फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   More precious than life, a dry twig

जान से ज्यादा कीमती सूखी डालें

Sun, 17 Apr 2016 01:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 17 Apr 2016 01:07 AM IST
विज्ञापन
More precious than life, a dry twig
पेड़ की सूखी डाल दिखातीं सेंट मेरी कान्वेंट स्कूल की प्रिंसिपल। - फोटो : amarujala
कानपुर। एडमिशन की सिफारिश न मानने पर सेंट मेरी कान्वेंट स्कूल कैंट के खिलाफ कैंट बोर्ड के चीफ एक्जीक्यूटिव आफीसर (सीईओ) अमित कुमार ने हरे पेड़ों को काटने की एफआईआर दर्ज करा दी है, जबकि पेड़ काटे ही नहीं गए। जिन पेड़ों की डालियां सूखी हैं, उनकी छंटाई भी सालों पहले हुई थी। कैंट बोर्ड की दबंगई से स्कूल प्रशासन इतना डरा हुआ है कि खतरनाक सूखी डालियों को भी नहीं कटवा पा रहा जबकि ये कभी भी गिर सकती हैं।
विज्ञापन

सेंट मैरी कान्वेंट की स्थापना 1899 में हुई थी। अब कक्षा 1 से 12वीं तक 2000 छात्राएं पढ़ रही हैं। यह जाजमऊ, कैंट, बिरहाना रोड और माल रोड का प्रमुख स्कूल है। कैंपस हरा-भरा है। जो पेड़ लगे हैं, उनकी उम्र पूरी हो चुकी है। कई पेड़ 100 साल के हैं। इस कारण पेड़ और उनकी डालियां सूख गईं। पेड़ में दीमक लग गए, फिर भी डाली और पेड़ काटने की इजाजत स्कूल प्रबंधन को नहीं है। कभी भी डालियां गिर सकती हैं और बच्चों की जान पर बन सकती है लेकिन स्कूल प्रबंधन पेड़ काटने की रिपोर्ट के डर से इन जानलेवा डालियों को भी नहीं कटवा पा रहा। स्कूल के प्राइमरी विंग (कक्षा 1 से 5 तक की छात्राओं की क्लास) के पास एक सूखी डाली बहुत खतरनाक स्थिति में लटक रही है।
विज्ञापन

स्कूल में पेड़ कटने के मामले की जांच 18 को
कानपुर। सेंट मैरी स्कूल में पेड़ कटने के मामले में हुई रिपोर्ट और पड़ताल में कोई पेड़ नहीं कटने की बात सामने आने पर बोर्ड और पुलिस दोनों पशोपेश में हैं। 18 को पुलिस मौके पर जाकर जांच करेगी। शनिवार को बोर्ड के एक कर्मचारी से पूछा गया तो उसने साफ कहा कि पेड़ कटा है और उसकी फोटो भी की गई है। जब फोटो मांगी गई तो कर्मचारी ने इधर उधर की बात करनी शुरू कर दी। इस बीच कैंट एसओ बृजेश यादव ने बताया कि मामले की जांच दरोगा रमाशंकर को दी गई है। सोमवार को इस मामले की पड़ताल की जाएगी। कैंट बोर्ड के उपाध्यक्ष लखन ओमर का कहना है कि जरूरत पड़ेगी तो बोर्ड की तरफ से फिर से पेड़ कटने की जांच मौके पर जाकर की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

कैंट बोर्ड नहीं सुनता
पेड़ों की छंटाई और कटाई की जिम्मेदारी कैंट बोर्ड की है। इस संबंध में स्कूल प्रबंधन ने 26 जून 2015 को कैंट बोर्ड को पत्र लिखा, कहा कि सूखी डालियां कटवाई जाएं। इसका संज्ञान बोर्ड ने नहीं लिया। इसी बीच बारिश हुई और एक मोटी सूखी डाली टूटकर गिर पड़ी। छात्राओं के साथ बड़ा हादसा टल गया। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed