{"_id":"58f4e98c4f1c1beb02471874","slug":"major-scandal-in-basic-education-department","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘योगी राज’ में बेखौफ शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अफसर कर रहे ये ‘बड़ा खेल’ ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘योगी राज’ में बेखौफ शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अफसर कर रहे ये ‘बड़ा खेल’
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 18 Apr 2017 05:44 PM IST
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विज्ञान किट खरीदारी में लाखों का गोलमाल सामने आने से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। योगी सरकार में हुए इस बड़े ‘खेल’ से अधिकारियों के होश उड़ गए हैं वह कुछ भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं हैं। जूनियर स्कूलों में विज्ञान किट खरीदने को शासन से 67.12 लाख बजट जारी किया गया था। ब्लॉक स्तरीय अफसरों ने किट खरीदारी कर स्कूल तक भेजवाने की जिम्मेदारी खुद संभाली और शिक्षकों से ब्लैंक चेकें लेकर एक ही फर्म से किटें खरीद कर स्कूलों को भेजवा दीं। शिक्षक नेताओं ने किटों की खरीद में बड़ा घालमेल होने की बात कही है।
उन्नाव जिले के 839 जूनियर स्कूलों में बच्चों को साइंस के बारे में प्रैक्टिकल जानकारी देने के लिए शासन ने विज्ञान किट की व्यवस्था सुनिश्चित कराई। प्रति स्कूल आठ हजार रुपये बजट तय किया गया है। इस हिसाब से इस मद में 67.12 लाख का बजट खर्च हुआ है। किट सप्लाई के लिए एनसीईआरटी से जिले में पांच फर्मों को नामित किया गया। वहीं विज्ञान किट खरीदारी की जिम्मेदारी स्कूल मैनेजमेंट कमेटी व इंचार्ज शिक्षक को दी गई। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
फर्मी से कमीशन फिक्स होने का आरोप
सूत्रों के मुताबिक गुपचुप तरीके से ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों ने किट खरीदारी व्यवस्था अपने हाथ में ले ली। अधिकारी एक ही फर्म से कमीशन फिक्स कर बाजार से अधिक कीमत पर विज्ञान किट खरीद कर लाखों का घालमेल किया। प्रधान टीचर व टीचर, अधिकारी के भय से इसका खुलकर विरोध भी नहीं कर पा रहे हैं। जूनियर स्कूलों के टीचरों का आरोप है कि सप्लाई की जा रही विज्ञान किट की क्वालिटी बेहद घटिया है। शिक्षकों का कहना है कि आठ हजार रुपये में सप्लाई की गई किट की बाजार में कीमत दो से तीन हजार रुपये ही है। वहीं सप्लाई करने वाली रेपसंस लिबोरेर्टी सर्विसेज महेश नगर अंबाला कैंट, आगरा की फर्म स्कूलों को किट सप्लाई को जो बिल दे रही है उसमें उपकरणों के नाम व रेट न देकर केवल आठ हजार रुपये दर्शा रही है।
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डीएम से जांच की मांग
शिक्षक विधायक राजबहादुर सिंह चंदेल ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। पूरे मामले की जांच कराने के लिए वह मंगलवार को डीएम से मिलेंगे। अगर प्रशासन जांच नहीं कराता तो बेसिक शिक्षामंत्री व शासन में शिकायत कर जांच की मांग करेंगे। उधर बेसिक शिक्षा अधिकारी दीवान सिंह यादव ने कहा कि विज्ञान किट खरीदारी में अभी कोई शिकायत नहीं आई है। पूरी प्रक्रिया शासन की गाइड लाइन के तहत अपनाई गई है। फिर भी जांच कराकर हकीकत का पता लगाया जाएगा। इस मामले में प्राथमिक शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष बृजेश पांडेय ने कहा कि ब्लाक स्तरीय अफसरों ने कमीशन फिक्स कर पूरे जिले में एक ही फर्म से स्कूलों को किट आपूर्ति कराई है। सिस्टम का खेल न खुले इसके लिए शिक्षकों से ब्लैंक चेक लेकर सप्लाई करा दी गई। जिससे कि ऑडिट में हेडमास्टर ही फंसे।
