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जंगली जानवरों जैसी हरकतें करती है ये लड़की
टीम डिजिटल/अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 08 Sep 2016 05:30 PM IST
सार
दो महीने पहले पागल कुत्ते ने काटा था
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कुतर-कुतर कर फल खाती अस्पताल में भर्ती वर्षा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ग्यारह साल की वर्षा दो दिनों से जंगली जानवरों जैसी हरकतें कर रही है। वह फलों को कुतर-कुतरकर खाती है, पानी देखते ही जोर-जोर से चिल्लाने लगती है। तेज रोशनी देखते ही पलंग के नीचे घुस जाती है और रात में सोते समय अजीबोगरीब आवाजें निकालती है। उसकी इस हालत से परेशान परिवारवालों ने डॉक्टरों से गुजारिश कर उसकी जान बचाने की गुहार लगाई है।
जालौन के जाखा निवासी महेंद्र की बेटी वर्षा (11) को दो महीने पहले एक पागल कुत्ते ने काट लिया था। उस समय घर वालों ने उसका इलाज नहीं कराया। बुधवार शाम को वर्षा पानी पीने जा रही थी अचानक चीखने लगी। घर वाले कुछ समझ भी नहीं पाये और वह जमीन पर गिर गई। जालौन में डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने संक्रामक रोग अस्पताल (आईडीएच) भेज दिया।
डॉक्टरों के मुताबिक ऐसे लक्षणों को हाइड्रोफोबिया कहते हैं। शरीर में रैबीज का इंफेक्शन हो जाने से यह स्थिति आती है। फिलहाल उसका विशेष इलाज अस्पताल में शुरू कर दिया गया है।
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पापा इंजेक्शन लगवा दो
आईडीएच सेंटर में भर्ती वर्षा को अपनी बीमारी का एहसास हो गया है लेकिन घर वालों को तसल्ली देने के लिए वह बार-बार टिटनस का इंजेक्शन लगवाने की बात कह रही है। उसने अपने पिता से कहा कि टिटनस का इंजेक्शन लगवा दो, मैं ठीक हो जाऊंगी।
जानवर काटे तो कर लें पहचान
- जानवर काटे तो उसकी पहचान जरूर करनी चाहिए। यदि कोई जानवर कई लोगों को काट रहा है तो यह तय है कि वह रैबीज के संक्रमण के कारण पागल हो चुका है।
- यदि कोई जानवर अचानक किसी एक पर हमला करे तो उसे रैबीज संक्रमित नहीं कहा जा सकता है लेकिन ऐसे जानवरों पर कम से कम दस दिन नजर रखनी होती है। यदि नजर नहीं रख सकते तो बचाव के लिए एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवा लेना चाहिए।
यह होता है लक्षण
पागल जानवर के काटने के दस दिन बाद से ही कमजोरी, बुखार, शरीर में अकड़न, मांसपेशियों में दर्द, बेचैनी, पानी से नफरत, हवा से दिक्कत, गर्मी से दिक्कत होने लगती है। ऐसे मरीजों को तत्काल सीरम लगाया जाना चाहिए।
यह होता है डोज
एआरवी वैक्सीन पागल जानवर के काटने के तत्काल बाद लगना चाहिए। इसके बाद तीसरे, सातवें, चौदहवें और 28वें दिन इंजेक्शन लगना चाहिए। यदि सामान्य जानवर भी है तो बचाव के लिए कम से कम तीन इंजेक्शन तो लगवाना ही चाहिए। पीएचसी, सीएचसी और जिला अस्पताल में यह इंजेक्शन फ्री लगता है।
आदमखोर जानवर की तरह हरकत करता है इंसान
एआरवी न लगवाने या आधा-अधूरा डोज लगवाने वाले कई लोगों को 15 दिन में लक्षण दिखने लगते हैं तो कई को कुछ साल बाद लक्षण दिखते हैं। यदि शरीर में रैबीज फैल गया तो आदमी आदमखोर जानवर की तरह व्यवहार करने लगता है। ऐसे ज्यादातर मामलों में मरीज की मौत हो ही जाती है।
जानवर काटें तो यह करें
- तत्काल काटने वाली जगह को धोएं।
- यदि दांत लगा हो या खरोच हो तो घाव पर कुछ न लगाएं।
- यदि मांस निकल गया हो तो तत्काल डॉक्टर के पास जाएं।
- जल्द से जल्द टिटनस का इंजेक्शन और एआरवी लगवाएं।
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जालौन के जाखा निवासी महेंद्र की बेटी वर्षा (11) को दो महीने पहले एक पागल कुत्ते ने काट लिया था। उस समय घर वालों ने उसका इलाज नहीं कराया। बुधवार शाम को वर्षा पानी पीने जा रही थी अचानक चीखने लगी। घर वाले कुछ समझ भी नहीं पाये और वह जमीन पर गिर गई। जालौन में डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने संक्रामक रोग अस्पताल (आईडीएच) भेज दिया।
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डॉक्टरों के मुताबिक ऐसे लक्षणों को हाइड्रोफोबिया कहते हैं। शरीर में रैबीज का इंफेक्शन हो जाने से यह स्थिति आती है। फिलहाल उसका विशेष इलाज अस्पताल में शुरू कर दिया गया है।
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पापा इंजेक्शन लगवा दो
आईडीएच सेंटर में भर्ती वर्षा को अपनी बीमारी का एहसास हो गया है लेकिन घर वालों को तसल्ली देने के लिए वह बार-बार टिटनस का इंजेक्शन लगवाने की बात कह रही है। उसने अपने पिता से कहा कि टिटनस का इंजेक्शन लगवा दो, मैं ठीक हो जाऊंगी।
जानवर काटे तो कर लें पहचान
- जानवर काटे तो उसकी पहचान जरूर करनी चाहिए। यदि कोई जानवर कई लोगों को काट रहा है तो यह तय है कि वह रैबीज के संक्रमण के कारण पागल हो चुका है।
- यदि कोई जानवर अचानक किसी एक पर हमला करे तो उसे रैबीज संक्रमित नहीं कहा जा सकता है लेकिन ऐसे जानवरों पर कम से कम दस दिन नजर रखनी होती है। यदि नजर नहीं रख सकते तो बचाव के लिए एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवा लेना चाहिए।
यह होता है लक्षण
पागल जानवर के काटने के दस दिन बाद से ही कमजोरी, बुखार, शरीर में अकड़न, मांसपेशियों में दर्द, बेचैनी, पानी से नफरत, हवा से दिक्कत, गर्मी से दिक्कत होने लगती है। ऐसे मरीजों को तत्काल सीरम लगाया जाना चाहिए।
यह होता है डोज
एआरवी वैक्सीन पागल जानवर के काटने के तत्काल बाद लगना चाहिए। इसके बाद तीसरे, सातवें, चौदहवें और 28वें दिन इंजेक्शन लगना चाहिए। यदि सामान्य जानवर भी है तो बचाव के लिए कम से कम तीन इंजेक्शन तो लगवाना ही चाहिए। पीएचसी, सीएचसी और जिला अस्पताल में यह इंजेक्शन फ्री लगता है।
आदमखोर जानवर की तरह हरकत करता है इंसान
एआरवी न लगवाने या आधा-अधूरा डोज लगवाने वाले कई लोगों को 15 दिन में लक्षण दिखने लगते हैं तो कई को कुछ साल बाद लक्षण दिखते हैं। यदि शरीर में रैबीज फैल गया तो आदमी आदमखोर जानवर की तरह व्यवहार करने लगता है। ऐसे ज्यादातर मामलों में मरीज की मौत हो ही जाती है।
जानवर काटें तो यह करें
- तत्काल काटने वाली जगह को धोएं।
- यदि दांत लगा हो या खरोच हो तो घाव पर कुछ न लगाएं।
- यदि मांस निकल गया हो तो तत्काल डॉक्टर के पास जाएं।
- जल्द से जल्द टिटनस का इंजेक्शन और एआरवी लगवाएं।