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कानपुर: लापरवाह अफसर तीन महीने में नहीं जुड़वा पाए प्लांट की बिजली, कूड़ा निस्तारण व्यवस्था फेल
Thu, 16 May 2019 04:36 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 16 May 2019 04:36 PM IST
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पनकी स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट में उठाने के बजाए जलाया जाता है कूड़ा
- फोटो : अमर उजाला
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स्मार्ट सिटी के दावों के बीच कानपुर में कूड़ा निस्तारण व्यवस्था फेल होने के कगार पर है। लापरवाह अफसर केस्को को भुगतान करने के सवा तीन महीने बाद भी कूड़ा निस्तारण प्लांट की बिजली नहीं जुड़वा पाए। प्लांट में जनरेटर से एक चौथाई कूड़े का ही निस्तारण कर खानापूरी की जा रही है। वहां कूड़े के पहाड़ लगातार ऊंचे होते जा रहे हैं। आसपास के गांव वाले बदबूदार हवा में सांस लेने को मजबूर हैं।
कूड़ाघरों से खुले में कूड़ा ले जाना भी बंद नहीं हुआ और न ही आधुनिक कूड़ाघरों में क्षमता के अनुरूप कार्य हो रहा है। घोर लापरवाही की वजह से ही बुधवार को एनजीटी की तरफ से गठित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं अनुश्रवण समिति ने नगर निगम, यूपीपीसीबी, आईएलएफएस और एमपीसीसी पर क्रमश: 15 करोड़, दो करोड़, दो करोड़ और पांच करोड़ रुपये हर्जाना लगाने की संस्तुति की है।
एनजीटी गत वर्ष से शतप्रतिशत कूड़े के समुचित निस्तारण के निर्देश दे रहा है, पर नगर निगम और पनकी भऊ सिंह स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट संचालित कर रही आईएलएफएस कंपनी की लापरवाही से रोज करीब 350 मीट्रिक टन कूड़े से ही जैविक खाद बन पा रही है। प्लांट में रोज 1000-1100 मीट्रिक टन कूड़ा पहुंच रहा है।
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कूड़ाघरों से खुले में कूड़ा ले जाना भी बंद नहीं हुआ और न ही आधुनिक कूड़ाघरों में क्षमता के अनुरूप कार्य हो रहा है। घोर लापरवाही की वजह से ही बुधवार को एनजीटी की तरफ से गठित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं अनुश्रवण समिति ने नगर निगम, यूपीपीसीबी, आईएलएफएस और एमपीसीसी पर क्रमश: 15 करोड़, दो करोड़, दो करोड़ और पांच करोड़ रुपये हर्जाना लगाने की संस्तुति की है।
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एनजीटी गत वर्ष से शतप्रतिशत कूड़े के समुचित निस्तारण के निर्देश दे रहा है, पर नगर निगम और पनकी भऊ सिंह स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट संचालित कर रही आईएलएफएस कंपनी की लापरवाही से रोज करीब 350 मीट्रिक टन कूड़े से ही जैविक खाद बन पा रही है। प्लांट में रोज 1000-1100 मीट्रिक टन कूड़ा पहुंच रहा है।
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पहले से भी लगभग 15 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा कूड़ा एकत्रित है। प्लांट जनरेटर से चल रहा है। नगर आयुक्त संतोष कुमार शर्मा ने इसे बिजली से पूरी क्षमता से चलाने के लिए केस्को को सवा तीन महीने पहले 52 लाख का भुगतान किया।
