किडनी कांडः लाखों रुपये खर्च कर खरीदी ‘मौत’, सामने आए कई चौकाने वाले तथ्य
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एसआईटी की जांच में खुलासा हुआ है कि लखनऊ के डोनर रईस ने लखीमपुर खीरी के कारोबारी कमल सक्सेना को वर्ष 2018 में अपना लीवर बेचा था। ट्रांसप्लांट के कुछ ही दिन बाद कमल की मौत हो गई थी। वहीं डोनर वरदान ने जिसको अपनी किडनी बेची थी, उसकी भी मौत हो गई थी। अन्य कई रिसीवर भी संक्रमण से जूझ रहे हैं।
अस्पताल में सुविधा नहीं, फिर भी हो गया ट्रांसप्लांट
किडनी या लिवर ट्रांसप्लांट के लिए रिसीवर और डोनर के डीएनए, ब्लड ग्रुप से लेकर एसएलए, टिश्यू मैचिंग तक कई टेस्ट कराए जाते हैं। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही ट्रांसप्लांट किया जाता है। अगर टेस्ट में डोनर और रिसीवर की कोई भी जांच रिपोर्ट मैच नहीं करती है और ट्रांसप्लांट कर दिया जाता है तो शरीर किडनी रिजेक्ट कर देता है। ऐसे में रिसीवर की मृत्यु की संभावना अधिक हो जाती है। -डॉ. निर्भय गुर्जर, नेफ्रोलॉजिस्ट रिजेंसी हॉस्पिटल