फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Extrapulmonary TB attacks, 27% increase in patients

Kanpur News: एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी का हमला, 27% बढ़े रोगी

Sun, 07 Jun 2026 01:32 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 07 Jun 2026 01:32 AM IST
विज्ञापन
Extrapulmonary TB attacks, 27% increase in patients
कानपुर। शहर में टीबी (क्षयरोग) का स्वरूप बदल रहा है। अब यह केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं रही बल्कि, शरीर के अन्य अंगों हड्डी, पेट और दिमाग तक पर हमला कर रही है।
विज्ञापन

लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता घटने के कारण एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पिछले तीन वर्षों में रोगियों में 27 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए गए सौ दिन के अभियान में रोगियों का बढ़ा हुआ आंकड़ा सामने आया है।
विज्ञापन


आमतौर पर टीबी को फेफड़ों की बीमारी माना जाता है, लेकिन जब टीबी के बैक्टीरिया खून या लिम्फ के जरिए शरीर के अन्य हिस्सों जैसे हड्डियों, पेट, दिमाग या किडनी तक पहुंच जाते हैं, तो इसे एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी कहा जाता है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पिछले तीन सालों में टीबी रोगियों के अलावा एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी के रोगियों की संख्या बढ़ी है। 2023 में टीबी के 15374 (एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी-6688), 2024 में 16174 (7440) 2025 में 17027(8498) रोगी मिले हैं। विभाग की ओर से चलाए गए अभियान में पता चला कि रोगी को टीबी थी, इलाज कराया और ठीक हो गया, लेकिन उसके बाद भी बुखार आता रहा। जांच में फेफड़ों में टीबी नहीं निकली। दोबारा जांच कराने पर किसी के रीढ़ में तो किसी के लिम्फ नोड (गले की गांठ) में टीबी पाई गई। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुबोध प्रकाश ने बताया कि टीबी रोगियों को चिह्नित करने में हम आगे हैं। हमने 100 दिन चलाए गए सर्वे में लक्ष्य प्राप्त किया और रोगियों की जांचकर इलाज शुरू कराया।
विज्ञापन
विज्ञापन


जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के चेस्ट रोग विभाग के डॉ. संजय कुमार के अनुसार, खराब जीवनशैली, प्रदूषण और कुपोषण की वजह से लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है, जिससे बैक्टीरिया फेफड़ों से बाहर निकलने में सफल हो जाते हैं। कानपुर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में संक्रमण का प्रसार तेजी से होता है। सबसे ज्यादा मामले लिम्फ नोड (गले की गांठ) की टीबी के आ रहे हैं। इसके बाद हड्डियों (खासकर रीढ़ की हड्डी) और पेट की टीबी के मामले देखे जा रहे हैं। महिलाओं में इनफर्टिलिटी (बांझपन) का एक बड़ा कारण गर्भाशय की टीबी बन रहा है।


लक्षण दिखें तो तुरंत कराएं जांच

= शरीर के किसी हिस्से (जैसे गर्दन) में गांठ होना।

= हड्डियों या जोड़ों में लंबे समय से दर्द।

= शाम के समय हल्का बुखार और वजन का लगातार गिरना।

= पेट में सूजन या पाचन संबंधी पुरानी समस्या।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed