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भारत की भाषायी विविधता का तकनीक से तालमेल जरूरी : डॉ. सर्वेश

Sat, 31 Jan 2026 02:14 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 31 Jan 2026 02:14 AM IST
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India's linguistic diversity needs to be integrated with technology: Dr. Sarvesh
कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विवि में स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज और शिक्षा मंत्रालय की भारतीय भाषा समिति के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। इसका विषय भारतीय भाषा परिवार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता : इक्कीसवीं सदी की चुनौतियां एवं संभावनाएं रहा। स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज के निदेशक डॉ. सर्वेश मणि त्रिपाठी ने कहा कि भारत की भाषायी विविधता उसकी सबसे बड़ी शक्ति है, और तकनीक के साथ इसका तालमेल वर्तमान समय की आवश्यकता है।
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संगोष्ठी में 14 राज्यों से 200 से अधिक शिक्षक और शोधार्थी अपने शोध पत्र प्रस्तुत करने के लिए एकत्रित हुए। रांची विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. जंग बहादुर पांडेय ने भारतीय भाषाओं और संस्कृति को हमारी पहचान बताते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कंप्यूटर ज्ञान को समझना अब अनिवार्य हो गया है। हैदराबाद विवि के प्रो. एस. अरुल्मोजी ने कहा कि एआई भारतीय भाषाओं के लिए चुनौती और अवसर दोनों है, बशर्ते इसका उपयोग भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए किया जाए।
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गढ़वाल केंद्रीय विवि के प्रो. डॉ. राकेश चंद्र रयाल ने भारतीय भाषाओं के संरक्षण के लिए भाषा विशेषज्ञों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। विश्वभारती विश्वविद्यालय शांतिनिकेतन के प्रो. डॉ. निरंजन जेना ने साहित्य को समाज का दर्पण बताते हुए उसके सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला। समापन सत्र में अंग्रेजी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. अंकित त्रिवेदी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
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