Kanpur: 6 मरीजों की रोशनी लेने वाले आराध्या हॉस्पिटल का लाइसेंस निरस्त, बिना अनुमति लगाया था अंधता निवारण कैंप
कानपुर में आराध्या आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद छह मरीजों के रोशनी खोने के मामले में हॉस्पिटल का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। जांच कमेटी इसे लेकर रिपोर्ट तैयार कर रही है। फाइनल रिपोर्ट आने पर अगली कार्रवाई की जाएगी।
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हॉस्पिटल संचालक नेत्र सर्जन डॉ. नीरज गुप्ता के लाइसेंस के संबंध में कार्रवाई को लेकर अभी जांच कमेटी की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। सीएमओ डॉ. आलोक रंजन ने बताया कि ओटी के सैंपल की रिपोर्ट आ गई है। जांच कमेटी इसे लेकर रिपोर्ट तैयार कर रही है। फाइनल रिपोर्ट आने पर अगली कार्रवाई की जाएगी।
तीन बिंदुओं पर मांगा गया था जवाब
मरीजों के फॉलोअप में लापरवाही
सीएमओ ने नोटिस जारी कर अस्पताल से मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर जवाब मांगा था। पहला सवाल रोगियों की मोतियाबिंद सर्जरी के बाद फॉलोअप में की गई लापरवाही पर था। कायदे से रोगियों की पट्टी खोलने के बाद आंखों की स्थिति देखी जानी चाहिए थी। अगर संक्रमण का इलाज समय से शुरू कर दिया जाता तो आंखों को बचाया जा सकता था। ऑपरेशन के बाद रोगियों की देखरेख में लापरवाही बरती गई। इसका अस्पताल प्रबंधन माकूल जवाब नहीं दे पाया।
ऑपरेशन से संबंधित रजिस्टर नहीं था अपडेट
दूसरा यह कि अस्पताल ने रोगियों के ऑपरेशन से संबंधित रजिस्टर को अपडेट नहीं रखा था। सीएमओ कार्यालय ने जो अभिलेख अस्पताल प्रबंधन से मांगे थे, वे अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जा सके।
अवैध रूप से शिविर का आयोजन
तीसरा सबसे अहम बिंदु अवैध रूप से शिविर के आयोजन का था। निशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन शिविर के संबंध में स्वास्थ्य विभाग के सक्षम अधिकारी से अनुमति नहीं ली गई। बिना अनुमति शिविर लगा दिया गया।
सीएमओ डॉ. आलोक रंजन ने बताया कि नोटिस में जो भी बिंदु रहे हैं, उनका अस्पताल ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया है। इस पर अस्पताल का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया। आंख की रोशनी जाने के बाद छह रोगियों ने सीएमओ से शिकायत की थी। इसके बाद दो रोगी और वैसी ही समस्या लेकर आए थे। आराध्या आई हॉस्पिटल का लाइसेंस निलंबित होने के बाद से रोगी भर्ती नहीं किए जा रहे हैं। एसीएमओ (नर्सिंगहोम) डॉ. सुबोध प्रकाश ने बताया कि अस्पताल का लाइसेंस रद्द है। अगर रोगी भर्ती किए गए तो कार्रवाई की जाएगी।
हैलट से डिस्चार्ज किए गए मरीज
रोशनी खोने वाले पांच रोगियों का इलाज हैलट के नेत्र रोग विभाग में हुआ है। अब उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। रोगियों ने आंखों की सर्जरी कराने से मना कर दिया था। विभाग की वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी मोहन ने बताया कि रोगियों को डिस्चार्ज कर दिया गया है। उन्हें एंटीबायोटिक दी गई थी, जिससे संक्रमण नियंत्रित हुआ है। रोगियों को गुरुवार को अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया। इसके बाद वार्ड की सफाई कराई गई। वार्ड में भर्ती दूसरे रोगियों को सूडोमोनास बैक्टीरिया के संक्रमण का अंदेशा था।