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जानें, आखिर कैसे यूपी में बढ़ रही है गांजे की तस्करी
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 31 Aug 2017 08:04 PM IST
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उत्तर प्रदेश में बीते कुछ दिनों में गांजे की तस्करी बढ़ती जा रही है। इस कारण आज यूपी नशाखोरी के मामले में देश का दूसरा राज्य बन गया है।
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अब सोचने वाली बात है कि आखिर गांजे की तस्करी में इतनी तेजी कैसै आई। तो इसका बड़ा कारण है कि ये 'सस्ते नशे' की श्रेणी है। गांजे के बारे में लोगों की अलग-अलग राय है।
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जैसे शिवनगरी कहे जाने वाले बनारस को ही ले लीजिए। यहां के लोगों का मानना है कि गांजा का सेवन शोच क्रिया के लिए अति लाभकारी है। इसे आमतौर पर लोग शिव के प्रसाद के तौर पर भी ग्रहण करते हैं।
कई शौध होने के बाद अब तो ये दावा भी किया जाने लगा है कि गांजे का उपयोग कई मानसिक बिमारियां भी दूर कर सकता है। इतना ही नहीं ये शरीर व हृदय का नाड़ियों को खोलने का भी विशेष काम करता है, लेकिन ऐसा तभी संभव है जब इसका प्रयोग दवा के तौर पर एक निश्चित मात्रा में ही किया जाए।
कई शौध होने के बाद अब तो ये दावा भी किया जाने लगा है कि गांजे का उपयोग कई मानसिक बिमारियां भी दूर कर सकता है। इतना ही नहीं ये शरीर व हृदय का नाड़ियों को खोलने का भी विशेष काम करता है, लेकिन ऐसा तभी संभव है जब इसका प्रयोग दवा के तौर पर एक निश्चित मात्रा में ही किया जाए।
मथुरा में एक करोड़ का गांजा पकड़ा
- फोटो : अमर उजाला
शराब, सिगरेट, गुटखा, बीड़ी व तंबाकू जैसे उत्पाद खुले में बेचे जा रहे हैं लेकिन गांजा प्रतिबंधित है। फिर भी यह चोरी-छिपे बिकता है। सभी जानते है कि होली के तयौहार पर देशभर में भांग का नशा किया जाता है जबकि इसी भांग के पौधे से गांजा तैयार किया जाता है।
ऐसे में सवाल उठता है कि नशाखोरी के प्रतिबंध के तौर पर सरकार का ये दौहरा रवैया क्यों..? यदि प्रतिबंध लगाना ही है तो दोनों ही स्तर पर लगना चाहिए न कि केवल गांजे पर।
ऐसे में सवाल उठता है कि नशाखोरी के प्रतिबंध के तौर पर सरकार का ये दौहरा रवैया क्यों..? यदि प्रतिबंध लगाना ही है तो दोनों ही स्तर पर लगना चाहिए न कि केवल गांजे पर।