{"_id":"59f0c9454f1c1bce538b9303","slug":"newborn-without-arms-cmo-says-it-is-such-a-rare-case","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बिना हाथों के बालक ने लिया जन्म, सीएमओ बोले- हजारों में एक केस देखने को मिलता है","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिना हाथों के बालक ने लिया जन्म, सीएमओ बोले- हजारों में एक केस देखने को मिलता है
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 26 Oct 2017 10:47 AM IST
विज्ञापन
बिना हाथ का नवजात
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिधूना के एक अस्पताल में बिना हाथों के जन्मा एक बच्चा चर्चा का विषय बन गया। बच्चे को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। डॉक्टरों की टीम का कहना है कि हजारों केस में एक ऐसा प्रकरण देखने को मिलता है।
विज्ञापन
बिना हाथों का नवजात
- फोटो : अमर उजाला
औरैया/ बेलाः बिधूना विकास खंड क्षेत्र के कस्बा बेला उपकेंद्र पर बुधवार को बिना हाथों का बच्चा पैदा हुआ। जन्म के बाद जच्चा-बच्चा स्वस्थ हैं। बच्चे को देखने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी। डाक्टरों का कहना है कि 40-50 हजार केस में एक ऐसा प्रकरण देखने को मिलता है।
बुधवार की सुबह बेला स्वास्थ्य केंद्र पर गांव मढ़ादासपुर निवासी महिला बिट्टी पत्नी प्रदीप कुमार ने बच्चे को जन्म दिया। बच्चे के दोनोें हाथ नहीं हैं। लोगों को पता चलते ही लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
बुधवार की सुबह बेला स्वास्थ्य केंद्र पर गांव मढ़ादासपुर निवासी महिला बिट्टी पत्नी प्रदीप कुमार ने बच्चे को जन्म दिया। बच्चे के दोनोें हाथ नहीं हैं। लोगों को पता चलते ही लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
विज्ञापन
विज्ञापन
हाथ की जगह बिल्कुल सपाट हैं
बिना हाथों का नवजात
- फोटो : अमर उजाला
बीएचडब्लू मीरा पांडेय ने बताया कि बच्चे के दोनों हाथ नहीं हैं, अगर कोई आकृति भी बनी होती तो भी बात थी मगर हाथ की जगह बिल्कुल सपाट हैं। वहीं, जच्चा बच्चा दोनों स्वस्थ भी हैं।
इस संबंध में सीएमओ एके राय ने बताया कि मेडिकल साइंस में यह घटना करीब चालीस पचास हजार केसों में होती है। शरीर का विकास न होने से यह समस्या होती है। अगर अन्य सभी अंग विकसित हैं तो बच्चा जिंदा भी रहेगा।
इस संबंध में सीएमओ एके राय ने बताया कि मेडिकल साइंस में यह घटना करीब चालीस पचास हजार केसों में होती है। शरीर का विकास न होने से यह समस्या होती है। अगर अन्य सभी अंग विकसित हैं तो बच्चा जिंदा भी रहेगा।