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कई दिग्गजों के लिए चौथे चरण का चुनाव ‘इम्तिहान’

Thu, 23 Feb 2017 03:32 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Thu, 23 Feb 2017 03:32 PM IST
सार

दो प्रत्याशी ‘हैट्रिक’ की कगार पर
नए चेहरों की टक्कर से उड़ी नींद
दिनकर, विवेक, विशंभर की प्रतिष्ठा दांव पर

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 many big leader fighting in up election fourth phase
डेमो

विस्तार

यूपी विधानसभा चुनाव के चौथे चरण में कई दिग्गजों की साख दांव पर लगी है। चौथे चरण के अंतर्गत प्रतापगढ़, कौशांबी, इलाहाबाद, जालौन, झांसी, ललितपुर, महोबा, हमीरपुर, बांदा, चित्रकूट, फतेहपुर और रायबरेली समेत कुल 12 जिलों की 53 सीटों पर गुरुवार को वोट डाले जाएंगे। इस चरण में राजा भैया, प्रमोद तिवारी, कैबिनेट मंत्री शिवकांत ओझा और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नाती सिद्धार्थनाथ सिंह जैसे दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर है : 
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प्रदेश से रघुराज प्रताप सिंह, मनोज पांडेय, शिवाकांत ओझा, प्रमोद तिवारी की बेटी अराधना मिश्रा, स्वामी प्रसाद मौर्य के बेटे उत्कृष्ट मौर्य, अनुग्रह नारायण सिंह, उज्जवल रमण सिंह, गया चरण दिनकर, राकेश धर त्रिपाठी की पत्नी प्रमिला त्रिपाठी, राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोती, अशोक कुमार सिंह चंदेल, गयादीन अनुरागी जैसे दिग्गज मैदान में हैं।
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रायबरेली सदर सीट से वरिष्ठ कांग्रेस नेता और विधायक अखिलेश सिंह की बेटी अदिति सिंह कांग्रेस के टिकट से ही पहली बार चुनाव मैदान में हैं। भाजपा ने अनीता श्रीवास्तव तो बसपा ने मो. शहबाज को अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं भारती पांडेय भी भाजपा छोड़कर रालोद से पहली बार चुनावी मैदान में हैं।
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ऊंचाहार विधानसभा सीट से पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के बेटे उत्कर्ष मौर्य 2012 में बसपा से चुनाव हारने के बाद इस बार भाजपा से फूल खिलाने उतरे हैं। इनके सामने मौजूदा विधायक एवं कैबिनेट मंत्री डॉ. मनोज कुमार पांडेय दूसरी बार विधानसभा पहुंचने के लिए सपा के टिकट से मैदान में हैं। कांग्रेस से अजय पाल सिंह जबकि बसपा से विवेक विक्रम सिंह भी ताल ठोंक रहे हैं।


मानिकपुर : गुलाबी गैंग की कमांडर मैदान में

महिलाओं की आवाज बनने वाली गुलाबी गैंग की कमांडर संपत पाल तीसरी बार विधानसभा मैदान में हैं । 2006 में संपत पाल ने महिलाओं की समस्याओं पर आंदोलन शुरू किया और गुलाबी गैंग बनाया था। एक बार फिर से कांग्रेस ने संपत पाल को उम्मीदवार बनाया है। इससे पहले वे 2012 में मानिकपुर सीट से कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ीं, लेकिन हार गईं।

बबीना में सांसद पुत्र की प्रतिष्ठा

झांसी जिले के बबीना विधानसभा सीट पर सपा से राज्यसभा सदस्य डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव के पुत्र यशपाल सिंह मैदान में हैं। जबकि, भाजपा से उमा भारती के करीबी राजीव सिंह चुनाव लड़ रहे हैं। यहां इन दोनों नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। 

