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कैसे मिले इलाज : जिले के 40 सीएचसी-पीएचसी में डॉक्टरों के 125 पद खाली
Sun, 01 Dec 2024 12:08 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Sun, 01 Dec 2024 12:08 AM IST
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कानपुर देहात। जिले के 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और 28 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में कुल 221 डॉक्टरों की तैनाती होनी चाहिए, लेकिन केवल 88 डॉक्टर ही तैनात हैं, जबकि 125 पद खाली पड़े हैं। डॉक्टरों की इतनी कमी होने से 1:1000 (डॉक्टर और जनसंख्या का अनुपात) का मानक पूरा नहीं हो पा रहा है। विभाग ने खाली पदों को भरने के लिए शासन से पत्राचार किया है।
जानकार बताते हैं कि सरकारी मानक के अनुसार 30-50 हजार की आबादी के बीच एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और 80 हजार से 1.20 लाख की आबादी के बीच एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बनाया जाता है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि इसी मानक पर जिले में कुल 40 पीएचसी और सीएचसी का संचालन किया जा रहा है।
इन 40 स्वास्थ्य केंद्रों को चलाने के लिए 154 फिजिशियन और 67 विशेषज्ञ डॉक्टर मिलाकर कुल 221 डॉक्टर होने चाहिए, जबकि सीएमओ, एसीएमओ और डिप्टी सीएमओ सहित 88 फिजिशियन ही तैनात हैं। इनमें विशेषज्ञ डॉक्टरों की भी बेहद कमी है। इन केंद्रों में 67 विशेषज्ञ डॉक्टर होने चाहिए, लेकिन केवल आठ तैनात हैं, जबकि फिजीशियन के 66 पद खाली हैं।
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जानकार बताते हैं कि डॉक्टरों की इतनी कमी होने की वजह से सरकारी स्वास्थ्य सेवा ठीक से नहीं चल पा रही है। डॉक्टरों को इमरजेंसी से लेकर ओपीडी में ड्यूटी करने में परेशानी होती है। वहीं, मरीज इलाज के लिए भटकते हैं। फिजीशियन की कमी को पूरा करने के लिए विभाग आयुष डॉक्टरों का इस्तेमाल करता है, लेकिन गंभीर बीमारियों का इलाज यह डॉक्टर नहीं कर पाते हैं। हालत यह है कि सीएचसी-पीएचसी से लेकर जिला अस्पताल तक से मरीज आसपास के बड़े अस्पतालों में हर रोज रेफर किए जा रहे हैं।
बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार एक हजार लोगों पर एक डॉक्टर होना चाहिए। ऐसा होने पर ही सभी को इलाज सुलभ हो पाता है। हालांकि, केंद्र सरकार का दावा है कि देश में डॉक्टरों की कमी नहीं है। सभी पंजीकृत डॉक्टरों के आधार पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 29 नवंबर को लोकसभा में दावा किया कि देश में डॉक्टर जनसंख्या अनुपात 1:811 है।
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1800 की आबादी पर होना चाहिए एक डॉक्टर
डब्ल्यूएचओ के मानक के अनुसार 1800 की आबादी के बीच एक फिजिशियन होना चाहिए। हालांकि यह जरूरी नहीं कि सरकारी डाॅक्टर ही हो, इसमें निजी डॉक्टर भी आते हैं।
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ई-संजीवनी के माध्यम से पूरी की जा रही कमी
प्रदेश में डॉक्टरों की कमी को देखते हुए सरकार की ओर से ई-संजीवनी कार्यक्रम चलाया जा रहा है। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं गांव स्तर पर ही मिलें, इसके लिए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खोले गए हैं। इनमें तैनात सीएचओ ई-संजीवनी पोर्टल के माध्यम से वीडियो कॉल पर डॉक्टरों से परामर्श लेकर मरीज को दवा उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है। साथ ही विभाग एक ही छत के नीचे बेहतर सुविधा देने का दवा कर रहा है। हालांकि इस व्यवस्था में तमाम कमियां हैं। यही वजह है कि मरीजों को यहां वहां भटकना पड़ता है।
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मेडिकल कॉलेज में फिजिशियन पर्याप्त, विशेषज्ञ कम
मेडिकल कॉलेज में फिजिशियन की कमी नहीं है। हालांकि इसमें जूनियर रेजिडेंट भी शामिल हैं, जबकि पल्मोनरी मेडिसिन, ईएनटी में अभी तक किसी डॉक्टर ने ज्वाइन नहीं किया है।
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वर्जन....
