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कानपुर: कमजोर इमारतों की मरम्मत करेगा मेट्रो, यूपीएमआरसी वहन करेगा इसका खर्चा
Tue, 15 Jun 2021 12:19 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 15 Jun 2021 12:19 PM IST
सार
मेट्रो टनल के निर्माण के दौरान टनल बोरिंग मशीन चलने पर लगभग 10 मीटर आगे तक, टनल के दोनों तरफ 50-50 मीटर के दायरे में आने वाली सर्वे में चिह्नित इमारतों की लगातार मॉनिटरिंग भी की जाएगी।
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सर्वे करती टीम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कानपुर में चुन्नीगंज से नयागंज के बीच प्रस्तावित मेट्रो टनल के दोनों ओर कमजोर इमारतों की मरम्मत मेट्रो करेगा। इसके लिए सोमवार को सर्वे किया गया। चार किमी लंबे भूमिगत मेट्रो कॉरिडोर (अंडरग्राउंड- प्रथम) का निर्माण होना है।
बताया कि प्रस्तावित मेट्रो टनल के दोनों ओर लगभग 50-50 मीटर के दायरे में आने वाली इमारतों की मौजूदा स्थिति की जांच होगी। ताकि निर्माण से आसपास की किसी भी कमजोर इमारत को क्षति पहुंचने की आशंका न हो। कमजोर मिलने वाली इमारत की मरम्मत की जाएगी।
इसके अतिरिक्त, सर्वे में निजी तौर पर खुदवाए गए बोरवेल की जानकारी भी जुटाई जा रही है। जरूरत पड़ने पर बोरवेल को शिफ्ट कर दिया जाएगा। मरम्मत और शिफ्टिंग के काम में परिसंपत्ति के मालिक की सहमति आवश्यक है। इसपर होने वाला खर्च उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड वहन करेगा।
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मेट्रो टनल के निर्माण के दौरान टनल बोरिंग मशीन चलने पर लगभग 10 मीटर आगे तक, टनल के दोनों तरफ 50-50 मीटर के दायरे में आने वाली सर्वे में चिह्नित इमारतों की लगातार मॉनिटरिंग भी की जाएगी। यह जानकारी यूपीएमआरसी के पीआरओ ने दी।
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बताया कि प्रस्तावित मेट्रो टनल के दोनों ओर लगभग 50-50 मीटर के दायरे में आने वाली इमारतों की मौजूदा स्थिति की जांच होगी। ताकि निर्माण से आसपास की किसी भी कमजोर इमारत को क्षति पहुंचने की आशंका न हो। कमजोर मिलने वाली इमारत की मरम्मत की जाएगी।
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इसके अतिरिक्त, सर्वे में निजी तौर पर खुदवाए गए बोरवेल की जानकारी भी जुटाई जा रही है। जरूरत पड़ने पर बोरवेल को शिफ्ट कर दिया जाएगा। मरम्मत और शिफ्टिंग के काम में परिसंपत्ति के मालिक की सहमति आवश्यक है। इसपर होने वाला खर्च उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड वहन करेगा।
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मेट्रो टनल के निर्माण के दौरान टनल बोरिंग मशीन चलने पर लगभग 10 मीटर आगे तक, टनल के दोनों तरफ 50-50 मीटर के दायरे में आने वाली सर्वे में चिह्नित इमारतों की लगातार मॉनिटरिंग भी की जाएगी। यह जानकारी यूपीएमआरसी के पीआरओ ने दी।