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Kanpur News: भावों की भाषा सिखाएगा फेसट्रेन, ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों को भाव पहचानने में मिलेगी मदद

Mon, 26 Oct 2026 02:48 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 26 Oct 2026 02:48 AM IST
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FaceTrain will teach the language of emotions, helping children affected by autism recognize expressions
कानपुर। ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों को दूसरों के चेहरे के भाव पहचानने और सामाजिक संवाद में सहज बनाने के लिए आईआईटी के शोधकर्ताओं ने फेशियल इफेक्ट क्लासिफिकेशन एंड इवोल्यूशन ट्रेनिंग (फेसट्रेन) नाम का मोबाइल एप विकसित किया है। इससे बच्चों को खुशी, गुस्सा और अन्य भावों को पहचानने का अभ्यास कराया जाएगा। पांच से आठ साल के शोध और परीक्षण के बाद तैयार इस एप का कानपुर और लखनऊ में बच्चों पर क्लीनिकल परीक्षण किया गया है। पेटेंट और कॉपीराइट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे क्यूट ब्रेन्स स्टार्टअप के माध्यम से प्लेस्टोर पर उपलब्ध कराने की तैयारी है।
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आईआईटी के उप निदेशक प्रो. बृजभूषण के निर्देशन में विकसित इस एप के मुख्य शोधकर्ता शोधार्थी रिषभ पांडेय हैं। उन्होंने बताया कि इसमें भारतीय चेहरों के 399 अलग-अलग भावों का डाटा शामिल किया गया है। चेहरों को सामने, दाएं और बाएं कोण से रिकॉर्ड किया गया है। खुशी और गुस्से जैसे भावों की अलग-अलग तीव्रता को भी डाटा में शामिल किया गया है। ऑटिज्म से प्रभावित कई बच्चों को दूसरों के चेहरे पर ध्यान देने और उनके भाव समझने में कठिनाई होती है। एप का उद्देश्य इस क्षमता को अभ्यास के जरिये विकसित करना है।
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पहले कार्टून, फिर असली चेहरे

एप में शुरुआत में बच्चों को भाव दर्शाने वाले कार्टून चेहरे दिखाए जाते हैं। गणितीय मॉडल की मदद से चेहरे के उस हिस्से को उभारकर दिखाया जाता है, जहां से संबंधित भाव अधिक स्पष्ट होता है। इससे बच्चे का ध्यान उस हिस्से पर केंद्रित होता है और वह भाव पहचानना सीखता है। करीब 15 से 20 बार अभ्यास के बाद बच्चों को सामान्य चेहरों के भाव पहचानने की ओर बढ़ाया जाता है। शोध टीम के अनुसार कानपुर और लखनऊ में छह से 24 वर्ष के करीब 28 से 32 बच्चों व युवाओं पर क्लीनिकल परीक्षण किया गया। इसमें भाव पहचानने और संवाद करने की क्षमता में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला।
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अभिभावकों को मिलेगी प्रगति की जानकारी

एप में बच्चों के अभ्यास और प्रदर्शन का रिकॉर्ड रखा जाएगा। हर छह महीने में प्रगति रिपोर्ट तैयार होगी जिसे अभिभावक और शिक्षक देख सकेंगे। इससे बच्चों की भाव पहचानने की क्षमता का आकलन करने और आगे के अभ्यास की जरूरत समझने में मदद मिलेगी।
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