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...तो ड्राइवर के कहने पर फैसले लेती रही मायावती
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 18 Mar 2017 10:12 AM IST
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मायावती (फाइल फोटो)
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बेहद अचरज भरी बात है कि यूपी विधानसभा चुनाव में चारों खाने चित होने के बाद बसपाई अब उल-जूलूल बयानबाजी कर रहे हैं। याद हो यूपी चुनाव के नतीजे आने के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने ईवीएम में गड़बड़ होने की बात कही थी तो वहीं अब यह बाते बन रही हैं कि कुछ बड़े नेताओं ने मायावती को गुमराह किया था।
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मायावती के ओएसडी गंगाराम अंबेडकर का कहना है 'बहनजी ड्राइवर के कहने पर पूरी पार्टी चला रही हैं। उनको रास्ते पर लाने के लिए इस्तीफा दिया है। शायद बसपा परिवार के छोटे सदस्य की बातें समझ में आएंगी तो पार्टी बच जाएगी। बता दें, गंगाराम ने बुधवार को मायावती के ओएसडी पद से इस्तीफा दे दिया।
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मायावती ने ड्राइवर के भरोसे छोड़ दी पूरी पार्टी
मायावती (फाइल फोटो)
पिछले 14 सालों से मायावती के ओएसडी के बतौर काम करने वाले गंगाराम अंबेडकर ने आगे कहा- बहनजी और बसपा को कोई और चला रहा है। हमारा इस्तीफा बहन जी को अलर्ट करने के लिए है। केवल इतना ही नहीं गंगाराम ने सतीश चन्द्र मिश्रा को मायावती का ड्राइवर बताते हुए कहा- 'बहनजी ने एक ड्राइवर के भरोसे पूरी पार्टी सौंप दी है, जबकि उस ड्राइवर को हमारे और बहनजी के मिशन से कोई मतलब नहीं है।
कभी-कभी ड्राइवर की बात माननी पड़ती है, लेकिन बहनजी अब उस ड्राइवर के ही कहने पर चलने लगी हैं। ड्राइवर शॉर्ट कट रास्ता दिखाता तो बहनजी उधर ही चल देती हैं। ऐसे रास्ते और ऐसे लोगों से बच निकलने की जरूरत है। बहनजी को ये भी सोचना चाहिए कि रास्ता कौन सा है और कौन रास्ता दिखा रहा है। कभी-कभी रास्ता दिखाने वालों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
कभी-कभी ड्राइवर की बात माननी पड़ती है, लेकिन बहनजी अब उस ड्राइवर के ही कहने पर चलने लगी हैं। ड्राइवर शॉर्ट कट रास्ता दिखाता तो बहनजी उधर ही चल देती हैं। ऐसे रास्ते और ऐसे लोगों से बच निकलने की जरूरत है। बहनजी को ये भी सोचना चाहिए कि रास्ता कौन सा है और कौन रास्ता दिखा रहा है। कभी-कभी रास्ता दिखाने वालों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
बहनजी से मिलने से रोकते हैं ये 2 लोग
मायावती के ओएसडी गंगाराम अंबेडकर
गंगाराम अंबेडकर ने आगे कहा- 'हमारा इस्तीफा किसी खास मकसद या लालच से नहीं हैं। वरना विधानसभा चुनावों के पहले करते। इस वक्त करने का मकसद बहनजी को ये बताना है कि, अब भी वक्त है हम 2019 जीत सकते हैं। मैं बसपा परिवार का अपने को छोटा बच्चा मानता हूं हो सकता है, मेरे इस्तीफे से बहन जी की आंखे खुल जाएं। बड़े जिम्मेदारों से सवाल पूछना चाहिए कि कमी कहां रही और क्या समस्या हुई कि लोग छोड़कर जा रहे हैं।बहनजी के यहां 2 लोग हैं जो हम जैसे छोटे कार्यकर्ताओं को उनसे मिलने ही नहीं देते हैं। उन्हीं के लोगों ने पूरे बंगले में बहनजी के आस-पास पूरी तरह से घेरा बना लिया है। ये दो-तीन लोग पूरी तरह से मायावती को भ्रमित कर रहे हैं। वो किसी दलित-पिछड़े व्यक्ति को राजनीति में नहीं लाना चाहते हैं।
बसपा में बगुलों की मौज
मायावती (फाइल फोटो)
गंगाराम अंबेडकर ने आगे कहा 'पेड़ पर जब ज्यादा बगुले बैठने लगते हैं, तो बाग का माली पेड़ों की छंटाई करता है, या फिर बगुलों का हटाता है। अब बहनजी को तय करना है कि बाग की छंटाई करनी है या बगुलों को हटाना है। क्योंकि ये बगुले बस मलाई चाटते हैं, जमीन पर काम हम करते हैं। फिलहाल बसपा में बगुलों की मौज है।