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कारोबारियों के लिए ट्रेलर है छापामारी

Thu, 14 Jul 2016 12:50 AM IST
Updated Thu, 14 Jul 2016 12:50 AM IST
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Managers of the Offering, the deputy searched the trailer for traders
­बिरहाना रोड स्थित लाला पुरुषोत्तम दास ज्वैलर्स के शोरूम के बाहर खड़े आयकर विभाग के अधिकारी। - फोटो : amarujala
कानपुर। आयकर विभाग की बुधवार को हुई छापामारी काला धन रखने वालों पर शिकंजा कसने की रणनीति है। आईडीएस पर उम्मीद के मुताबिक सफलता न मिलती देख यह छापामारी एक ट्रेलर है। कार्रवाई से कारोबारी वर्ग सकते में है। वे निश्चिंत थे कि 30 सितंबर से पहले विभाग की ओर से सर्च व सर्वे नहीं होगा। अचानक हुई कार्रवाई से उनकी धुकधुकी बढ़ गई है।
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 बिरहाना रोड स्थित पुरुषोत्तम दास ज्वैलर्स के यहां छापामारी की खबर जैसे ही चौतरफा फैली, कई ज्वैलर्स व अन्य कारोबारियों ने टोह लेने की कोशिश की कि आखिर औचक हुई इस कार्रवाई की वजह क्या है। पत्रकारों से लेकर अधिकारियों तक के पास फोन पहुंचे। विभागीय सूत्रों ने बताया कि इनकम डिक्लेरेशन स्कीम को डेढ़ माह बीत चुके हैं। उम्मीद के मुताबिक नतीजे सामने नहीं आए, जबकि आयकर अधिकारियों ने आय स्वत: घोषित करने के लिए ज्वैलर्स से लेकर हर तरह के कारोबारियों के साथ मीटिंग की और सरकार की मंशा की जानकारी दी। बार-बार चेताने के बाद भी ज्वैलर्स व बिल्डरों की ओर से कोई रिस्पांस नहीं मिला। इस पर अधिकारियों ने रणनीति बनाई है कि जिन कारोबारियों को स्कीम के बारे में सूचना दी जा चुकी है यदि वे समय पर स्कीम का लाभ नहीं उठाते तो उन पर शिकंजा कसने के लिए 30 सितंबर का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि जो कारोबारी छापामारी के दायरे में आ गए वे इनकम डिक्लेरेशन स्कीम (आईडीएस) का लाभ नहीं ले पाएंगे। उन पर नियमानुसार पेनाल्टी लगाई जाएगी।
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बिल्डर्स व ज्वैलर्स कनेक्शन पर आयकर की नजर
कानपुर (ब्यूरो)। आयकर विभाग ने बिल्डर्स व ज्वैलर्स कनेक्शन पर निगाह गड़ा दी है। काला धन बाहर निकलवाने के लिए छापामार कार्रवाई के पहले चरण में विभाग सबसे पहले उन कारोबारियों को घेरेगा, जिनका बिल्डर व ज्वैलर्स कनेक्शन है। यानी ऐसे कारोबारी जिन्होंने सराफा बाजार व रियल एस्टेट में पैसा लगा रखा है। शहर में कुछ ऐसे कारोबारी भी हैं जिनका दोनों जगह धन लगा है। शहर में बड़े रियल एस्टेट कारोबारी के तौर पर जाने जाते ओपी अग्रवाल के कई प्रोजेक्ट दिल्ली, मुुंबई, कोलकाता, गोवा, हरिद्वार में चल रहे हैं। इन प्रोेजेक्टों में अरबों रुपये की पूंजी लगी हुई है। शहर के कई अन्य प्रतिष्ठित कारोबारी इनके पार्टनर हैं। ओपी अग्रवाल की तरह ही शहर में करीब एक दर्जन बड़े रियल एस्टेट कारोबारी हैं जबकि 50 से अधिक छोटे कारोबारी। इसी तरह 50 से अधिक सराफा कारोबारियों का धन रियल एस्टेट में लगा है। कुछ का खुले तौर पर तो कुछ का चोरी छिपे। विभागीय सूत्रों का कहना है कि ओपी अग्रवाल के बाद रियल एस्टेट से संबंधित अन्य कारोबारियों पर भी कार्रवाई की तैयारी चल रही है। विभाग को आशंका है कि इन प्रोजेक्टों में बड़े पैमाने पर कालाधन लगा है।
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