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बरौनी-ग्वालियर मेल में 28 बच्चे मिलने से रेलवे प्रशासन में मचा हड़कंप, डीआईजी ने बच्चों से की पूछताछ
Tue, 25 Jun 2019 10:58 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
यूपी डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 25 Jun 2019 10:58 PM IST
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बरौनी ग्वालियर मेल से उतारे गए 28 बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
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बरौनी ग्वालियर मेल में सोमवार को मौलवी के साथ पाए गए 28 बच्चों से मंगलवार केे रेलवे डीआईजी और सीओ ने पूछताछ की। उन्होंने बच्चों के माता-पिता से भी फोन पर बात कर हकीकत जानी। उन्होंने बच्चों के परिजनों से जल्द उन्नाव पहुंचने को कहा है।
डीआईजी ने बताया कि अभी तक कि जांच में बच्चे मौलवी के साथ पढ़ने के लिए आवासीय मदरसा जाने की बात सामने आई है। बिहार के एक गांव निवासी मौलवी सोमवार को गांव के ही 28 बच्चों को दोपहर 2 बजे ग्वालियर-बरौनी मेल के एस 9 डिब्बे में बिठाकर बांदा के कलिंजर ले जा रहा था। शक होने पर यात्रियों ने सौ नंबर पर सूचना दी थी।
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डीआईजी ने बताया कि अभी तक कि जांच में बच्चे मौलवी के साथ पढ़ने के लिए आवासीय मदरसा जाने की बात सामने आई है। बिहार के एक गांव निवासी मौलवी सोमवार को गांव के ही 28 बच्चों को दोपहर 2 बजे ग्वालियर-बरौनी मेल के एस 9 डिब्बे में बिठाकर बांदा के कलिंजर ले जा रहा था। शक होने पर यात्रियों ने सौ नंबर पर सूचना दी थी।
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बच्चों को साथ ले जाने वाला मौलवी
- फोटो : अमर उजाला
उन्नाव जंक्शन पर जीआरपी को 28 बच्चों को डिब्बे से उतारा था। पूछताछ में बच्चों ने कानपुर के मदरसा व मौलवी के बांदा के कलिंजर मदरसा में दाखिला कराने की बात कही थी। एक साथ 28 बच्चे कलिंजर ले जाने का मुद्दा शासन तक पहुंचा तो मंगलवार को डीआईजी दिनेश प्रताप सिंह व सीओ कृष्ण कुमार शुक्ला सुबह करीब 11:45 बजे थाने पहुंचे।
डीआईजी को मौलवी ने बताया कि बांदा के कलिंजर के एक मदरसे में उसे नौकरी मिली थी। मदरसे के मौलवी ने बच्चों का प्रवेश कराने की बात कही थी। वहीं इन बच्चों को ले जा रहा था। डीआईजी शाम करीब 4:20 तक थाने में रुके उसके बाद लखनऊ रवाना हो गए। जबकि सीओ शाम 6 बजे थाने से निकले। डीआईजी दिनेश प्रताप सिंह ने बताया कि अभी तक की जांच में कोई संदिग्धता नहीं नजर आई है।
मौलवी बच्चों को पढ़ाने ही ले जा रहा था। परिजनों ने भी इसे स्वीकार किया है। परिजनों को बुलाया गया है। उनके आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी। मौलवी व बच्चों से पूछताछ के बाद जीआरपी व चाइल्ड लाइन परिजनों का इंतजार कर रही है। परिजन यदि कोई शिकायत करते हैं तो एक टीम बिहार के थाना अकरिया के गांव बिसरवां मोहलगांव जांच करने जा सकती है। वहीं देर शाम कलिंजर मदरसा के भी लोग जीआरपी थाने पहुंचे। जीआरपी ने उनसे भी जानकारी ली है।
डीआईजी को मौलवी ने बताया कि बांदा के कलिंजर के एक मदरसे में उसे नौकरी मिली थी। मदरसे के मौलवी ने बच्चों का प्रवेश कराने की बात कही थी। वहीं इन बच्चों को ले जा रहा था। डीआईजी शाम करीब 4:20 तक थाने में रुके उसके बाद लखनऊ रवाना हो गए। जबकि सीओ शाम 6 बजे थाने से निकले। डीआईजी दिनेश प्रताप सिंह ने बताया कि अभी तक की जांच में कोई संदिग्धता नहीं नजर आई है।
मौलवी बच्चों को पढ़ाने ही ले जा रहा था। परिजनों ने भी इसे स्वीकार किया है। परिजनों को बुलाया गया है। उनके आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी। मौलवी व बच्चों से पूछताछ के बाद जीआरपी व चाइल्ड लाइन परिजनों का इंतजार कर रही है। परिजन यदि कोई शिकायत करते हैं तो एक टीम बिहार के थाना अकरिया के गांव बिसरवां मोहलगांव जांच करने जा सकती है। वहीं देर शाम कलिंजर मदरसा के भी लोग जीआरपी थाने पहुंचे। जीआरपी ने उनसे भी जानकारी ली है।