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नहीं रहे डॉ. गौर हरि सिंघानिया

Thu, 05 Feb 2015 03:33 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर Updated Thu, 05 Feb 2015 03:33 AM IST
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Dr. Gaur Hari Singhania no more
जेके ऑर्गनाइजेशन के चेयरमैन डॉ. गौर हरि सिंघानिया (गौर बाबू) का बुधवार को सुबह लगभग 8.30 बजे हृदयगति रुक जाने से देहावसान हो गया। वे 80 वर्ष के थे।
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उनके निधन की जानकारी तब हुई जब डॉक्टर रुटीन चेकअप करने के लिए आए। निधन की जानकारी मिलते ही परिवार और शहर में शोक की लहर दौड़ गई।

उनके घर कैंट स्थित गंगा कुटी पर अंतिम प्रणाम करने वालों का तांता लग गया। दिल्ली और मुंबई से भी परिवार के लोग आ गए। शहर के उद्योगपति, समाजसेवी, विभिन्न संस्थाओं से जुड़े लोग, एयरफोर्स अफसर सहित हजारों आम और खास लोगों ने उन्हें घर और घाट पहुंचकर श्रद्धांजलि दी।

भगवतदास घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। पुत्र यदुपति सिंघानिया ने उन्हें मुखाग्नि दी। परिजनों ने बताया कि गौर बाबू मंगलवार रात रोज की तरह नियमित समय पर सोए थे।
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रात में उन्हें उल्टियां हुईं तो परिजनों ने समझा कि सर्दी लग गई होगी। उन्हें अतिरिक्त कंबल आदि देकर सुला दिया गया। सुबह करीब सात बजे वे उठे और फिर लेट गए।
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इसके बाद नियमित चेकअप के लिए डॉक्टर आए तो पता चला कि गौर बाबू नहीं रहे। फिर अन्य परिजनों और नाते-रिश्तेदारों को सूचना दी गई। थोड़ी ही देर में शहर में जंगल की आग की तरह खबर फैल गई।

उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों की भीड़ उमड़ने लगी।  गौर बाबू के बंगले के विशाल गॉर्डन में लगे बांस से ही उनकी अर्थी बनाई गई और गॉर्डन में लगे फूलों से ही सजाया गया।

दोपहर लगभग 1.30 बजे फूलों से सजे वाहन से गौर बाबू की अंतिम यात्रा गंगा कुटी से निकली जो कैंट से फूलबाग होते हुए भगवत दास घाट पहुंची। सैकड़ों वाहनों के साथ अंतिम यात्रा भगवत दास घाट पहुंची।


शव यात्रा के आगे कानपुर पुलिस की एक गाड़ी चल रही थी। रास्ते में कई जगह ट्रैफिक पुलिस लगाकर यातायात रोका गया। भगवत दास घाट पहुंचते ही जेके संस्थान के सिक्योरिटी अधिकारियों ने उन्हें गार्ड आफ ऑनर दिया।

इसके बाद लोगों ने पुष्प चढ़ाकर उनके अंतिम दर्शन किए। अंतिम संस्कार उनके पुत्र यदुपति सिंघानिया ने किया।
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