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IIT के वैज्ञानिकों ने खोजा नया ग्रह: ब्रह्मांड में मौजूद है सुपर जुपिटर, तारे का लगा रहा चक्कर
Thu, 25 Jul 2024 08:55 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 25 Jul 2024 08:55 PM IST
सार
आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों ने नया ग्रह खोज निकाला है। वैज्ञानिकों के अनुसार ब्रह्मांड में सुपर जुपिटर मौजूद है। जोकि एक तारे का चक्कर लगा रहा है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक ने एक ऐसे ग्रह की खोज की है जो तारे की परिक्रमा कर रहा है। जैसे पृथ्वी सूर्य के चक्कर लगाती है, वैसे ही यह ग्रह तारे का चक्कर लगा रहा है। पृथ्वी से इसकी दूरी 12 प्रकाश वर्ष की है। इसे सुपर जुपिटर ग्रह नाम दिया गया है क्योंकि यह ग्रह हमारे सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह जुपिटर से छह गुना अधिक बड़ा है।
डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस, प्लेनेटरी एंड एस्ट्रोनॉमिकल साइंस एंड इंजीनियरिंग (स्पेस) के खगोलविदों और आईआईटी कानपुर के प्रो. प्रशांत पाठक की टीम ने मिलकर यह खोज की है। इस उपलब्धि को विज्ञान पत्रिका नेचर ने प्रकाशित किया गया है। प्रो. प्रशांत पाठक ने बताया कि सुपर जुपिटर ग्रह तारे की परिक्रमा को 200 साल में पूरा करता है। तारे की अत्यधिक चमक आमतौर पर एक्सोप्लैनेट (दूसरे तारों की परिक्रमा करने वाले ग्रह) की मंद रोशनी का पता लगाने में बाधा डालती है।
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डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस, प्लेनेटरी एंड एस्ट्रोनॉमिकल साइंस एंड इंजीनियरिंग (स्पेस) के खगोलविदों और आईआईटी कानपुर के प्रो. प्रशांत पाठक की टीम ने मिलकर यह खोज की है। इस उपलब्धि को विज्ञान पत्रिका नेचर ने प्रकाशित किया गया है। प्रो. प्रशांत पाठक ने बताया कि सुपर जुपिटर ग्रह तारे की परिक्रमा को 200 साल में पूरा करता है। तारे की अत्यधिक चमक आमतौर पर एक्सोप्लैनेट (दूसरे तारों की परिक्रमा करने वाले ग्रह) की मंद रोशनी का पता लगाने में बाधा डालती है।
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टीम ने इस चमक को ब्लॉक करने के लिए विशेष कैमरे (कोरोनग्राफ से लैस जेडब्ल्यूएसटी के एमआईआरआई कैमरा) का इस्तेमाल किया। इससे एक कृत्रिम ग्रहण बना और इस नए ग्रह की खोज हो सकी। प्रो. पाठक ने बताया कि यह काफी ठंडा ग्रह है और इसका तापमान -1 डिग्री सेल्सियस है। इसकी कक्षा भी बहुत बड़ी है। पृथ्वी और सूर्य के बीच जितनी दूरी है, उससे 28 गुना अधिक दूरी सुपर जुपिटर ग्रह और उस तारे की बीच की है।
इस उपलब्धि से ग्रहों के निर्माण, वायुमंडलीय संरचना और सौर मंडल से परे जीवन की संभावना के बारे में समझ मिली है। उन्होंने बताया कि अब प्रोफेसर इस तारे के बारे में अध्ययन कर रहे हैैं। अभी तक पता चला है कि यह के5वी प्रकार के तारे (जिसे एचडी 209100 के नाम से जाना जाता है) जैसा है। टेलीस्कोप से इसका चित्र भी लिया गया है। आईआईटी के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि यह खोज मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने टीम को बधाई दी है।