दोस्तों पिछले हफ्ते हम बताये रहन कि हम संकठा, पुत्तन, मनोहर अउर संतोस केसरवानी गे रहन कुंभ मेला.. जहां पुत्तन हेराय गे रहैं.. हम सब पुत्तन का ढूंढें मा लगिगेन.. एक तो पुत्तन ठहरे पुरान मानसिकता वाले..
मोबाइल उबाईल रखत नहीं हैं.. हम सबै लोग उनका ढूंढें मा परेसान हुई गे.. पुत्तन का ढूंढत ढूंढत हम लोग संगम किनारे पहुंच गेन.. तबहीं शोर मची गा.. आदमी डूब रहा.. आदमी डूब रहा.. हम भाग के उस तरफ गए कि कहूं पुत्तन तो नहीं आंय..
उई चिल्लावत रहा हमका तैरना नाही आत.. हम तैर नाही पावत है.. बचाओ.. वहीं एक बौड़म आदमी खड़ा.. उई उस डूबे वाले आदमी से कहे लाग कि यार तुम अजीब लौझड़ आदमी हौ.. अइसे तो हमहूं का बहुत कुछ नाही आवत है.. हमका हवाई जहाज उड़ावे नाही आवत है..
गिटार बजावे नाही आवत है.. पर हम कबहूं नाही चिल्लाए कि हमका नाही आवत है.. तो हम उस आदमी से कहा भइया ई पानी मा डूब रहा है अउर आप ओका बचाए के बजाय वार्तालाप करि रहे हौ.. खैर फौरन लाइफ गार्ड लोग आय के ओका बचाय लिहिन.. हम लोग फिर पुत्तन का ढूंढें मा लगि गे.. तबहीं हम लोगन का पाटन केर दरोगा शुकुल जी मिलि गे.. कहे लाग काहे भौंचक घूमि रहे हौ.. हम लोग उनका बतावा कि पुत्तन हेराय गे हैं..
तो दरोगा जी कहिन हुंवा सामने एक ठो शिविर होय.. खोया पाया केंद्र .. हुंवा चले जाओ.. मिल जइहैं.. नाही मिलें तो अलाउन्स्मेंट करा दिहेव.. हम लोगे भागि के हुंवा गे.. पुत्तन नाही मिले.. अलाउंस के बाद भी नाही मिले.. ओके बाद हम लोगे पहुंच गेन एक अखाड़ा मा.. हुंवा नागा लोग आग केर अंगारन पर चलत रहें.. हुंवा पुत्तन बड़ा ध्यान से साधू लोगन का देखत रहें.. हम कहा यार पुत्तन तुम अजीब टोपा आदमी हौ..