आईएलएफएस ने प्लांट में 350 केवीए का ट्रासफार्मर लगवाने, वहां से मशीनों तक 600 मीटर लंबाई में भूमिगत केबिल बिछाने, ब्रेकर आदि लगाने का 27 लाख का ठेका नानक इलेक्ट्रिकल्स को दिया। इस कंपनी को पिछले महीने अग्रिम भुगतान भी कर दिया गया, पर ठेकेदार ने अभी तक कार्य शुरू नहीं किया।
नगर निगम के अधिशासी अभियंता (पर्यावरण) आरके पाल ने कूड़ा निस्तारण प्लांट संचालित कर रही कंपनी को नोटिस, वहां बिजली का कार्य करने वाली कंपनी और आईएलएफएस को चेतावनी देकर खानापूरी कर ली। केस्को से कनेक्शन के लिए जोर भी नहीं दिया जा रहा।
आईएलएफएस ने प्लांट में 350 केवीए का ट्रासफार्मर लगवाने, वहां से मशीनों तक 600 मीटर लंबाई में भूमिगत केबिल बिछाने, ब्रेकर आदि लगाने का 27 लाख का ठेका नानक इलेक्ट्रिकल्स को दिया। इस कंपनी को पिछले महीने अग्रिम भुगतान भी कर दिया गया, पर ठेकेदार ने अभी तक कार्य शुरू नहीं किया।
नगर निगम के अधिशासी अभियंता (पर्यावरण) आरके पाल ने कूड़ा निस्तारण प्लांट संचालित कर रही कंपनी को नोटिस, वहां बिजली का कार्य करने वाली कंपनी और आईएलएफएस को चेतावनी देकर खानापूरी कर ली। केस्को से कनेक्शन के लिए जोर भी नहीं दिया जा रहा।
दो साल पहले हुआ था आईएलएफएस से अनुबंध
शासन और नगर निगम ने पनकी के ग्राम भऊ सिंह स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट को संचालित करने के लिए दो साल पहले आईएलएफएस कंपनी से अनुबंध किया। इस कंपनी ने एक साल तैयारियां कर प्लांट का संचालन शुरू किया, पर अभी भी आधी क्षमता से ही प्लांट चल पा रहा है। कंपनी ने प्लांट में पहले से लगे कूड़े के पहाड़ खत्म नहीं किए। रोज पांच - सात सौ मीट्रिक टन कूड़ा बढ़ता जा रहा है। आसपास के गांवों में बदबू और मक्खियों के प्रकोप से कई लोग बीमार हैं। संक्रामक रोग फैलने का खतरा है।
एटूजेड भी नहीं चला पाई थी प्लांट
जेएनएनयूआरएम की सॉलिड वेस्ट परियोजना के तहत आठ साल पहले एटूजेड कंपनी ने ग्राम भऊ सिंह में कूड़ा निस्तारण प्लांट स्थापित किया था। 46 एकड़ के इस प्लांट को शुरुआत में कंपनी ने घरों से कूड़ा एकत्रित करने के साथ ही पूरी क्षमता से चलाया, पर चार साल पहले घाटे का बात कहकर कंपनी भाग गई थी। दो साल प्लांट में कूड़े के पहाड़ लगते रहे। प्लांट में लाखों मीट्रिक टन कूड़ा डंप है।
तीन आधुनिक कूड़ाघर ही बने
स्मार्ट सिटी के तहत विभिन्न क्षेत्रों में आठ आधुनिक कूड़ाघर बनना है, पर तय समय में नगर निगम तीन ही आधुनिक कूड़ाघर बनवा पाया। इन कूड़ाघरों को न तो पूरी क्षमता से चलाया जा रहा है और न ही इनमें रखे तीन - तीन कांपेक्टरों से संबंधित जोन का पूरा कूड़ा निस्तारण प्लांट में पहुंच पा रहा है। बल्कि खुली गाड़ियों से ही कूड़ा भेजा जा रहा है। ऐसे वाहनों से सड़क पर कूड़ा फैलता है। बदबू की वजह से आसपास से निकलना मुश्किल रहता है। संक्रमण का भी खतरा रहता है।
