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केडीए में 72 करोड़ का खेल पकड़ा, 12 पर गिरी गाज
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 04 Oct 2018 11:25 AM IST
सार
- जमीन लिए बिना ही 72 करोड़ मुआवजा दिलाने का षड्यंत्र रचा
- पांच निलंबित, सात के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू
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विस्तार
ऊपरी कमाई के चक्कर में तरह-तरह के खेल में जुटे केडीए के अधिकारियों-कर्मचारियों का नया कारनामा सामने आया है। कानपुर के इंदिरा नगर स्थित जमीन लिए बिना ही इसके मालिक से मिलीभगत कर केडीए के 12 कर्मचारियों-अभियंताओं ने 72 करोड़ रुपये का मुआवजा दिलाने का षड्यंत्र रचा।
इसके लिए इन कर्मचारियों-अभियंताओं ने केडीए की ओर से जमीन लिए जाने का शपथपत्र भी कोर्ट में जमा कर दिया। कोर्ट ने इसके आधार पर केडीए को मुआवजा देने का आदेश कर दिया।
केडीए वीसी किंजल सिंह ने जमीन लिए जाने और मौके की स्थिति की जांच कराई तो मामले का खुलासा हुआ। पांच कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। सात के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू हो गई है।
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इसके लिए इन कर्मचारियों-अभियंताओं ने केडीए की ओर से जमीन लिए जाने का शपथपत्र भी कोर्ट में जमा कर दिया। कोर्ट ने इसके आधार पर केडीए को मुआवजा देने का आदेश कर दिया।
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केडीए वीसी किंजल सिंह ने जमीन लिए जाने और मौके की स्थिति की जांच कराई तो मामले का खुलासा हुआ। पांच कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। सात के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू हो गई है।
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केडीए सचिव केपी सिंह ने बताया कि प्राधिकरण ने गांव बैरी अकबरपुर बांगर की जमीन पर इंदिरा नगर योजना का विकास किया था। आराजी संख्या-1098 की 5838.76 वर्ग मीटर जमीन का अधिग्रहण केडीए ने नहीं किया था लेकिन 2010 में मालिक रमेश चंद्र गुप्ता आदि ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर जमीन पर सड़क बनाने की एवज में केडीए से मुआवजा दिलाने की मांग की।
2014 में केडीए के अमीन अंकुर पाल और तहसीलदार किशोर गुप्ता ने केडीए के वीसी को गलत आख्या दी कि इस जमीन का इस्तेमाल इंदिरा नगर-मकड़ीखेड़ा रोड में कर लिया गया है। बाद में तहसीलदार बीएल पाल ने हाईकोर्ट में शपथपत्र भी दिया कि प्राधिकरण ने इस जमीन का इस्तेमाल कर लिया है।
इस आधार पर हाईकोर्ट ने संबंधित पक्ष को मुआवजा देने का आदेश जारी कर दिया लेकिन केडीए ने 14 सितंबर को जांच कराई तो पता चला कि केडीए ने यहां कोई सड़क नहीं बनाई है। विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से 72 करोड़ का मुआवजा हड़पने का खेल रचा गया है।
2014 में केडीए के अमीन अंकुर पाल और तहसीलदार किशोर गुप्ता ने केडीए के वीसी को गलत आख्या दी कि इस जमीन का इस्तेमाल इंदिरा नगर-मकड़ीखेड़ा रोड में कर लिया गया है। बाद में तहसीलदार बीएल पाल ने हाईकोर्ट में शपथपत्र भी दिया कि प्राधिकरण ने इस जमीन का इस्तेमाल कर लिया है।
इस आधार पर हाईकोर्ट ने संबंधित पक्ष को मुआवजा देने का आदेश जारी कर दिया लेकिन केडीए ने 14 सितंबर को जांच कराई तो पता चला कि केडीए ने यहां कोई सड़क नहीं बनाई है। विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से 72 करोड़ का मुआवजा हड़पने का खेल रचा गया है।