Hardoi: साढ़े पांच साल दबी रही फाइल, मंत्री को पता चला तो हुई बर्खास्तगी, ऑपरेटर की लड़ाई लाई रंग, पढ़ें मामला
Hardoi News: हरदोई के पूर्व समाज कल्याण अधिकारी हर्ष मवार भ्रष्टाचार के मामले में बर्खास्त कर दिए गए हैं। उनकी पत्रावली चार साल से दबी थी, जिसे मंत्री असीम अरुण ने कार्रवाई तक पहुंचाया है।
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विस्तार
हरदोई जिले में अनियमितताओं के मामले में तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी हर्ष मवार को बर्खास्त कर दिया गया है। खास बात यह है कि अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद भी लंबे समय तक हर्ष मवार अलग-अलग जिलों में तैनाती पाते रहे। दरअसल अनियमितताओं की पुष्टि होने और कार्रवाई की संस्तुति से जुड़ी पत्रावली विभागीय सांठ-गांठ के चलते दबी रही। इसकी जानकारी समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण को हुई तब बर्खास्तगी हुई।
कछौना में राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय संचालित है। वर्ष 2017-18 से जुलाई 2019 तक के लिए सेवा प्रदाता एजेंसी के माध्यम से कर्मचारियों की तैनाती की गई थी। इसी बीच वर्ष 2019 में ही तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी हर्ष मवार ने सेवा प्रदाता कंपनी के कार्मिकों के भुगतान में कटौती करने के साथ ही कार्यरत कर्मियों की संख्या में फेरबदल कर दिया था। आउट सोर्सिंग कंपनी के चयन में भी मनमानी की गई थी।
अधिकारी ने कोटेशन के आधार पर फर्म का चयन कर दिया था
पूरे मामले की शिकायत पार्ट टाइम पर कंप्यूटर ऑपरेटर रहे प्रशांत शुक्ला ने तत्कालीन जिलाधिकारी अविनाश कुमार से की थी। इस पर जिलाधिकारी ने तत्कालीन वरिष्ठ कोषाधिकारी अतिरिक्त मजिस्ट्रेट से जांच कराई। इसमें सेवा प्रदाता फर्म के चयन की पूरी प्रक्रिया को ही गलत पाया गया। दरअसल फर्म का चयन निविदा प्रक्रिया के आधार पर होना था, लेकिन तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी ने कोटेशन के आधार पर फर्म का चयन कर दिया था।
मामला मंत्री तक पहुंचने के बाद बर्खास्तगी की कार्रवाई
22 अक्तूबर 2020 को तत्कालीन जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने हर्ष मवार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति करते हुए समाज कल्याण विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव को पत्र भेजा था। तब से यह पत्रावली शासन में दबी थी। इसी बीच मामले की जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण को हुई। असीम अरुण हरदोई के प्रभारी मंत्री भी हैं। मामला उन तक पहुंचने के बाद बर्खास्तगी की कार्रवाई हुई।
आगाज से अंजाम तक पहुंचाने में सफल रहा युवा, धमकी से डरा न प्रलोभन में आया
जनपद में तैनात रहे हर्ष मवार के कारनामों की पोल कछौना के तुलसी मार्केट निवासी प्रशांत शुक्ला ने सबसे पहले 15 मई 2020 को खोली थी। प्रशांत ने तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी की कारगुजारी का काला चिट्ठा तत्कालीन जिलाधिकारी अविनाश कुमार के सामने रखा था। अविनाश कुमार ने पूरे मामले की जांच कराई तो शिकायत सही मिली। इस पर उन्होंने समाज कल्याण विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव को पत्र भेजकर कार्रवाई की संस्तुति कर दी थी। इसके बाद हर्ष मवार अपने रसूख और पहुंच के कारण पत्रावली दबाने में कामयाब रहे। इस बीच प्रशांत शुक्ला को किसी न किसी माध्यम से धमकी भी दी गई और प्रलोभन भी। प्रशांत न तो किसी के दबाव में आया और न ही प्रलोभन में। कुछ माह पहले उसने पूरे मामले की जानकारी समाज कल्याण मंत्री को दी थी। इसके बाद हर्ष मवार की बर्खास्तगी की गई।
कब क्या हुआ
- 15 मई 2020 को प्रशांत शुक्ला ने शिकायत की।
- कार्रवाई न होने पर फिर से 30 जून 2020 को जिलाधिकारी से शिकायत की।
- जिलाधिकारी ने सात जुलाई को जांच के आदेश जिला विकास अधिकारी को दिए।
- सात जुलाई 2020 को ही अतिरिक्त मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ कोषाधिकारी की जांच टीम बनी।
- 10 सितंबर 2020 को जांच टीम ने रिपोर्ट जिलाधिकारी और डीडीओ को दी।
- 22 अक्तूबर 2020 को तत्कालीन जिलाधिकारी ने कार्रवाई की संस्तुति शासन से की।
- 18 जुलाई 2022 को मुख्यमंत्री से पूरे मामले की शिकायत हुई।
- 12 अक्तूबर 2022 को फिर से मुख्यमंत्री से शिकायत की गई।
यह मिली थी गड़बड़ी
- सेवा प्रदाता फर्म के चयन को गठित नहीं हुई थी निविदा समिति।
- पत्रावली में निविदा प्रपत्र की बिक्री दर्शाई गई थी लेकिन इसका मूल्य तारीख आदि का ब्योरा नहीं था।
- पत्रावली में धरोहर राशि का भी कोई विवरण नहीं था।
- वित्तीय और तकनीकी शर्तों को पूरे करने वाली फर्मों का कोई ब्योरा नहीं था।
- कोटेशन के आधार पर मेसर्स लेपर्ड सिक्योरिटी सर्विसेज रावतपुर कानपुर को चयनित कर लिया गया था।