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‘जेएनयू छात्रों पर देशद्रोह लगाना जल्दबाजी’
अमर उजाला, ब्यूरो
Updated Thu, 25 Feb 2016 01:45 AM IST
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जेएनयू के आरोपी छात्रों उमर खालिद, अनिर्बान और कन्हैया आदि पर देशद्रोह की धाराएं लगाना जल्दबाजी है। यह कहना है जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एमरेटस शमीम हनफी का।
उन्होंने कहा कि जेएनयू विश्व की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटियों में से एक है। वहां से गलत सियासत को दूर कर दिया जाए तो खराबियां अपने आप खत्म हो जाएंगी। जेएनयू प्रकरण के बाद विश्वविद्यालयों का माहौल खराब है।
हाल में एएमयू में बीफ परोसने की बात फैलाई गई, जो गलत साबित हुई। उन्होंने कहा कि संस्थान को निगरानी रखनी चाहिए कि उनके छात्र ऐसी शिक्षा और माहौल से प्रभावित न हों, जो देश का नुकसान करें। प्रो. हनफी बुधवार को चमनगंज के हलीम मुस्लिम पीजी कॉलेज में उर्दू पर हुए सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
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जेएनयू का मामला अभिव्यक्ति की आजादी नहीं : प्रियंवद
वरिष्ठ साहित्यकार प्रियंवद ने इस मामले में कहा कि जेएनयू प्रकरण अभिव्यक्ति की आजादी का मामला नहीं है। इस प्रकरण में इससे ज्यादा बोलने से उन्होंने मना कर दिया। साहित्यकारों द्वारा एवार्ड वापस करने के मसले पर कहा कि साहित्य खुद ही विरोध का होता है। यही वजह है कि दुनिया की दमनपसंद ताकतें साहित्य को ताकत नहीं देना चाहती हैं।
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उन्होंने कहा कि जेएनयू विश्व की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटियों में से एक है। वहां से गलत सियासत को दूर कर दिया जाए तो खराबियां अपने आप खत्म हो जाएंगी। जेएनयू प्रकरण के बाद विश्वविद्यालयों का माहौल खराब है।
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हाल में एएमयू में बीफ परोसने की बात फैलाई गई, जो गलत साबित हुई। उन्होंने कहा कि संस्थान को निगरानी रखनी चाहिए कि उनके छात्र ऐसी शिक्षा और माहौल से प्रभावित न हों, जो देश का नुकसान करें। प्रो. हनफी बुधवार को चमनगंज के हलीम मुस्लिम पीजी कॉलेज में उर्दू पर हुए सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
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जेएनयू का मामला अभिव्यक्ति की आजादी नहीं : प्रियंवद
वरिष्ठ साहित्यकार प्रियंवद ने इस मामले में कहा कि जेएनयू प्रकरण अभिव्यक्ति की आजादी का मामला नहीं है। इस प्रकरण में इससे ज्यादा बोलने से उन्होंने मना कर दिया। साहित्यकारों द्वारा एवार्ड वापस करने के मसले पर कहा कि साहित्य खुद ही विरोध का होता है। यही वजह है कि दुनिया की दमनपसंद ताकतें साहित्य को ताकत नहीं देना चाहती हैं।