शासन और नगर निगम ने पनकी के ग्राम भऊ सिंह स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट को संचालित करने के लिए दो साल पहले आईएलएफएस कंपनी से अनुबंध किया। इस कंपनी ने एक साल तैयारियां कर प्लांट का संचालन शुरू किया, पर अभी भी आधी क्षमता से ही प्लांट चल पा रहा है। कंपनी ने प्लांट में पहले से लगे कूड़े के पहाड़ खत्म नहीं किए। रोज पांच - सात सौ मीट्रिक टन कूड़ा बढ़ता जा रहा है। आसपास के गांवों में बदबू और मक्खियों के प्रकोप से कई लोग बीमार हैं। संक्रामक रोग फैलने का खतरा है।
एटूजेड भी नहीं चला पाई थी प्लांट
जेएनएनयूआरएम की सॉलिड वेस्ट परियोजना के तहत आठ साल पहले एटूजेड कंपनी ने ग्राम भऊ सिंह में कूड़ा निस्तारण प्लांट स्थापित किया था। 46 एकड़ के इस प्लांट को शुरुआत में कंपनी ने घरों से कूड़ा एकत्रित करने के साथ ही पूरी क्षमता से चलाया, पर चार साल पहले घाटे का बात कहकर कंपनी भाग गई थी। दो साल प्लांट में कूड़े के पहाड़ लगते रहे। प्लांट में लाखों मीट्रिक टन कूड़ा डंप है।
तीन आधुनिक कूड़ाघर ही बने
स्मार्ट सिटी के तहत विभिन्न क्षेत्रों में आठ आधुनिक कूड़ाघर बनना है, पर तय समय में नगर निगम तीन ही आधुनिक कूड़ाघर बनवा पाया। इन कूड़ाघरों को न तो पूरी क्षमता से चलाया जा रहा है और न ही इनमें रखे तीन - तीन कांपेक्टरों से संबंधित जोन का पूरा कूड़ा निस्तारण प्लांट में पहुंच पा रहा है। बल्कि खुली गाड़ियों से ही कूड़ा भेजा जा रहा है। ऐसे वाहनों से सड़क पर कूड़ा फैलता है। बदबू की वजह से आसपास से निकलना मुश्किल रहता है। संक्रमण का भी खतरा रहता है।
एक नजर इस पर भी
- 1000-1100 मीट्रिक टन कूड़ा प्लांट में रोज पहुंच रहा
- 350 मीट्रिक टन कूड़े से ही जैविक खाद बन रही
- 15 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा कूड़ा एकत्रित
एनजीटी में इस मामले की सुनवाई होगी। नगर निगम वहां अपना पक्ष रखेगा। एनजीटी के निर्देश पर ही गंगा किनारे और अस्पतालों के बाहर से कूड़ा अड्डे खत्म किए गए हैं। सुनवाई के बाद एनजीटी के निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी।- संतोष कुमार शर्मा, नगर आयुक्त
एनजीटी ने पूर्व में की गई ऐसी समिति की संस्तुतियों को मात्र प्रस्ताव के रूप में देखा है। जुर्माना लगाने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिशा-निर्देश तय किए हैं। उसी के आधार पर जुर्माना लगता है।- कुलदीप मिश्रा, मुख्य पर्यावरण अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
- 1000-1100 मीट्रिक टन कूड़ा प्लांट में रोज पहुंच रहा
- 350 मीट्रिक टन कूड़े से ही जैविक खाद बन रही
- 15 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा कूड़ा एकत्रित
एनजीटी में इस मामले की सुनवाई होगी। नगर निगम वहां अपना पक्ष रखेगा। एनजीटी के निर्देश पर ही गंगा किनारे और अस्पतालों के बाहर से कूड़ा अड्डे खत्म किए गए हैं। सुनवाई के बाद एनजीटी के निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी।- संतोष कुमार शर्मा, नगर आयुक्त
एनजीटी ने पूर्व में की गई ऐसी समिति की संस्तुतियों को मात्र प्रस्ताव के रूप में देखा है। जुर्माना लगाने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिशा-निर्देश तय किए हैं। उसी के आधार पर जुर्माना लगता है।- कुलदीप मिश्रा, मुख्य पर्यावरण अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड