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UP: पति खुद से मुकदमा लड़ने के लिए पत्नी को देगा 60000, प्रतिमाह 35000 अंतरिम भरण-पोषण भत्ता देने का निर्देश

Tue, 04 Mar 2025 12:37 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Tue, 04 Mar 2025 12:37 PM IST
सार

Kanpur News: युवती ने आरोप लगाया कि पति जब भी बंगलूरू आता, तो उसके साथ गाली-गलौज, मारपीट, क्रूरता करता था। अगस्त 2023 में जब पत्नी मायके आई तो पति ने उसका सारा सामान निकालकर घर पर कब्जा कर लिया।

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Husband will give 60000 rupees to wife to fight the case order to give interim maintenance allowance of 35000
court room - फोटो : ANI

विस्तार

सिंगापुर में नौकरी करने वाले पति से पत्नी ने भरण-पोषण और मुकदमे लड़ने के लिए खर्च मांगा है। इस पर पारिवारिक न्यायालय के अपर प्रधान न्यायाधीश चतुर्थ ने पति को पत्नी को प्रार्थना पत्र दाखिल करने की तारीख से 20 हजार और बेटे को 15 हजार कुल 35 हजार रुपये प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण भत्ता देने का निर्देश दिया।

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साथ ही विदाई और तलाक के दो मुकदमों को लड़ने के लिए पत्नी को 30-30 हजार रुपये एकमुश्त वाद व्यय देने का निर्देश भी दिया है। किदवईनगर के ब्लॉक निवासी युवक की शादी एक दिसंबर 2009 को घुमनी मोहाल निवासी युवती से हुई थी। शादी के बाद दोनों बंगलूरू रहने लगे। वहां 2015 में एक बेटे का जन्म हुआ। इसी बीच सिंगापुर दस लाख रुपये प्रति माह वेतन पर नौकरी लग गई।

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पत्नी ने 2024 में दाखिल किया था मुकदमा
युवती ने आरोप लगाया कि पति जब भी बंगलूरू आता, तो उसके साथ गाली-गलौज, मारपीट, क्रूरता करता था। अगस्त 2023 में जब पत्नी मायके आई तो पति ने उसका सारा सामान निकालकर घर पर कब्जा कर लिया। तब से वह बेटे के साथ मायके में ही रह रही है। पत्नी ने वर्ष 2024 में भरण-पोषण भत्ते और तलाक के लिए मुकदमा दाखिल किया।

हर पेशी के लिए दो हजार रुपये दिए जाने की मांग रखी
इसमें अपने लिए तीन लाख और बेटे के लिए दो लाख रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण भत्ता देने की मांग की। साथ ही वाद व्यय के लिए एक लाख रुपये एकमुश्त और हर पेशी के लिए दो हजार रुपये दिए जाने की मांग भी रखी। वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप शुक्ला ने बताया कि पति ने विदाई का मुकदमा दाखिल किया। साथ ही पत्नी के मुकदमों में जवाब में कहा कि सिंगापुर महंगा शहर है।

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अंतरिम भरण-पोषण की जरूरत नहीं
उसने बंगलूरू में चार फ्लैट ले रखे हैं, जिनके ऋण की अदायगी के लिए किस्त जाती है। वह सिर्फ एक लाख रुपये प्रतिमाह ही बचा पता है। जनवरी 2025 में उसकी नौकरी भी चली गई। पत्नी और बेटे के बैंक खातों में कई लाख रुपये जमा हैं। पत्नी पढ़ी-लिखी है, इसलिए उसे अंतरिम भरण-पोषण की जरूरत नहीं है।

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