इलाहाबाद उत्तरी सीट से भाजपा ने पूर्व राज्यपाल राजेंद्र कुमार वाजपेयी के पौत्र हर्षवर्धन वाजपेयी एक बार फिर से चुनावी मैदान में उतारा है। हर्षवर्धन पहले भी विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। इनके सामने कांग्रेस के अनुग्रह नारायण सिंह तो बसपा के अमित श्रीवास्तव चुनाव मैदान में हैं।

कुंडा: राजाभैया पर निगाहें
सुखियों में रहने वाले कुंडा के विधायक रघुराज प्रताप सिंह ऊर्फ राजा भैया फिर निर्दल चुनाव लड़ रहे हैं। सन 1993 से ही लगातार विधायकी जीतते आए राजा भैया के गढ़ में उन्हें चुनौती देना भाजपा और बसपा के लिए आसान नहीं है। लगभग हर सरकार में मंत्री रहे राजा भैया के सामने भाजपा से जानकी प्रसाद पांडेय और बसपा से परवेज अख्तर अंसारी ताल ठोक रहे हैं।

बांदा जिले के नरैनी विधानसभा सीट पर बीएसपी ने विधानसभा में विपक्ष के नेता गयाचरण दिनकर को मैदान में उतारा है। 2012 के चुनाव में बसपा के गयाचरन दिनकर ने यहां से सपा के भरतलाल दिवाकर को पराजित किया। इस बार चुनाव के लिए बसपा ने गयाचरन दिनकर और सपा ने भरतलाल दिवाकर को प्रत्याशी बनाया है। 


बांदा की चार सीटों में निवर्तमान विधायकों की प्रतिष्ठा दांव पर है। दो प्रत्याशी ‘हैट्रिक’ की कगार पर हैं। हालांकि नए चेहरों की कड़ी टक्कर से दिग्गजों की नींद उड़ी है। 

महा मुकाबला होगा बांदा की इन चार सीटों पर
 

बांदा सदर सीट:  
सपा-कांग्रेस गठबंधन प्रत्याशी विवेक कुमार सिंह तीन बार विधान सभा पहुंचे। 1996 में ऊर्जा और पर्यावरण राज्य मंत्री रहे। 2007 से लगातार विधायक चुने जा रहे हैं। उन्हें नए नवेले भाजपा के प्रकाश द्विवेदी और बसपा के डा.मधुसूदन कुशवाहा कड़ी टक्कर दे रहे हैं। इनके अलावा 18 अन्य प्रत्याशी भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।

बबेरू सीट :
विधायन मंडल समिति के सभापति और सपा-कांग्रेस प्रत्याशी विशंभर सिंह यादव की साख भी दांव पर है। 2007 से लगातार विधायक चुने जा रहे श्री यादव के लिए यह चुनाव ‘हैट्रिक’ की तरह है। लेकिन बसपा की किरन यादव और भाजपा के चंद्रपाल कुशवाहा उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं। 

नरैनी (सुरक्षित) सीट :
बसपा के कद्दार नेता और विधान सभा मंडल नेता प्रतिपक्ष गयाचरन दिनकर के लिए यह चुनाव किसी इम्तिहान से कम नहीं है। इन्हें राजनीति का बड़ा खिलाड़ी माना जाता है। इस चुनाव में भी उन्हें टक्कर वहीं प्रत्याशी दे रहे हैं जो 2012 में दिनकर के सामने मैदान में थे। सपा-कांग्रेस से भरतलाल दिवाकर और भाजपा से राजकरन कबीर लड़ रहे हैं।



तिंदवारी सीट :
इस सीट में चतुष्कोणीय मुकाबला है। सपा-कांग्रेस प्रत्याशी दलजीत सिंह के सामने विधायक की कुर्सी बचाने की प्रतिष्ठा दांव पर है। बसपा प्रत्याशी जगदीश प्रजापति और भाजपा प्रत्याशी बृजेश प्रजापति तथा लोकदल प्रत्याशी रामकरन सिंह बच्चन कड़ी टक्कर दे रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस सीट में जीत-हार का अंदर ज्यादा नहीं रहेगा।

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