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डॉक्टरों ने मौत के मुंह से निकाले 17 यात्री
मनोज चौरसिया, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 25 Nov 2016 10:00 AM IST
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कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कालेज के डॉक्टरों ने ट्रेन हादसे के 17 मरीजों को मौत के मुंह से निकाला। इनमें से 11 शॉक में चले गए थे, जबकि छह अन्य पसलियां टूटने से हुई चेस्ट इंजरी ‘हीमोन्यूमोथोरेक्स’ की वजह से ठीक से सांस नहीं ले पा रहे थे।
20 नवंबर को भोर पहर दुर्घटनाग्रस्त हुई इंदौर-पटना एक्सप्रेस के घायल यात्रियों में खून से लथपथ पूजा (30), जितेंद्र (55), अनिकेत (11), आकांक्षा (10), अभय (12), प्रमोद (58), राजकुमार (45), रामू (31), सनील (40), वजीर (30), अशोक कुमार (40) को बेहोशी की हालत में हैलट इमरजेंसी लाया गया था। सर्जरी विभाग के हेड डॉ. संजय काला, न्यूरो सर्जन डॉ. राघवेंद्र गुप्ता, डॉ. मनीष ने इन घायलों का ब्लड प्रेशर पता चल पा रहा था और न ही पल्स मिल रही थी।
ये सभी शॉक में थे। सर्जरी और न्यूरो सर्जरी विभाग के सभी सीनियर-जूनियर डॉक्टरों ने आपरेट किया। घंटों की मशक्कत के बाद उनकी जान बचाई जा सकी। हालांकि दूसरे दिन इनमें से बनारस निवासी अनिकेत की आईसीयू में मौत हो गई थी और पूजा को एम्स दिल्ली के लिए रेफर किया गया। अन्य घायल खतरे से बाहर है।
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डॉक्टरों ने बताया कि वजीर (30) के साथ रामू (40), सुनील कुमार (48), अशोक कुमार (48), जितेंद्र (55) और प्रमोद (58) की पसलियां टूटने की वजह से सीने में ब्लड, हवा भर गई थी। इसकी वजह से इन मरीजों के फेफड़े सिकुड़ गए थे। ये लोग बमुश्किल सांस ले पा रहे थे। इन्हें तुरंत ऑक्सीजन के साथ चेस्ट ट्यूब एवं सेंट्रल ट्यूब डालकर सीने में भरा गंदा ब्लड और हवा निकाली गई। तब उनके फेफड़ों की सिकुड़न कम हुई। इनमें से कुछ को अभी भी ऑक्सीजन देनी पड़ रही है। इसी तरह कई अन्य घायलों को ट्रीटमेंट दिया गया।
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20 नवंबर को भोर पहर दुर्घटनाग्रस्त हुई इंदौर-पटना एक्सप्रेस के घायल यात्रियों में खून से लथपथ पूजा (30), जितेंद्र (55), अनिकेत (11), आकांक्षा (10), अभय (12), प्रमोद (58), राजकुमार (45), रामू (31), सनील (40), वजीर (30), अशोक कुमार (40) को बेहोशी की हालत में हैलट इमरजेंसी लाया गया था। सर्जरी विभाग के हेड डॉ. संजय काला, न्यूरो सर्जन डॉ. राघवेंद्र गुप्ता, डॉ. मनीष ने इन घायलों का ब्लड प्रेशर पता चल पा रहा था और न ही पल्स मिल रही थी।
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ये सभी शॉक में थे। सर्जरी और न्यूरो सर्जरी विभाग के सभी सीनियर-जूनियर डॉक्टरों ने आपरेट किया। घंटों की मशक्कत के बाद उनकी जान बचाई जा सकी। हालांकि दूसरे दिन इनमें से बनारस निवासी अनिकेत की आईसीयू में मौत हो गई थी और पूजा को एम्स दिल्ली के लिए रेफर किया गया। अन्य घायल खतरे से बाहर है।
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डॉक्टरों ने बताया कि वजीर (30) के साथ रामू (40), सुनील कुमार (48), अशोक कुमार (48), जितेंद्र (55) और प्रमोद (58) की पसलियां टूटने की वजह से सीने में ब्लड, हवा भर गई थी। इसकी वजह से इन मरीजों के फेफड़े सिकुड़ गए थे। ये लोग बमुश्किल सांस ले पा रहे थे। इन्हें तुरंत ऑक्सीजन के साथ चेस्ट ट्यूब एवं सेंट्रल ट्यूब डालकर सीने में भरा गंदा ब्लड और हवा निकाली गई। तब उनके फेफड़ों की सिकुड़न कम हुई। इनमें से कुछ को अभी भी ऑक्सीजन देनी पड़ रही है। इसी तरह कई अन्य घायलों को ट्रीटमेंट दिया गया।