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नानाजी देशमुख के कारण चित्रकूट से रहा है जेटली का लगाव, धर्मनगरी में मिले थे जगद्गुरु रामभद्राचार्य
Sat, 24 Aug 2019 11:50 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
सुधीर अग्रवाल/अनूप दुबे, अमर उजाला, चित्रकूट
सुधीर अग्रवाल/अनूप दुबे, अमर उजाला, चित्रकूट
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 24 Aug 2019 11:50 PM IST
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चित्रकूट पहुंचकर जगद्गुरु रामभद्राचार्य से गले मिले थे जेटली
- फोटो : अमर उजाला
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केंद्र सरकार में वित्तमंत्री रहे अरुण जेटली का लगाव चित्रकूट नगरी से रहा है। वे दो बार भारतरत्न स्व. नानीजी देशमुख के विकास कार्य के मॉडल को देखने के लिए चित्रकूट आए। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में खुद जाकर कार्यों को देखा।
कामदगिरि पर्वत के दर्शन कर मंदिर में माथा टेका था। वह जगद्गुरु रामभद्राचार्य से भी मिले। जगदगुरु रामभद्राचार्य एक बार उनके दिल्ली स्थित कार्यालय ही मिलने पहुंच गए थे।
केंद्र सरकार के पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का चित्रकूट में आगमन 1999 व 2004 में हुआ था।
पहली बार जब वह आए थे तो वह जानकी कुंड स्थित उद्यमिता विद्यापीठ परिसर का निरीक्षण का दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा किए गए कार्यों को देखा था। निरीक्षण के दौरान नानाजी देखमुख भी मौजूद थे। पूर्व वित्त मंत्री को नानाजी देखमुख ने ग्रामीण क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की भी जानकारी दी थी।
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इसी दौरान उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र के विकास के लिए कराए जा रहे ग्रामीण स्वावलंबन वाले मॉडल को अपने क्षेत्र में भी लागू कराने की बात कही थी। दूसरी बार 2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री पार्टी के स्टार प्रचारक के रूप में बांदा आए थे।
बांदा में जनसभा करने के बाद वह चित्रकूट पहुंचे थे। पीली कोठी के पास ही उन्होंने विश्राम कर कार्यकर्ताओं से बातचीत की थी। भाजपा नेता दिनेश तिवारी, पंकज अग्रवाल व राजेश जायसवाल ने बताया कि लगभग दो घंटे तक रुकने के दौरान उन्होंने कामदगिरि पर्वत के दर्शन कर मंदिर में माथा टेका था।
भाजपा की चुनावी सभा को संबोधित किया था। पूर्व केंद्रीय मंत्री जगदगुुरु रामभद्राचार्य से भी बेहद प्रभावित थे। उनसे भी कई बार मिले। एक बार तो उन्होंने जगदगुुरु रामभद्राचार्य को दिल्ली स्थित कार्यालय में आने का निमंत्रण भेजा था जहां उनका बेहद गर्मजोशी से स्वागत कर आशीर्वाद लिया था।
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कामदगिरि पर्वत के दर्शन कर मंदिर में माथा टेका था। वह जगद्गुरु रामभद्राचार्य से भी मिले। जगदगुरु रामभद्राचार्य एक बार उनके दिल्ली स्थित कार्यालय ही मिलने पहुंच गए थे।
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केंद्र सरकार के पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का चित्रकूट में आगमन 1999 व 2004 में हुआ था।
पहली बार जब वह आए थे तो वह जानकी कुंड स्थित उद्यमिता विद्यापीठ परिसर का निरीक्षण का दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा किए गए कार्यों को देखा था। निरीक्षण के दौरान नानाजी देखमुख भी मौजूद थे। पूर्व वित्त मंत्री को नानाजी देखमुख ने ग्रामीण क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की भी जानकारी दी थी।
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इसी दौरान उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र के विकास के लिए कराए जा रहे ग्रामीण स्वावलंबन वाले मॉडल को अपने क्षेत्र में भी लागू कराने की बात कही थी। दूसरी बार 2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री पार्टी के स्टार प्रचारक के रूप में बांदा आए थे।
बांदा में जनसभा करने के बाद वह चित्रकूट पहुंचे थे। पीली कोठी के पास ही उन्होंने विश्राम कर कार्यकर्ताओं से बातचीत की थी। भाजपा नेता दिनेश तिवारी, पंकज अग्रवाल व राजेश जायसवाल ने बताया कि लगभग दो घंटे तक रुकने के दौरान उन्होंने कामदगिरि पर्वत के दर्शन कर मंदिर में माथा टेका था।
भाजपा की चुनावी सभा को संबोधित किया था। पूर्व केंद्रीय मंत्री जगदगुुरु रामभद्राचार्य से भी बेहद प्रभावित थे। उनसे भी कई बार मिले। एक बार तो उन्होंने जगदगुुरु रामभद्राचार्य को दिल्ली स्थित कार्यालय में आने का निमंत्रण भेजा था जहां उनका बेहद गर्मजोशी से स्वागत कर आशीर्वाद लिया था।
सादगी और सफाई पसंद थे जेटली
धर्मनगरी की यात्रा के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली की सादगी के सभी कायल हुए थे। सादा स्वच्छ पानी व हल्का नाश्ता किया था। जिसमें यहां का समोसा भी खाया था लेकिन मिठाई को महज चखा था। भाजपा नेताओं के अनुसार वह अपने आसपास सफाई का बड़ा ध्यान रखते थे। सभी को स्वच्छता से रहने को प्रेरित भी करते थे।