{"_id":"5ea418218ebc3e903a577b71","slug":"lockdown-in-kanpur-revenge-work-in-lockdown-are-selling-vegetable-and-betel-leaves","type":"story","status":"publish","title_hn":"kanpur: लॉकडाउन में बदला पेशा, पान के पत्ते और सब्जी बेचकर भर रहे परिवार का पेट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
kanpur: लॉकडाउन में बदला पेशा, पान के पत्ते और सब्जी बेचकर भर रहे परिवार का पेट
Sat, 25 Apr 2020 04:43 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 25 Apr 2020 04:43 PM IST
विज्ञापन
कानपुर लॉकडाउन
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर- लॉकडाउन में बेरोजगार हुए लोग अपना पेशा बदलने के लिए मजबूर हैं। एक बड़ी आबादी के सामने अपना और अपने परिवार का पेट भरना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में ई-रिक्शा, ठेला आदि चलाने वाले जहां सब्जी बेचने लगे हैं वहीं गुटका, मसाला, सिगरेट बेचने वालों ने भी अपना धंधा बदल लिया है। इनमें से कई फुटपाथ पर बैठकर पान के पत्ते बेचने लगे हैं।
फुटपाथ पर बेच रहे पान के पत्ते
नमक फैक्टरी के पास रहने वाले मुन्नालाल चौरसिया गुमटी में पान, मसाला, गुटका बेचने का काम करते थे। इसी की कमाई से उनका परिवार चल रहा था लेकिन लॉकडाउन में काम बंद होने से उनके सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया। ऐसे में उन्होंने अलग-अलग चौराहों पर जाकर पान के पत्ते बेचने का मन बनाया। शनिवार को छपेड़ा पुलिया चौराहा पर उन्होंने बताया कि पहले दुकान से शाम तक 500 रुपये कमा लेते थे। लेकिन अब मुश्किल से काम चल पा रहा है। तीन बेटे हैं, जो फैक्टरी में काम करते थे। काम बंद होने से वे भी अब साथ में ही लगे हैं।
ई-रिक्शा की किस्त भरने को बेचने लगे सब्जी
डबल पुलिया, कच्ची बस्ती में रहने वाले बुद्धि लाल अपने साथी विकास के साथ काकादेव के आसपास के मोहल्लों में अपने ई-रिक्शा में भरकर सब्जी बेच रहे हैं। बुद्धिलाल 10 साल से ऑटो चला रहे थे। 2018 में अपना खुद का ई-रिक्शा खरीदा। बताया की प्रत्येक माह 9 हजार रुपये की किस्त भरनी पड़ती है। लॉकडाउन में काम बंद है। घर में पत्नी, दो बेटे और दो बेटियां हैं। ऐसे में भरण पोषण व किस्त निकालने के लिए ई-रिक्शा से सब्जी बेचने का निर्णय लेना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन
फुटपाथ पर बेच रहे पान के पत्ते
नमक फैक्टरी के पास रहने वाले मुन्नालाल चौरसिया गुमटी में पान, मसाला, गुटका बेचने का काम करते थे। इसी की कमाई से उनका परिवार चल रहा था लेकिन लॉकडाउन में काम बंद होने से उनके सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया। ऐसे में उन्होंने अलग-अलग चौराहों पर जाकर पान के पत्ते बेचने का मन बनाया। शनिवार को छपेड़ा पुलिया चौराहा पर उन्होंने बताया कि पहले दुकान से शाम तक 500 रुपये कमा लेते थे। लेकिन अब मुश्किल से काम चल पा रहा है। तीन बेटे हैं, जो फैक्टरी में काम करते थे। काम बंद होने से वे भी अब साथ में ही लगे हैं।
विज्ञापन
ई-रिक्शा की किस्त भरने को बेचने लगे सब्जी
डबल पुलिया, कच्ची बस्ती में रहने वाले बुद्धि लाल अपने साथी विकास के साथ काकादेव के आसपास के मोहल्लों में अपने ई-रिक्शा में भरकर सब्जी बेच रहे हैं। बुद्धिलाल 10 साल से ऑटो चला रहे थे। 2018 में अपना खुद का ई-रिक्शा खरीदा। बताया की प्रत्येक माह 9 हजार रुपये की किस्त भरनी पड़ती है। लॉकडाउन में काम बंद है। घर में पत्नी, दो बेटे और दो बेटियां हैं। ऐसे में भरण पोषण व किस्त निकालने के लिए ई-रिक्शा से सब्जी बेचने का निर्णय लेना पड़ा।
विज्ञापन