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जालौन: जिम में विवाद के बाद चाकू से गोदकर हत्या करने वाले को उम्रकैद, 84 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया
Fri, 30 Oct 2026 09:54 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
Published by: Shikha Pandey
Updated Fri, 30 Oct 2026 09:54 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
तीन साल पहले जिम में हुए विवाद के बाद युवक की चाकू से हमला कर हत्या करने के मामले में एससी-एसटी एक्ट के विशेष न्यायाधीश सुरेश कुमार गुप्ता ने शुक्रवार को फैसला सुनाया। न्यायालय ने मुख्य आरोपी योगेश तिवारी को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 84 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। वहीं, साक्ष्य पर्याप्त न मिलने पर दो अन्य आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
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शहर कोतवाली क्षेत्र के राजेंद्र नगर निवासी रमेश वाल्मीकि ने 22 अक्तूबर 2023 को पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि 21 अक्तूबर की शाम करीब 5:30 बजे उनका नाती हर्ष वाल्मीकि अपने साथी अनिकेत के साथ कृष्णा टॉकीज के पास स्थित हेल्थ क्लब में गया था। वहां नदीगांव निवासी योगेश तिवारी अपने दो साथियों के साथ मौजूद था। आरोप था कि हर्ष को देखते ही योगेश ने गाली-गलौज करते हुए जिम आने का समय बदलने को कहा।
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विरोध करने पर योगेश और उसके साथियों ने हर्ष को पकड़कर जिम के बाहर ले जाकर मारपीट की। इसके बाद दोनों साथियों ने हर्ष को पकड़ लिया और योगेश ने उस पर चाकू से हमला कर दिया। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के दौरान हर्ष का भाई आयुष और साथी अनिकेत समेत अन्य लोग मौके पर पहुंच गए। वे घायल हर्ष को जिला अस्पताल ले गए। वहां से उसे मेडिकल कॉलेज और फिर हालत गंभीर होने पर कानपुर रेफर कर दिया गया। हालांकि, रास्ते में ही हर्ष ने दम तोड़ दिया। कानपुर में शव का पोस्टमार्टम कराया गया। वारदात जिम में लगे सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हुई थी।
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पुलिस ने योगेश तिवारी और उसके दो साथियों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना की। इस दौरान योगेश को गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त चाकू बरामद किया गया। विवेचना पूरी होने के बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान वादी समेत अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए। शुक्रवार को दोनों पक्षों की बहस और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विशेष न्यायाधीश ने योगेश तिवारी को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 84 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, दो अन्य आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।