैं। कचहरी के चक्कर काटते-काटते एक आरोपी की तो मौत भी हो चुकी है। हत्या के संगीन मुकदमे को खारिज करना जहां कोर्ट के लिए परेशानी का सबब है, वहीं गवाहों को ढूंढना अभियोजन के लिए चुनौती है।
यह था मामला
बर्रा-8 का रहने वाला संतोष कुमार पांच दिसंबर 1997 को दोपहर तीन बजे वलीपुरवा गांव के किनारे शौच के लिए गया था। वहां उन्हें एक सिर कटी लाश दिखी। आसपास के लोग इकट्ठा हुए तो पास के गड्ढे में ही सिर भी पड़ा दिखा। संतोष ने पुलिस को सूचना देकर नौबस्ता थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
ऐसे हुई शिनाख्त
पुलिस ने शव की फोटो, कपड़े व हुलिया आदि की पंफ्लैट छपवाकर क्षेत्र में बंटवाए थे। इसके बाद सजेती थाना क्षेत्र के ग्राम गढ़ा निवासी संजय ने 11 दिसंबर को नौबस्ता थाने पहुंचकर शव की शिनाख्त अपने पिता रामसनेही के रूप में की थी।
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यह था मामला
बर्रा-8 का रहने वाला संतोष कुमार पांच दिसंबर 1997 को दोपहर तीन बजे वलीपुरवा गांव के किनारे शौच के लिए गया था। वहां उन्हें एक सिर कटी लाश दिखी। आसपास के लोग इकट्ठा हुए तो पास के गड्ढे में ही सिर भी पड़ा दिखा। संतोष ने पुलिस को सूचना देकर नौबस्ता थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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ऐसे हुई शिनाख्त
पुलिस ने शव की फोटो, कपड़े व हुलिया आदि की पंफ्लैट छपवाकर क्षेत्र में बंटवाए थे। इसके बाद सजेती थाना क्षेत्र के ग्राम गढ़ा निवासी संजय ने 11 दिसंबर को नौबस्ता थाने पहुंचकर शव की शिनाख्त अपने पिता रामसनेही के रूप में की थी।
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प्रधानी की रंजिश और भूमि विवाद में हत्या की बात सामने आई
मृतक की पत्नी कमला ने पुलिस को बयान दिया था कि गांव का रहने वाला शिवराम पहले प्रधानी का चुनाव जीता, दूसरी बार रामसनेही जीते तीसरी बार दोनों लोग चुनाव लड़े लेकिन चंद्रशेखर चुनाव जीत गया। इसी बात पर रामसनेही से शिवराम रंजिश मानने लगा। प्रधानी के दौरान गांव की कुछ जमीन पर रामसनेही अंबेडकर पार्क बनाना चाहता था, जबकि शिवराम कब्जा करना चाहता था। इस बात पर भी शिवराम ने रामसनेही को धमकी दी थी। कमला ने शिवराम सिंह व लायक सिंह पर शिवबाबू व सुभाष सचान से रामसनेही की हत्या करवाने की बात कही थी। इस पर पुलिस ने चारों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
पुलिस ने चार्जशीट में बनाए 21 गवाह
पुलिस ने 21 गवाहों की सूची के साथ चारों लोगों के खिलाफ हत्या, साक्ष्य मिटाने तथा एससीएसटी एक्ट के तहत चार्जशीट तो कोर्ट में पेश कर दी लेकिन 21 साल बाद भी अभियोजन एक भी गवाह कोर्ट में पेश नहीं कर सका। स्पेशल जज एससीएसटी कोर्ट में मुकदमा विचाराधीन है।
कैसे हो मुकदमे का फैसला
कोर्ट ने सम्मन, वारंट, एसएसपी-डीआईजी को पत्र लिखकर भी गवाहों को कोर्ट में हाजिर करने के आदेश दिए लेकिन गवाहों का पता नहीं चल रहा। फाइल में जीर्णशीर्ण अवस्था में चार्जशीट तो है लेकिन केस डायरी नदारद है। कोर्ट ने शासकीय अधिवक्ता फौजदारी को पत्र लिखकर केस डायरी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। हत्या के मुकदमे में बिना केस डायरी और गवाहों के निर्णय भी कठिन काम है।
