{"_id":"58db38994f1c1b447763f923","slug":"isi-agent-will-be-exempted-in-six-months","type":"story","status":"publish","title_hn":"..तो छह माह में छूट जाएगा आईएसआई एजेंट? ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
..तो छह माह में छूट जाएगा आईएसआई एजेंट?
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 29 Mar 2017 10:01 AM IST
विज्ञापन
डेमो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आईएसआई एजेंट इफ्तियाज अली सिद्दीकी उर्फ इमली उर्फ बाबू की रिहाई को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। जेल अधीक्षक वीके मिश्रा का कहना है कि इम्तियाज को छह माह बाद रिहा कर दिया जाएगा।
वहीं इम्तियाज के वकील शकील अहमद बुंदेला का कहना है कि कोर्ट ने सभी धाराओं में अलग-अलग सजा दी है। इसलिए छह माह बाद नहीं छूट सकता है। एटीएस ने इम्तियाज अली की 11 सितंबर 2009 को सचेंडी से पकड़ा था। दावा किया था कि वह आईएसआई एजेंट है।
उसके पास से कानपुर, झांसी के सैन्य प्रतिष्ठान समेत अन्य संवेदनशील स्थानों के नक्शे और दस्तावेज मिले थे। 24 मार्च को एटीएस ने लखनऊ में प्रेस नोट जारी कर इम्तियाज को 13 साल की कैद और 24 हजार रुपये जुर्माने की सजा की बात कही थी।
विज्ञापन
जेल अधीक्षक का कहना है कि इम्तियाज को धोखाधड़ी (धारा 419) में दो साल, धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी (धारा 468) में चार साल, फर्जी दस्तावेज को सही के रूप में प्रयोग करने (धारा 471) में एक साल और शासकीय गोपनीय अधिनियम की धारा 3/4 में छह साल की सजा सुनाई गई थी।
इसमें जेल में बिताई गई अवधि को समायोजित करने को कहा गया है। सभी धाराओं में सजा एक साथ चलेगी। इसमें छह साल सबसे बड़ी धारा है। इम्तियाज 2009 में जेल में आया था। इस तरह यह सजा पूरी हो गई है।
24 हजार जुर्माना न देने पर छह माह की सजा उसे और भुगतनी होगी। यह सजा कोर्ट के फैसले आने की तिथि से जुड़ेगी। इसलिए छह माह बाद इम्तियाज रिहा हो जाएगा।
वहीं अधिवक्ता शकील अहमद बुंदेला का कहना है कि इस प्रकरण में यह बात लागू नहीं होती है। सीआरपीसी की धारा 31 में मजिस्ट्रेट को अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाने का अधिकार है। इसलिए सजा अलग-अलग यानी कुल 13 साल होगी।
विज्ञापन
वहीं इम्तियाज के वकील शकील अहमद बुंदेला का कहना है कि कोर्ट ने सभी धाराओं में अलग-अलग सजा दी है। इसलिए छह माह बाद नहीं छूट सकता है। एटीएस ने इम्तियाज अली की 11 सितंबर 2009 को सचेंडी से पकड़ा था। दावा किया था कि वह आईएसआई एजेंट है।
विज्ञापन
उसके पास से कानपुर, झांसी के सैन्य प्रतिष्ठान समेत अन्य संवेदनशील स्थानों के नक्शे और दस्तावेज मिले थे। 24 मार्च को एटीएस ने लखनऊ में प्रेस नोट जारी कर इम्तियाज को 13 साल की कैद और 24 हजार रुपये जुर्माने की सजा की बात कही थी।
विज्ञापन
जेल अधीक्षक का कहना है कि इम्तियाज को धोखाधड़ी (धारा 419) में दो साल, धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी (धारा 468) में चार साल, फर्जी दस्तावेज को सही के रूप में प्रयोग करने (धारा 471) में एक साल और शासकीय गोपनीय अधिनियम की धारा 3/4 में छह साल की सजा सुनाई गई थी।
इसमें जेल में बिताई गई अवधि को समायोजित करने को कहा गया है। सभी धाराओं में सजा एक साथ चलेगी। इसमें छह साल सबसे बड़ी धारा है। इम्तियाज 2009 में जेल में आया था। इस तरह यह सजा पूरी हो गई है।
24 हजार जुर्माना न देने पर छह माह की सजा उसे और भुगतनी होगी। यह सजा कोर्ट के फैसले आने की तिथि से जुड़ेगी। इसलिए छह माह बाद इम्तियाज रिहा हो जाएगा।
वहीं अधिवक्ता शकील अहमद बुंदेला का कहना है कि इस प्रकरण में यह बात लागू नहीं होती है। सीआरपीसी की धारा 31 में मजिस्ट्रेट को अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाने का अधिकार है। इसलिए सजा अलग-अलग यानी कुल 13 साल होगी।