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मृत मरीजों को रेमडेसिविर लगाने का मामला: निष्कासित स्टाफ ने किया हैलट में हंगामा, कहा- नर्सिंग स्टाफ ही दोषी क्यों...

Wed, 04 Aug 2021 08:29 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Wed, 04 Aug 2021 08:29 PM IST
सार

मैट्रन से भी साक्ष्य लिया जाए क्योंकि हम लोग उनकी अनुमति के बिना रोगियों को दवा और इंजेक्शन नहीं लगाते। नर्सिंग स्टाफ ने जिलाधिकारी को भी ज्ञापन सौंपा है।

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issue of applying Remdesivir to dead patients: expelled staff created ruckus
हैलट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कानपुर में मृत मरीजों के नाम रेमडेसिविर इंजेक्शन जारी कराने के मामले में हैलट से निष्कासित आउटसोर्सिंग की 23 स्टाफ नर्सों ने बुधवार को हैलट परिसर में नारेबाजी की। मांग की कि कार्रवाई से पूर्व हम सभी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाए।
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मैट्रन से भी साक्ष्य लिया जाए क्योंकि हम लोग उनकी अनुमति के बिना रोगियों को दवा और इंजेक्शन नहीं लगाते। नर्सिंग स्टाफ ने जिलाधिकारी को भी ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में लिखा कि अप्रैल और मई के बीच ऑनड्यूटी डॉक्टर समस्त जूनियर डॉक्टर, सीनियर डॉक्टर, न्यूरो साइंसेज के प्रभारी अधिकारी को मरीजों की सारी जानकारी होती थी।
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इसके बाद भी सिर्फ नर्सिंग स्टाफ को ही दोषी माना गया। उन्होंने सारे फ्लोर के व्हाट्सएप ग्रुपों को चेक कराने, जिन डॉक्टर के हस्ताक्षर से इंजेक्शन आता है, उनसे भी पूछताछ की मांग की है। कहा कि मामले में ऑनड्यूटी डॉक्टर भी जिम्मेदार हैं। फिर भी नोडल अधिकारी, प्रभारी, फार्मासिस्ट, सिस्टर इंचार्ज और परमानेंट नर्सिंग स्टाफ को क्लीनचीट दे दी गई है। ज्ञापन देने वालों में रागिनी, मोनिका, सीमा आदि शामिल रहीं।
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