अभियोजन 21 साल में एक भी गवाह कोर्ट में पेश नहीं कर सका। हत्या जैसे संगीन अपराध के कारण कोर्ट भी मुकदमा खारिज करने से गुरेज कर रही है। आरोपियों को बेवजह कोर्ट के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। एक की तो मौत भी हो चुकी है। न्याय व्यवस्था का यह पहलू अत्यंत दुखद है।
- कमलेश पाठक, आरोपियों के अधिवक्ता
एक व्यक्ति की हत्या हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य अभियोजन के पास हैं। गवाहों को कोर्ट में हाजिर करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन गवाहों के पते बदल जाने के कारण ढूंढ पाना पुलिस के लिए सिरदर्द बना है।
- राजेश शुक्ला, विशेष लोक अभियोजक
मृतक की पत्नी कमला ने पुलिस को बयान दिया था कि गांव का रहने वाला शिवराम पहले प्रधानी का चुनाव जीता, दूसरी बार रामसनेही जीते तीसरी बार दोनों लोग चुनाव लड़े लेकिन चंद्रशेखर चुनाव जीत गया। इसी बात पर रामसनेही से शिवराम रंजिश मानने लगा। प्रधानी के दौरान गांव की कुछ जमीन पर रामसनेही अंबेडकर पार्क बनाना चाहता था, जबकि शिवराम कब्जा करना चाहता था। इस बात पर भी शिवराम ने रामसनेही को धमकी दी थी। कमला ने शिवराम सिंह व लायक सिंह पर शिवबाबू व सुभाष सचान से रामसनेही की हत्या करवाने की बात कही थी। इस पर पुलिस ने चारों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
पुलिस ने चार्जशीट में बनाए 21 गवाह
पुलिस ने 21 गवाहों की सूची के साथ चारों लोगों के खिलाफ हत्या, साक्ष्य मिटाने तथा एससीएसटी एक्ट के तहत चार्जशीट तो कोर्ट में पेश कर दी लेकिन 21 साल बाद भी अभियोजन एक भी गवाह कोर्ट में पेश नहीं कर सका। स्पेशल जज एससीएसटी कोर्ट में मुकदमा विचाराधीन है।
कैसे हो मुकदमे का फैसला
कोर्ट ने सम्मन, वारंट, एसएसपी-डीआईजी को पत्र लिखकर भी गवाहों को कोर्ट में हाजिर करने के आदेश दिए लेकिन गवाहों का पता नहीं चल रहा। फाइल में जीर्णशीर्ण अवस्था में चार्जशीट तो है लेकिन केस डायरी नदारद है। कोर्ट ने शासकीय अधिवक्ता फौजदारी को पत्र लिखकर केस डायरी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। हत्या के मुकदमे में बिना केस डायरी और गवाहों के निर्णय भी कठिन काम है।
अभियोजन 21 साल में एक भी गवाह कोर्ट में पेश नहीं कर सका। हत्या जैसे संगीन अपराध के कारण कोर्ट भी मुकदमा खारिज करने से गुरेज कर रही है। आरोपियों को बेवजह कोर्ट के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। एक की तो मौत भी हो चुकी है। न्याय व्यवस्था का यह पहलू अत्यंत दुखद है।
- कमलेश पाठक, आरोपियों के अधिवक्ता
एक व्यक्ति की हत्या हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य अभियोजन के पास हैं। गवाहों को कोर्ट में हाजिर करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन गवाहों के पते बदल जाने के कारण ढूंढ पाना पुलिस के लिए सिरदर्द बना है।
- राजेश शुक्ला, विशेष लोक अभियोजक