डब्ल्यूएचओ के मानक पर सरकारी व निजी डाॅक्टर दोनों ही आते हैं। कितनी आबादी पर कितने डॉक्टर होने चाहिए, इस बारे में कोई रिपोर्ट नहीं बनाई गई। हेल्थ वेलनेस सेंटर, सीएचसी व पीएचसी बनाए जाने के लिए आबादी निर्धारित है। उसी आधार पर स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं। जिन डॉक्टरों की कमी है, उनके लिए लगातार पत्राचार किया जा रहा है। - डॉ. एके सिंह, सीएमओ
फोटो-01 रनियां पीएचसी में बच्चे का पल्स मापते डॉक्टर। संवाद
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जानकार बताते हैं कि सरकारी मानक के अनुसार 30-50 हजार की आबादी के बीच एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और 80 हजार से 1.20 लाख की आबादी के बीच एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बनाया जाता है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि इसी मानक पर जिले में कुल 40 पीएचसी और सीएचसी का संचालन किया जा रहा है।
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इन 40 स्वास्थ्य केंद्रों को चलाने के लिए 154 फिजिशियन और 67 विशेषज्ञ डॉक्टर मिलाकर कुल 221 डॉक्टर होने चाहिए, जबकि सीएमओ, एसीएमओ और डिप्टी सीएमओ सहित 88 फिजिशियन ही तैनात हैं। इनमें विशेषज्ञ डॉक्टरों की भी बेहद कमी है। इन केंद्रों में 67 विशेषज्ञ डॉक्टर होने चाहिए, लेकिन केवल आठ तैनात हैं, जबकि फिजीशियन के 66 पद खाली हैं।
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जानकार बताते हैं कि डॉक्टरों की इतनी कमी होने की वजह से सरकारी स्वास्थ्य सेवा ठीक से नहीं चल पा रही है। डॉक्टरों को इमरजेंसी से लेकर ओपीडी में ड्यूटी करने में परेशानी होती है। वहीं, मरीज इलाज के लिए भटकते हैं। फिजीशियन की कमी को पूरा करने के लिए विभाग आयुष डॉक्टरों का इस्तेमाल करता है, लेकिन गंभीर बीमारियों का इलाज यह डॉक्टर नहीं कर पाते हैं। हालत यह है कि सीएचसी-पीएचसी से लेकर जिला अस्पताल तक से मरीज आसपास के बड़े अस्पतालों में हर रोज रेफर किए जा रहे हैं।
बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार एक हजार लोगों पर एक डॉक्टर होना चाहिए। ऐसा होने पर ही सभी को इलाज सुलभ हो पाता है। हालांकि, केंद्र सरकार का दावा है कि देश में डॉक्टरों की कमी नहीं है। सभी पंजीकृत डॉक्टरों के आधार पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 29 नवंबर को लोकसभा में दावा किया कि देश में डॉक्टर जनसंख्या अनुपात 1:811 है।
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1800 की आबादी पर होना चाहिए एक डॉक्टर
डब्ल्यूएचओ के मानक के अनुसार 1800 की आबादी के बीच एक फिजिशियन होना चाहिए। हालांकि यह जरूरी नहीं कि सरकारी डाॅक्टर ही हो, इसमें निजी डॉक्टर भी आते हैं।
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ई-संजीवनी के माध्यम से पूरी की जा रही कमी
प्रदेश में डॉक्टरों की कमी को देखते हुए सरकार की ओर से ई-संजीवनी कार्यक्रम चलाया जा रहा है। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं गांव स्तर पर ही मिलें, इसके लिए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खोले गए हैं। इनमें तैनात सीएचओ ई-संजीवनी पोर्टल के माध्यम से वीडियो कॉल पर डॉक्टरों से परामर्श लेकर मरीज को दवा उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है। साथ ही विभाग एक ही छत के नीचे बेहतर सुविधा देने का दवा कर रहा है। हालांकि इस व्यवस्था में तमाम कमियां हैं। यही वजह है कि मरीजों को यहां वहां भटकना पड़ता है।
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मेडिकल कॉलेज में फिजिशियन पर्याप्त, विशेषज्ञ कम
मेडिकल कॉलेज में फिजिशियन की कमी नहीं है। हालांकि इसमें जूनियर रेजिडेंट भी शामिल हैं, जबकि पल्मोनरी मेडिसिन, ईएनटी में अभी तक किसी डॉक्टर ने ज्वाइन नहीं किया है।
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वर्जन....
डब्ल्यूएचओ के मानक पर सरकारी व निजी डाॅक्टर दोनों ही आते हैं। कितनी आबादी पर कितने डॉक्टर होने चाहिए, इस बारे में कोई रिपोर्ट नहीं बनाई गई। हेल्थ वेलनेस सेंटर, सीएचसी व पीएचसी बनाए जाने के लिए आबादी निर्धारित है। उसी आधार पर स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं। जिन डॉक्टरों की कमी है, उनके लिए लगातार पत्राचार किया जा रहा है। - डॉ. एके सिंह, सीएमओ
फोटो-01 रनियां पीएचसी में बच्चे का पल्स मापते डॉक्टर। संवाद