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मिशन रफ्तार को केंद्र सरकार से मिली मंजूरी अब साढ़े तीन घंटे में दिल्ली, 45 मिनट में पहुंचेंगे लखनऊ

Fri, 09 Aug 2019 12:19 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Fri, 09 Aug 2019 12:19 PM IST
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mission raftaar after central government permission
ट्रेन
ट्रेनों की रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटा किए जाने के प्रस्ताव मिशन रफ्तार को केंद्र सरकार ने सोमवार को मंजूरी दे दी है। दिल्ली-हावड़ा रूट भी इस मिशन में शामिल है। इसके अंतर्गत काम पूरा हो जाने के बाद साढ़े तीन घंटे में दिल्ली और 45 मिनट में लखनऊ पहुंचा जा सकेगा। यह काम 6,685 करोड़ रुपये से वर्ष 2022-23 तक पूरा किया जाना है। कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिलने के बाद मिनट्स भी जारी कर दिए गए हैं।
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अभी 130 किमी प्रति घंटा है स्पीड
दिल्ली-हावड़ा रूट पर मौजूदा समय 130 किमी प्रति घंटा की अधिकतम स्पीड है। नई दिल्ली से वाराणसी तक वाया कानपुर होकर चलने वाली सेमी हाईस्पीड ट्रेन-18 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है। सभी ट्रेनों के लिए अब इसे बढ़ाकर 160 किमी प्रति घंटा करने से दिल्ली-हावड़ा के बीच का सफर सिर्फ 12 घंटे में ही पूरा हो जाएगा।
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सिर्फ ट्रैक पर ही काम नहीं होगा, पूरा सिस्टम ही उच्चीकृत किया जाएगा

प्रोजेक्ट बड़ा है और इसके लिए रेलवे बाकी की धनराशि एक्सट्रा बजट रिसोर्सेस (अतिरिक्त बजट संसाधनों) से हासिल करेगा। यह एकल एजेंसी के माध्यम से होगा। इससे पीपीपी मॉडल के तहत होने वाले सुधार दिखेंगे। रोजाना होने वाले कामों की वजह से निचले स्तर पर रोजगार पैदा होंगे। 

इस स्पीड को पाने के लिए रेलवे सिर्फ पटरियों पर ही काम नहीं करेगा बल्कि पूरा सिस्टम ही उच्चीकृत किया जाएगा। सुरक्षित एलएचबी कोच बनाने के साथ इस प्रोजेक्ट के कामों में घेराबंदी (पटरी के दोनों तरफ दीवारें उठाना), स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली के तहत ईटीसीएस (यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम), सिग्नलिंग प्रणाली के मोबाइल ट्रेन रेडियो कम्युनिकेशन शामिल हैं। इससे सुरक्षा और विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। सभी लेवल क्रॉसिंगों को हटाना पड़ेगा। काम इस तरह से कराए जाएंगे कि कम से कम यातायात प्रभावित हो।

 

तीन साल पहले शुरू हुआ था प्रोजेक्ट, देश के छह प्रमुख रेलमार्गों पर होगा काम

रेलवे ने वर्ष 2016-17 में मिशन रफ्तार योजना शुरू की थी। इसके तहत देश के छह प्रमुख रेलमार्गों का चयन किया गया था। इसमें चलने वाली ट्रेनों की औसत गति दोगुना करना है। रेलवे अफसरों के मुताबिक मिशन रफ्तार के तहत दिल्ली-हावड़ा और दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पर भी ट्रेनों की स्पीड बढ़ेगी।

मिशन रफ्तार के तहत ही 2016 में रेलवे ने गतिमान एक्सप्रेस का सफल संचालन किया है। दिल्ली से आगरा के बीच की 188 किमी की दूरी गतिमान एक्सप्रेस ने एक घंटा 40 मिनट में पूरी की थी। अब वंदे भारत (ट्रेन-18) भी रेलवे की स्पीड के मिशन को गति दे रही है।

 
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अभी औसत स्पीड 55 से 60 किमी प्रति घंटा, प्रीमियम ट्रेनें अधिकतम 130 किमी प्रति घंटे

इन छह रूटों पर वर्तमान समय में मेल-सुपरफास्ट की औसत स्पीड 55 से 60 किमी प्रति घंटा है। शताब्दी-राजधानी जैसी प्रीमियम ट्रेनें अधिकतम 130 किमी प्रति घंटे से चलती हैं लेकिन औसत स्पीड 80-85 किमी प्रति घंटा है। मालगाड़ी की औसत रफ्तार 25-27 किमी प्रति घंटा है। आने वाले समय में इन तीनों श्रेणियों की ट्रेनों की औसत स्पीड में 25 किमी प्रति घंटे बढ़ जाएगी।

जनसंपर्क अधिकारी अमित मालवीय ने बताया केंद्र सरकार की कैबिनेट से मिशन रफ्तार के तहत ट्रेनों की गति बढ़ाने वाले इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गई है। इसमें कानपुर से लखनऊ मार्ग को जोड़ने से दोनों शहरों के यात्रियों को बड़ी मिलेगी।
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