जानें, क्या है विज्ञान किट में
एक माइक्रो स्कोपी, स्प्रिट लैंप, कमानीदार तुला, टेस्ट ट्यूब होल्डर, कैंची, कीप ड्रायर, ग्लास, चाकू, पेचसकस, प्लास्टिक बोतल, प्रिज्म प्रकाश विस्लेषण, हथौड़ी, थर्मामीटर, स्केल, रेगमाल, मोमबत्ती, सिलवर पत्ती, 16 छोटी शीशी सहित कुल 18 उपकरण।
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उन्नाव जिले के 839 जूनियर स्कूलों में बच्चों को साइंस के बारे में प्रैक्टिकल जानकारी देने के लिए शासन ने विज्ञान किट की व्यवस्था सुनिश्चित कराई। प्रति स्कूल आठ हजार रुपये बजट तय किया गया है। इस हिसाब से इस मद में 67.12 लाख का बजट खर्च हुआ है। किट सप्लाई के लिए एनसीईआरटी से जिले में पांच फर्मों को नामित किया गया। वहीं विज्ञान किट खरीदारी की जिम्मेदारी स्कूल मैनेजमेंट कमेटी व इंचार्ज शिक्षक को दी गई। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
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फर्मी से कमीशन फिक्स होने का आरोप
सूत्रों के मुताबिक गुपचुप तरीके से ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों ने किट खरीदारी व्यवस्था अपने हाथ में ले ली। अधिकारी एक ही फर्म से कमीशन फिक्स कर बाजार से अधिक कीमत पर विज्ञान किट खरीद कर लाखों का घालमेल किया। प्रधान टीचर व टीचर, अधिकारी के भय से इसका खुलकर विरोध भी नहीं कर पा रहे हैं। जूनियर स्कूलों के टीचरों का आरोप है कि सप्लाई की जा रही विज्ञान किट की क्वालिटी बेहद घटिया है। शिक्षकों का कहना है कि आठ हजार रुपये में सप्लाई की गई किट की बाजार में कीमत दो से तीन हजार रुपये ही है। वहीं सप्लाई करने वाली रेपसंस लिबोरेर्टी सर्विसेज महेश नगर अंबाला कैंट, आगरा की फर्म स्कूलों को किट सप्लाई को जो बिल दे रही है उसमें उपकरणों के नाम व रेट न देकर केवल आठ हजार रुपये दर्शा रही है।
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डीएम से जांच की मांग
शिक्षक विधायक राजबहादुर सिंह चंदेल ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। पूरे मामले की जांच कराने के लिए वह मंगलवार को डीएम से मिलेंगे। अगर प्रशासन जांच नहीं कराता तो बेसिक शिक्षामंत्री व शासन में शिकायत कर जांच की मांग करेंगे। उधर बेसिक शिक्षा अधिकारी दीवान सिंह यादव ने कहा कि विज्ञान किट खरीदारी में अभी कोई शिकायत नहीं आई है। पूरी प्रक्रिया शासन की गाइड लाइन के तहत अपनाई गई है। फिर भी जांच कराकर हकीकत का पता लगाया जाएगा। इस मामले में प्राथमिक शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष बृजेश पांडेय ने कहा कि ब्लाक स्तरीय अफसरों ने कमीशन फिक्स कर पूरे जिले में एक ही फर्म से स्कूलों को किट आपूर्ति कराई है। सिस्टम का खेल न खुले इसके लिए शिक्षकों से ब्लैंक चेक लेकर सप्लाई करा दी गई। जिससे कि ऑडिट में हेडमास्टर ही फंसे।
जानें, क्या है विज्ञान किट में
एक माइक्रो स्कोपी, स्प्रिट लैंप, कमानीदार तुला, टेस्ट ट्यूब होल्डर, कैंची, कीप ड्रायर, ग्लास, चाकू, पेचसकस, प्लास्टिक बोतल, प्रिज्म प्रकाश विस्लेषण, हथौड़ी, थर्मामीटर, स्केल, रेगमाल, मोमबत्ती, सिलवर पत्ती, 16 छोटी शीशी सहित कुल 18 उपकरण।