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Kanpur News: भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम में दीपेंद्र चयनित
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कानपुर। शहर के दिव्यांग क्रिकेटर दीपेंद्र सिंह का चयन भारतीय टीम में हुआ है। वह 31 अक्तूबर से दो नवंबर तक चेन्नई में भारत और श्रीलंका के बीच होने वाली वीबीएल ट्रॉफी-2026 में खेलेंगे। उत्तर प्रदेश से तीन अन्य खिलाड़ियों का भी चयन हुआ है। इनमें अयोध्या के राधिका प्रसाद, गाजियाबाद के शेखर चौधरी और बदायूं के विंटू यादव शामिल हैं। उत्तर प्रदेश डिफरेंटली एबल्ड क्रिकेट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सभी को शुभकामनाएं दीं।
नौबस्ता-हंसपुरम निवासी 25 वर्षीय दीपेंद्र पैर से जन्मजात दिव्यांग हैं। सिक्योरिटी गार्ड पिता वीरेंद्र सिंह के संघर्ष को पहचान दिलाने के उद्देश्य से उन्होंने वर्ष 2014-15 में क्रिकेट खेलना शुरू किया। क्राइस्ट चर्च मैदान पर कड़ा अभ्यास कर उन्होंने विकेट कीपिंग और आक्रामक बल्लेबाजी में अपनी पहचान बनाई। जनवरी 2025 में श्रीलंका में हुई अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में भी वह भारतीय टीम का हिस्सा रहे और विकेटकीपर बल्लेबाज की भूमिका निभाई।
दीपेंद्र अक्तूबर 2024 में उदयपुर में राष्ट्रीय प्रतियोगिता के दौरान लगातार तीन अर्धशतक लगा चुके हैं। 2024 में जयपुर में चैलेंजर ट्रॉफी खेलने वाले वह शहर के एकमात्र दिव्यांग खिलाड़ी थे। अटल कप में भी उन्होंने बल्ले और विकेटकीपिंग से प्रभावित किया है। अब तक 12 अर्धशतक लगा चुके दीपेंद्र यूपीसीए में आधिकारिक स्कोरर भी हैं और अमर क्लब की कप्तानी करते हैं।
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दीपेंद्र ने अपनी सफलता का श्रेय दिवंगत कोच अशोक मिश्रा को देते हुए कहा कि उन्होंने उनकी बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग को निखारा। उनका लक्ष्य दिव्यांग क्रिकेट को पहचान दिलाना है ताकि आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर मिल सकें।
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नौबस्ता-हंसपुरम निवासी 25 वर्षीय दीपेंद्र पैर से जन्मजात दिव्यांग हैं। सिक्योरिटी गार्ड पिता वीरेंद्र सिंह के संघर्ष को पहचान दिलाने के उद्देश्य से उन्होंने वर्ष 2014-15 में क्रिकेट खेलना शुरू किया। क्राइस्ट चर्च मैदान पर कड़ा अभ्यास कर उन्होंने विकेट कीपिंग और आक्रामक बल्लेबाजी में अपनी पहचान बनाई। जनवरी 2025 में श्रीलंका में हुई अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में भी वह भारतीय टीम का हिस्सा रहे और विकेटकीपर बल्लेबाज की भूमिका निभाई।
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दीपेंद्र अक्तूबर 2024 में उदयपुर में राष्ट्रीय प्रतियोगिता के दौरान लगातार तीन अर्धशतक लगा चुके हैं। 2024 में जयपुर में चैलेंजर ट्रॉफी खेलने वाले वह शहर के एकमात्र दिव्यांग खिलाड़ी थे। अटल कप में भी उन्होंने बल्ले और विकेटकीपिंग से प्रभावित किया है। अब तक 12 अर्धशतक लगा चुके दीपेंद्र यूपीसीए में आधिकारिक स्कोरर भी हैं और अमर क्लब की कप्तानी करते हैं।
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दीपेंद्र ने अपनी सफलता का श्रेय दिवंगत कोच अशोक मिश्रा को देते हुए कहा कि उन्होंने उनकी बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग को निखारा। उनका लक्ष्य दिव्यांग क्रिकेट को पहचान दिलाना है ताकि आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर मिल सकें।