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कानपुर: मां के पास खेल रहे दो साल के मासूम की सीवर टैंक में गिरने से मौत
Sat, 13 Nov 2021 01:09 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 13 Nov 2021 01:09 PM IST
सार
ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में सीवर टैंक के खुले होल में एक बकरी गिर गई थी। जिसे ग्रामीणों ने बाहर निकाल लिया था। इसके बाद पड़ोसी ने रमेश को सीवर टैंक में ढक्कन लगाने की सलाह दी थी, लेकिन रमेश ने उसे नजर अंदाज कर दिया था। रमेश अगर पड़ोसी की बात मान लेते तो आज मासूम को अपनी जान न गंवानी पड़ती।
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सीवर टैंक
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
ननिहाल आए दो साल के बच्चे की सीवर टैंक में गिरने से मौत हो गई। मां पास ही कपड़े धो रही थी, तभी उसकी नजर बेटे पर गई तो कोहराम मच गया। चौबेपुर के गबड़हा गांव निवासी मजदूर रमेश कुमार की पत्नी अंशिका भैयादूज पर चार बच्चों परी, हर्षित, कुणाल व दो साल के दीपक को लेकर सचेंडी के जगतपुर गांव स्थित मायके आई थी।
शनिवार सुबह अंशिका घर के बाहर बने सीवर टैंक के फर्श पर कपड़े धो रही थी। इस दौरान दीपक खेलते-खेलते टैंक में जा गिरा। थोड़ी देर बाद मासूम बेटे को टैंक में डूबता देख अंशिका ने शोर मचाया। चीख सुनकर दौड़े पड़ोसियों ने मासूम को टैंक से बाहर निकाला।
ग्रामीण उसे आनन-फानन पास के निजी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सचेंडी थाना प्रभारी रामबाबू सिंह ने बताया कि सीवर टैंक मासूम के नाना रमेश कुमार का ही है। उन्होंने टैंक को ढक्कन की जगह प्लास्टिक के टूटे टब और बोरी से ढक रखा था। जिसके चलते मासूम सीवर टैंक में जा गिरा। इससे पानी में डूबने से मौत हो गई।
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शनिवार सुबह अंशिका घर के बाहर बने सीवर टैंक के फर्श पर कपड़े धो रही थी। इस दौरान दीपक खेलते-खेलते टैंक में जा गिरा। थोड़ी देर बाद मासूम बेटे को टैंक में डूबता देख अंशिका ने शोर मचाया। चीख सुनकर दौड़े पड़ोसियों ने मासूम को टैंक से बाहर निकाला।
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ग्रामीण उसे आनन-फानन पास के निजी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सचेंडी थाना प्रभारी रामबाबू सिंह ने बताया कि सीवर टैंक मासूम के नाना रमेश कुमार का ही है। उन्होंने टैंक को ढक्कन की जगह प्लास्टिक के टूटे टब और बोरी से ढक रखा था। जिसके चलते मासूम सीवर टैंक में जा गिरा। इससे पानी में डूबने से मौत हो गई।
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पड़ोसी ने समझाया था, ढक्कन लगवा लो
ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में सीवर टैंक के खुले होल में एक बकरी गिर गई थी। जिसे ग्रामीणों ने बाहर निकाल लिया था। इसके बाद पड़ोसी ने रमेश को सीवर टैंक में ढक्कन लगाने की सलाह दी थी, लेकिन रमेश ने उसे नजर अंदाज कर दिया था। रमेश अगर पड़ोसी की बात मान लेते तो आज मासूम को अपनी जान न गंवानी पड़ती।
मां की आंखों के सामने टूटी मासूम की सांसें
दीपक जब टैंक में डूब रहा था तब अंशिका उसे बचाने के लिए गुहार लगा रही थी। जब तक लोग उसे टैंक से बाहर निकालते उसकी सांसें थम चुकी थीं। आंखों के सामने अपने बच्चे को दम तोड़ता देख अंशिका बेसुध हो गई। इधर, मासूम की मौत से गांव में मातम छा गया।
ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में सीवर टैंक के खुले होल में एक बकरी गिर गई थी। जिसे ग्रामीणों ने बाहर निकाल लिया था। इसके बाद पड़ोसी ने रमेश को सीवर टैंक में ढक्कन लगाने की सलाह दी थी, लेकिन रमेश ने उसे नजर अंदाज कर दिया था। रमेश अगर पड़ोसी की बात मान लेते तो आज मासूम को अपनी जान न गंवानी पड़ती।
मां की आंखों के सामने टूटी मासूम की सांसें
दीपक जब टैंक में डूब रहा था तब अंशिका उसे बचाने के लिए गुहार लगा रही थी। जब तक लोग उसे टैंक से बाहर निकालते उसकी सांसें थम चुकी थीं। आंखों के सामने अपने बच्चे को दम तोड़ता देख अंशिका बेसुध हो गई। इधर, मासूम की मौत से गांव में मातम छा गया।